संतकबीरनगर के बखिरा थाना क्षेत्र के परसा माफी गांव में घर से फ्रिज, सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी होने की शिकायत की पुलिस ने जांच की। शिकायतकर्ता बैतुल्लाह ने 8 अक्टूबर की रात चोरी होने का दावा किया था। हालांकि, पुलिस के घटनास्थल निरीक्षण में मकान के दरवाजे, खिड़कियां और सामान सुरक्षित मिले। कहीं भी तोड़फोड़ के निशान नहीं पाए गए। इन परिस्थितियों में पुलिस चोरी की पुष्टि नहीं कर सकी। एसपी संदीप कुमार मीना की टीम ने मामले की पड़ताल के दौरान शिकायतकर्ता के परिवार से जुड़ी परिस्थितियों और मकान के इस्तेमाल से संबंधित जानकारियां भी जुटाईं। पुलिस के मुताबिक, जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर चोरी की घटना की पुष्टि नहीं हो सकी। 9 अक्टूबर को दी थी शिकायत परसा माफी निवासी बैतुल्लाह पुत्र हैफ मुहम्मद ने 9 अक्टूबर को पुलिस को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर की रात उनके घर से एक फ्रिज, 15 ग्राम सोना, चांदी की पायल और 17 हजार रुपये नकद चोरी हो गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर मकान का निरीक्षण किया। दो तालों से बंद था मुख्य दरवाजा पुलिस के निरीक्षण में मकान का मुख्य दरवाजा लोहे के चैनल और दो तालों से बंद मिला। अंदर कमरों, दरवाजों, खिड़कियों और सामान की स्थिति भी सामान्य थी। पुलिस को जबरन प्रवेश करने या तोड़फोड़ किए जाने के निशान नहीं मिले। इन तथ्यों के आधार पर चोरी की शिकायत की पुष्टि नहीं हो सकी। साल में एक-दो बार आते हैं घर जांच में पता चला कि बैतुल्लाह साल में एक-दो बार ही घर आते हैं। उनके चाचा नूर मोहम्मद ने 8 सितंबर को मकान की ऊपरी मंजिल का दरवाजा खुला देखा था। इसकी जानकारी उन्होंने बैतुल्लाह के पिता हैफ मुहम्मद को दी थी, लेकिन उस समय चोरी होने की बात नहीं बताई गई थी। पुलिस ने इस जानकारी को भी जांच में शामिल किया। तलाक के विवाद का पहलू भी आया सामने पुलिस के मुताबिक, बैतुल्लाह और उनकी पत्नी के बीच तलाक को लेकर विवाद चल रहा है। सामान न देने को लेकर भी दोनों के बीच विवाद होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने इन परिस्थितियों और मौके पर मिले तथ्यों के आधार पर चोरी की पुष्टि नहीं होने की बात कही है। संतकबीरनगर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी घटना की सूचना देते समय सही और तथ्यात्मक जानकारी दें। असत्य या अपुष्ट सूचना से पुलिस के समय और संसाधनों का अनावश्यक इस्तेमाल हो सकता है। इससे वास्तविक जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचने में देरी होने की आशंका रहती है।

