2023 में खरीदे डस्टबीन 2026 तक नहीं बांटे:राजनपुर पंचायत में गड़बड़ी की शिकायत, आवेदनकर्ता पर मारपीट का केस दर्ज

2023 में खरीदे डस्टबीन 2026 तक नहीं बांटे:राजनपुर पंचायत में गड़बड़ी की शिकायत, आवेदनकर्ता पर मारपीट का केस दर्ज

सहरसा के महिषी प्रखंड की राजनपुर पंचायत में 2022-23 में खरीदे गए डस्टबीन और स्वच्छता उपकरण 2026 तक ज्यादातर वार्डों में नहीं बांटे गए। शिकायतकर्ता ने खरीद और वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वितरण में अनियमित को लेकर जांच टीम पहुंची तो उस दौरान राजनपुर पंचायत के मुखिया ने पिता पुत्र के साथ मारपीट किया और उल्टे उन पर महिषी थाने में केस भी दर्ज कर दिया। कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने की दलील गुरुवार को इस मामले में पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सहरसा पुलिस अधीक्षक से मुलाकात किया। चोरनिया गांव के आशीष कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी को आवेदन देकर मामले की जांच प्रमंडलीय उड़नदस्ता दल से कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सामान न बांटे जाने पर कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने की दलील दी। ”ज्यादातर ग्रामीणों को सामान नहीं मिला” आशीष कुमार, पिता विजेन्द्र यादव, के आवेदन के मुताबिक पंचायत में वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान 2,293 सामान्य डस्टबीन, 10 कम्युनिटी डस्टबीन, 14 पैडल रिक्शा, 1 ई-रिक्शा, 32 सेफ्टी किट और टूल्स किट खरीदे गए थे। शिकायत में कहा गया है कि नियमों के मुताबिक इन सामानों का पूरा वितरण 1 नवंबर से 16 नवंबर 2023 के बीच होना था। आरोप है कि ‘आरडी इंटरप्रिन्योर’ एजेंसी के साथ मिलकर कागजों पर बिल बनाए गए, जबकि ज्यादातर ग्रामीणों को सामान नहीं मिला। सहयोग पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को भेजे आवेदन में मामले की जांच की मांग की है। इनपुट में आवेदनकर्ता पर मारपीट का केस दर्ज होने का जिक्र है, लेकिन केस दर्ज होने की तारीख और पुलिस का पक्ष नहीं दिया गया है। इस फर्जीवाड़े की शिकायत जब परिवादी ने ‘सहयोग पोर्टल’ (Ref No- REF-831882) पर दर्ज कराई, तो पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक के अधिकारियों ने जो रिपोर्ट दी, वह हैरान करने वाली है। पानी कम होते ही वितरण कराने का दावा प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) और पंचायत सचिव द्वारा दिए गए जवाब में कहा गया कि: “डस्टबीन का क्रय GeM पोर्टल से क्रय समिति की अनुशंसा पर हुआ है। ”पांच वार्डों में वितरण कर दिया गया है, लेकिन कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण शेष वार्डों में वितरण करने में भारी परेशानी आ रही है। पानी कम होते ही वितरण करा दिया जाएगा।” इस पर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता ने कहा कि वर्ष 2023 की सामग्री को सितंबर 2026 तक क्यों दबाकर रखा गया? तीन साल तक कोसी का बहाना बनाकर कागजी खानापूरी की जा रही है और फोन पर ही जांच कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। स्थलीय जांच हो तो खुलेगा बड़ा घोटाला परिवादी आशीष कुमार ने आरोप लगाया कि 14 सितंबर को उन्हें फोन कर केवल खानापूरी की गई, जबकि जमीन पर कोई जांच टीम नहीं पहुंची। उन्होंने मांग की है कि किसी स्वतंत्र व निष्पक्ष एजेंसी अथवा उड़नदस्ता दल से स्थल पर जाकर घर-घर भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो राजनपुर पंचायत के मुखिया, तत्कालीन पंचायत सचिव व संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश होना तय है। सहरसा पुलिस अधीक्षक विक्रम सिहाग ने कहा इस मामले में आवेदन के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। सहरसा के महिषी प्रखंड की राजनपुर पंचायत में 2022-23 में खरीदे गए डस्टबीन और स्वच्छता उपकरण 2026 तक ज्यादातर वार्डों में नहीं बांटे गए। शिकायतकर्ता ने खरीद और वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वितरण में अनियमित को लेकर जांच टीम पहुंची तो उस दौरान राजनपुर पंचायत के मुखिया ने पिता पुत्र के साथ मारपीट किया और उल्टे उन पर महिषी थाने में केस भी दर्ज कर दिया। कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने की दलील गुरुवार को इस मामले में पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सहरसा पुलिस अधीक्षक से मुलाकात किया। चोरनिया गांव के आशीष कुमार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारी को आवेदन देकर मामले की जांच प्रमंडलीय उड़नदस्ता दल से कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सामान न बांटे जाने पर कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने की दलील दी। ”ज्यादातर ग्रामीणों को सामान नहीं मिला” आशीष कुमार, पिता विजेन्द्र यादव, के आवेदन के मुताबिक पंचायत में वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान 2,293 सामान्य डस्टबीन, 10 कम्युनिटी डस्टबीन, 14 पैडल रिक्शा, 1 ई-रिक्शा, 32 सेफ्टी किट और टूल्स किट खरीदे गए थे। शिकायत में कहा गया है कि नियमों के मुताबिक इन सामानों का पूरा वितरण 1 नवंबर से 16 नवंबर 2023 के बीच होना था। आरोप है कि ‘आरडी इंटरप्रिन्योर’ एजेंसी के साथ मिलकर कागजों पर बिल बनाए गए, जबकि ज्यादातर ग्रामीणों को सामान नहीं मिला। सहयोग पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को भेजे आवेदन में मामले की जांच की मांग की है। इनपुट में आवेदनकर्ता पर मारपीट का केस दर्ज होने का जिक्र है, लेकिन केस दर्ज होने की तारीख और पुलिस का पक्ष नहीं दिया गया है। इस फर्जीवाड़े की शिकायत जब परिवादी ने ‘सहयोग पोर्टल’ (Ref No- REF-831882) पर दर्ज कराई, तो पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक के अधिकारियों ने जो रिपोर्ट दी, वह हैरान करने वाली है। पानी कम होते ही वितरण कराने का दावा प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) और पंचायत सचिव द्वारा दिए गए जवाब में कहा गया कि: “डस्टबीन का क्रय GeM पोर्टल से क्रय समिति की अनुशंसा पर हुआ है। ”पांच वार्डों में वितरण कर दिया गया है, लेकिन कोसी नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण शेष वार्डों में वितरण करने में भारी परेशानी आ रही है। पानी कम होते ही वितरण करा दिया जाएगा।” इस पर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता ने कहा कि वर्ष 2023 की सामग्री को सितंबर 2026 तक क्यों दबाकर रखा गया? तीन साल तक कोसी का बहाना बनाकर कागजी खानापूरी की जा रही है और फोन पर ही जांच कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया। स्थलीय जांच हो तो खुलेगा बड़ा घोटाला परिवादी आशीष कुमार ने आरोप लगाया कि 14 सितंबर को उन्हें फोन कर केवल खानापूरी की गई, जबकि जमीन पर कोई जांच टीम नहीं पहुंची। उन्होंने मांग की है कि किसी स्वतंत्र व निष्पक्ष एजेंसी अथवा उड़नदस्ता दल से स्थल पर जाकर घर-घर भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो राजनपुर पंचायत के मुखिया, तत्कालीन पंचायत सचिव व संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से हुए एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश होना तय है। सहरसा पुलिस अधीक्षक विक्रम सिहाग ने कहा इस मामले में आवेदन के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी।  

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