वैशाली के राघोपुर में मंगलवार को हुए नाव हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने 14 जनवरी 2017 की उस त्रासदी की याद दिला दी जब पटना में गंगा नदी में डूबने से 24 लोगों की मौत हुई थी। पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित पतंग उत्सव (सबलपुर दियारा में आयोजित) के दौरान एक नाव गंगा नदी में डूब गई थी। मंगलवार को हुई घटना के बाद मंत्री ने बयान दिया कि इससे सीख लेने की जरूरत है, लेकिन सच्चाई तो यह है कि 2017 के हादसे से सबक लिया गया होता तो राघोपुर वाली घटना को टाला जा सकता था। सोशल एक्टिविस्ट विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने 2017 में पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाकर ऐसी घटना फिर न हो इसके लिए सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार की ओर से बैठकों का सिलसिला चला, लेकिन सारी लर्निंग फाइलों में दबकर रह गई। 2017 के नाव हादसे के बाद कौन सी सीख लेने की बात कही गई? क्या सावधानियां बरती जानी थी? पढ़िए रिपोर्ट..। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार क्यों हुआ था 2017 का हादसा 2017 में आपदा प्रबंधन विभाग ने कोर्ट को बताया कि बिहार में नाव हादसों के प्रमुख कारणों में ओवरलोडिंग, नाव की जर्जर स्थिति, खराब मौसम, हवा की स्थिति आदि प्रमुख हैं। आमतौर पर यह पाया गया है कि त्योहार के समय नाव पर ओवरलोडिंग होती है। आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यशाला की रिपोर्ट सरकार ने कोर्ट में सौंपी थी। सूर्यास्त के बाद नौका परिचालन पर रोक लगे बिहार सरकार के अवर सचिव उमेश प्रसाद रजक ने जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कहा कि स्थापित नदी थाना को एक्टिव करना है। इसके क्षेत्राधिकार तय किए जाएं। जरूरत के अनुसार नदी थानों की स्थापना की जाए। यह भी कहा गया कि सूर्यास्त के बाद नाव चलाने और निजी नावों के अवैध परिचालन पर रोक लगायी जाए। 2017 के नाव हादसे की जांच में ये बातें सामने आईं दुर्गा पूजा के बाद सरकार की नाकामी पर फिर हाईकोर्ट जाऊंगा गुड्डू बाबा ने कहा, ‘14 जनवरी 2017 को पतंग उत्सव पर पर्यटन विभाग की ओर से कहा गया था कि मुफ्त में क्रूज सेवा उपलब्ध करायी जाएगी। एक धागे से 100 पतंग उड़ाने का आयोजन था।’ ‘क्रूज सेवा दो बजे दिन के बाद बंद कर दी गई थी, उसके बाद लोगों को लौटना था और नाव पर ज्यादा लोग चढ़ गए थे। उस दर्दनाक हादसे से सीख ली जाए और जिम्मेदारों की शिनाख्त हो इसके लिए मैं हाईकोर्ट गया था।’ ‘मामला आज भी हाईकोर्ट में लंबित है। उस समय मुख्य सचिव से लेकर आपदा प्रबंधन विभाग ने कई बैठकें की थी कि क्या-क्या सुधार करना है। कुछ अफसर निलंबित हुए थे।’ वैशाली के राघोपुर में मंगलवार को हुए नाव हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने 14 जनवरी 2017 की उस त्रासदी की याद दिला दी जब पटना में गंगा नदी में डूबने से 24 लोगों की मौत हुई थी। पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित पतंग उत्सव (सबलपुर दियारा में आयोजित) के दौरान एक नाव गंगा नदी में डूब गई थी। मंगलवार को हुई घटना के बाद मंत्री ने बयान दिया कि इससे सीख लेने की जरूरत है, लेकिन सच्चाई तो यह है कि 2017 के हादसे से सबक लिया गया होता तो राघोपुर वाली घटना को टाला जा सकता था। सोशल एक्टिविस्ट विकास चंद्र उर्फ गुड्डू बाबा ने 2017 में पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाकर ऐसी घटना फिर न हो इसके लिए सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार की ओर से बैठकों का सिलसिला चला, लेकिन सारी लर्निंग फाइलों में दबकर रह गई। 2017 के नाव हादसे के बाद कौन सी सीख लेने की बात कही गई? क्या सावधानियां बरती जानी थी? पढ़िए रिपोर्ट..। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार क्यों हुआ था 2017 का हादसा 2017 में आपदा प्रबंधन विभाग ने कोर्ट को बताया कि बिहार में नाव हादसों के प्रमुख कारणों में ओवरलोडिंग, नाव की जर्जर स्थिति, खराब मौसम, हवा की स्थिति आदि प्रमुख हैं। आमतौर पर यह पाया गया है कि त्योहार के समय नाव पर ओवरलोडिंग होती है। आपदा प्रबंधन विभाग की कार्यशाला की रिपोर्ट सरकार ने कोर्ट में सौंपी थी। सूर्यास्त के बाद नौका परिचालन पर रोक लगे बिहार सरकार के अवर सचिव उमेश प्रसाद रजक ने जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर कहा कि स्थापित नदी थाना को एक्टिव करना है। इसके क्षेत्राधिकार तय किए जाएं। जरूरत के अनुसार नदी थानों की स्थापना की जाए। यह भी कहा गया कि सूर्यास्त के बाद नाव चलाने और निजी नावों के अवैध परिचालन पर रोक लगायी जाए। 2017 के नाव हादसे की जांच में ये बातें सामने आईं दुर्गा पूजा के बाद सरकार की नाकामी पर फिर हाईकोर्ट जाऊंगा गुड्डू बाबा ने कहा, ‘14 जनवरी 2017 को पतंग उत्सव पर पर्यटन विभाग की ओर से कहा गया था कि मुफ्त में क्रूज सेवा उपलब्ध करायी जाएगी। एक धागे से 100 पतंग उड़ाने का आयोजन था।’ ‘क्रूज सेवा दो बजे दिन के बाद बंद कर दी गई थी, उसके बाद लोगों को लौटना था और नाव पर ज्यादा लोग चढ़ गए थे। उस दर्दनाक हादसे से सीख ली जाए और जिम्मेदारों की शिनाख्त हो इसके लिए मैं हाईकोर्ट गया था।’ ‘मामला आज भी हाईकोर्ट में लंबित है। उस समय मुख्य सचिव से लेकर आपदा प्रबंधन विभाग ने कई बैठकें की थी कि क्या-क्या सुधार करना है। कुछ अफसर निलंबित हुए थे।’

