पेट्रोल पंप पर अब तक आपने कर्मचारी को नोजल उठाकर अपनी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरते देखा होगा। मशीन पर मीटर चलता है, तय रकम के हिसाब से ईंधन भरता है और फिर कर्मचारी नोजल वापस रख देता है। लेकिन इंदौर में अब इस रोजमर्रा की प्रक्रिया में एक नया प्रयोग शुरू हुआ है। यहां ग्राहक सिर्फ पैसे देने या मीटर देखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपनी गाड़ी में ईंधन भरने के लिए खुद नोजल भी उठा सकेगा। शहर के अन्नपूर्णा रोड स्थित चाणक्यपुरी चौराहे के पास गायत्री पेट्रोल पंप पर सेल्फ सर्विस की सुविधा शुरू की गई है। इस व्यवस्था में ग्राहक की-पैड के जरिए ईंधन की मात्रा या रकम सेट कर सकता है और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए खुद पेट्रोल-डीजल भर सकता है। पंप प्रबंधन के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारी, सुपरवाइजर और मैनेजर मौजूद रहेंगे। सोशल मीडिया के वीडियो से उठे सवाल पेट्रोल पंपों पर ईंधन की मात्रा और मशीन की कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते रहे हैं। इन वीडियो को देखकर कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि मशीन किस तरह काम करती है, नोजल कब बंद होता है और ईंधन की निर्धारित मात्रा कैसे सुनिश्चित होती है। गायत्री पेट्रोल पंप के मैनेजर संजय दुबे के मुताबिक, ऐसे वीडियो देखने के बाद लोगों के मन में नोजल और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर तरह-तरह की शंकाएं आने लगी थीं। इसी संदर्भ में ग्राहकों को सीधे प्रक्रिया समझाने के लिए सेल्फ सर्विस की शुरुआत की गई है। पेट्रोल पंप पर ईंधन भरने की प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से संचालित होती है। इसके पीछे मशीनों, ऑटोमेशन और निर्धारित तकनीकी व्यवस्था की भूमिका होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्राहक को प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव मिलने से उसके मन में मौजूद सवालों का समाधान करने में मदद मिल सकती है। 4 से 5 सेकंड में सेटिंग के बाद भर सकेंगे ईंधन
इस सुविधा में ग्राहक को सीधे नोजल उठाकर ईंधन भरना शुरू नहीं करना है। इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है। पंप प्रबंधन के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में कर्मचारियों की निगरानी और सुरक्षा संबंधी सावधानियों का ध्यान रखा जाता है। सेल्फ सर्विस की प्रक्रिया को ऐसे समझिए सबसे पहले की-पैड पर सेटिंग: ग्राहक को पंप कर्मचारी की मदद से समझाया जाएगा कि मशीन के की-पैड पर कितने रुपए का या कितने लीटर का ईंधन भरना है। इसके बाद निर्धारित मात्रा या रकम सेट की जाएगी। नोजल को टैंक में डालना: सेटिंग पूरी होने के बाद ग्राहक सावधानी से नोजल को वाहन के फ्यूल टैंक में लगाएगा। मैनेजर के मुताबिक, यह शुरुआती प्रक्रिया करीब 4 से 5 सेकंड में पूरी हो सकती है। निर्धारित मात्रा में ईंधन की डिलीवरी: मशीन की सेटिंग के मुताबिक ईंधन भरा जाएगा। इस दौरान पंप का कर्मचारी और अन्य जिम्मेदार लोग निगरानी के लिए मौजूद रहेंगे। ईंधन भरने के बाद नोजल बंद: मैनेजर के अनुसार, डिलीवरी पूरी होने पर नोजल अपने आप बंद हो जाता है। इसके बाद कुछ सेकंड रुककर नोजल को सावधानी से बाहर निकालकर उसकी जगह पर रखा जाता है। कर्मचारियों की नौकरी पर असर नहीं, निगरानी में ही होगी फिलिंग
मैनेजर संजय दुबे ने इस आशंका पर कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसी का रोजगार कम करना नहीं है। उन्होंने देश में रोजगार के महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्राहक के खुद ईंधन भरने के बावजूद कर्मचारियों की मौजूदगी और मार्गदर्शन की व्यवस्था रहेगी। पंप प्रबंधन के मुताबिक, मैनेजर, सुपरवाइजर और ईंधन भरने वाले कर्मचारी ग्राहक को प्रक्रिया समझाने तथा सुरक्षित संचालन में मदद करेंगे। नए कर्मचारी भी तीन से चार बार प्रशिक्षण और अभ्यास के बाद इस प्रक्रिया को आसानी से सीख सकते हैं। ग्राहक के लिए नया अनुभव, लेकिन सुरक्षा सबसे जरूरी
पेट्रोल पंप पर खुद नोजल पकड़कर ईंधन भरना कुछ ग्राहकों के लिए नया और दिलचस्प अनुभव हो सकता है। अब तक ज्यादातर लोग कर्मचारी को ही यह काम करते देखते आए हैं। सेल्फ सर्विस से ग्राहक मशीन की सेटिंग, नोजल के संचालन और ईंधन भरने के तरीके को करीब से समझ सकता है। लेकिन पेट्रोल और डीजल जैसे ज्वलनशील ईंधन के मामले में उत्सुकता के साथ सावधानी भी जरूरी है। ग्राहक को पंप के कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना होगा।

