संभल में मुफ्ती फारुक हामिदी का 15वां उर्स संपन्न:कादरी मंजिल में उलेमा-ए-किराम और अकीदतमंदों ने खिराज-ए-अकीदत पेश की

संभल में मुफ्ती फारुक हामिदी का 15वां उर्स संपन्न:कादरी मंजिल में उलेमा-ए-किराम और अकीदतमंदों ने खिराज-ए-अकीदत पेश की

संभल में ईदगाह के पूर्व इमाम और प्रख्यात इस्लामी विद्वान मुफ़्ती मोहम्मद फ़ारूक़ हामिदी क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह का 15वां सालाना उर्स रविवार को मनाया गया। यह आयोजन संभल के कोट शर्क़ी स्थित क़ादरी मंज़िल में श्रद्धा और अकीदत के साथ संपन्न हुआ। इस उर्स में उलेमा-ए-किराम, इमामों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर मरहूम को खिराज-ए-अकीदत पेश की। कार्यक्रम का शुभारंभ क़ारी मोहम्मद इमरान द्वारा पवित्र क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत से हुआ। इसके उपरांत सैयद मिन्हाजुल क़ादिर ने नात-ओ-मनक़बत प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित जनसमूह ने ध्यानपूर्वक सुना। इस अवसर पर हज़रत मुफ़्ती मोहम्मद फ़ारूक़ हामिदी रहमतुल्लाह अलैह की धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक सेवाओं को विशेष रूप से याद किया गया। मुरादाबाद से आए मुख्य वक्ता मुफ़्ती मिस्बाहुल हसन नईमी ने अपने संबोधन में मुफ्ती फारुक हामिदी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मुफ़्ती हामिदी ने अपना पूरा जीवन इस्लाम की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार, धार्मिक मार्गदर्शन, फ़तवा-निगारी और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने हमेशा प्रेम, भाईचारे, एकता और इंसानियत का संदेश दिया, जिससे समाज को सही दिशा मिली। उनकी लिखी धार्मिक पुस्तकें आज भी लोगों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं। इंसानियत की सेवा के कार्यों को जारी रखने का संकल्प इस अवसर पर मौलाना फैजान अशरफ हामिदी ने शजरा शरीफ़ पढ़ा। सलातो-सलाम के बाद मौलाना सैयद यज़दानी मियाँ ने विशेष दुआ कराई। इस दुआ में मरहूम की मग़फ़िरत, उम्मत की बेहतरी, देश में अमन-ओ-अमान और संभल की खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने ‘आमीन’ कहकर दुआ में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम के समापन पर क़ारी बुरहान अशरफ हामिदी और कारी गाजी अशरफ हामिदी द्वारा लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने हज़रत मुफ़्ती फ़ारूक़ हामिदी के मिशन को आगे बढ़ाने और समाज की भलाई तथा इंसानियत की सेवा के कार्यों को जारी रखने का संकल्प लिया। उर्स में मौलाना नफ़ीस अख़्तर अशरफ़ी, मौलाना क़ारी इरफ़ान लतीफ़ी, मौलाना शुऐब अमजदी, मौलाना सलीम अशरफ़ हामिदी, मौलाना मुज्तबा हसन अशरफ़ी, क़ारी बद्र आलम निज़ामी, मुफ़्ती गुलफ़ाम रज़ा, मुफ़्ती अय्यूब मिस्बाही, मुफ़्ती ज़ैनुल आबिदीन सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक माहौल में संपन्न हुआ।

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