14 महीने पहले रेप, गर्भ ठहरने पर जबरन कराया गर्भपात:पीड़िता ने केस दर्ज कराया फिर भी गिरफ्तारी नहीं, SP से शिकायत

14 महीने पहले रेप, गर्भ ठहरने पर जबरन कराया गर्भपात:पीड़िता ने केस दर्ज कराया फिर भी गिरफ्तारी नहीं, SP से शिकायत

कानपुर देहात में एक महिला ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने पर पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। महिला का आरोप है कि कोर्ट के आदेश पर पॉक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने उसके बयान दर्ज करने के साथ मेडिकल भी कराया, लेकिन इसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। पीड़िता ने मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपितों की गिरफ्तारी और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। पीड़िता के मुताबिक, करीब 14 महीने पहले एक युवक ने उसके साथ रेप किया था। इससे वह गर्भवती हो गई। आरोप है कि युवक को जब इसकी जानकारी हुई तो उसने जबरन उसका गर्भपात करा दिया। इसके बाद पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर थाना पुलिस ने पॉक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। बयान और मेडिकल के बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी महिला का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसके बयान लिए और मेडिकल कराया। उसने अपना लिखित बयान शपथपत्र के साथ जांच में शामिल कराने के लिए पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से भी भेजा। इसके बावजूद अब तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मामले में कार्रवाई नहीं होने से उसे न्याय मिलने को लेकर चिंता बनी हुई है। 1 सितंबर को घर पहुंचकर केस वापस लेने का दबाव, धमकी का आरोप पीड़िता ने शिकायत में बताया कि 1 सितंबर 2026 को छोटू उर्फ रोहित और उसके परिवार के कुछ लोग उसके घर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया। केस वापस नहीं लेने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। पीड़िता का कहना है कि इस घटना के बाद वह और उसका परिवार डरा हुआ है और उन्हें किसी अनहोनी की आशंका है। SP ने रनिया पुलिस को जांच के आदेश दिए, गिरफ्तारी पर उठे सवाल पीड़िता ने एसपी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपितों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के साथ परिवार की सुरक्षा की मांग की है। कानपुर देहात की एसपी श्रद्धा नरेंद्र ने बताया कि शिकायत के आधार पर रनिया पुलिस को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होगा कि गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई और पीड़िता द्वारा लगाए गए धमकी के आरोपों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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