नकली दवाओं के कारोबार पर कार्रवाई कर आरोपियों से जब्त किया गया माल ही अब औषधि विभाग की लापरवाही का शिकार हो रहा है। छापों में जब्त नकली, फिजीशियन सैंपल, एक्सपायर और हॉस्पिटल सप्लाई की दवाएं सुरक्षित रखने के बजाय खुले में पड़ी हैं। बारिश में भीगने से इनके रैपर, प्रिंटिंग और कार्टन गल रहे हैं। कई दवाओं की पहचान तक मुश्किल हो गई है। जबकि आपराधिक मामलों में यही जब्त माल आरोपियों के खिलाफ अहम सबूत होता है। कोर्ट में जब्त माल पेश करने का आदेश होने पर उसके खराब या नष्ट होने से आरोप साबित करना मुश्किल हो सकता है और केस कमजोर पड़ सकता है। औषधि विभाग ने पिछले वर्षों में मेडिकल स्टोर और गोदामों पर छापे मारकर बड़ी मात्रा में दवाएं जब्त की थीं। वर्ष 2007 में सिकंदरा के कैलाशपुरी स्थित हेल्थ वर्कर ट्रेनिंग सेंटर में जब्त दवाओं को रखने के लिए तीन कमरे लिए गए थे। वर्ष 2015 तक कार्रवाई में जब्त की गई दवाएं इन्हीं कमरों में रखी जाती रहीं। अब यहां सीएमओ कार्यालय संचालित है, लेकिन इन तीन कमरों में करीब 15 साल से जब्त दवाएं रखी हुई हैं। गैलरी और खुले में पड़े हैं कार्टन-कट्टे कमरों के बाहर गैलरी और खुले स्थान पर भी जब्त दवाओं के कार्टन और कट्टे पड़े हैं। बारिश का पानी भरने से इनकी पैकिंग खराब हो रही है। कई दवाओं के रैपर और प्रिंटिंग मिट गई है। इससे दवा का नाम, कंपनी, बैच नंबर समेत दूसरी पहचान संबंधी जानकारी पढ़ना मुश्किल हो रहा है। खुले में पड़े जब्त माल में सिरप, टैबलेट और इंजेक्शन भी शामिल हैं। कई कार्टन पानी में भीगकर गल चुके हैं। सिरप की बोतलों पर लगे रैपर खराब होने से उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। 2015 के बाद जब्त दवाएं नौबारी में रखी जा रहीं वर्ष 2015 के बाद औषधि विभाग की कार्रवाई में जब्त की जाने वाली दवाओं को नौबारी, मधु नगर में रखने की व्यवस्था की गई। वहीं, पुराने मामलों का जब्त माल अभी भी सीएमओ कार्यालय के तीन कमरों में मौजूद है। पुराने मामलों की कोर्ट में सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त औषधि निरीक्षक इन कमरों से जब्त माल निकालकर कोर्ट में पेश करते हैं। कई मामलों की सुनवाई पूरी, फिर भी नहीं नष्ट हुआ माल पुराने कई मामलों में कोर्ट की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में जब्त दवाएं अभी रखी हुई हैं। इनमें ऐसी दवाएं भी हैं जिन्हें नष्ट किया जाना है। लेकिन इनका निस्तारण नहीं हुआ। इसके चलते दवाएं कमरों से बाहर गैलरी और खुले स्थान तक पहुंच गईं। जब्त माल नष्ट हुआ तो कमजोर हो सकता है केस आपराधिक मामलों में जब्त दवा महत्वपूर्ण साक्ष्य होती है। न्यायालय जरूरत पड़ने पर जब्त माल को प्रस्तुत करने का आदेश दे सकता है। ऐसे में यदि दवा के रैपर, पैकिंग और पहचान संबंधी जानकारी नष्ट हो जाए तो जब्त माल की पहचान और उसे मामले से जोड़ना मुश्किल हो सकता है। इससे आरोपियों के खिलाफ केस कमजोर होने की आशंका रहती है। बोले सहायक आयुक्त- जांच कराएंगे सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता ने कहा, “मैंने बीते महीने ही कार्यभार संभाला है। कार्रवाई में जब्त दवाओं को सुरक्षित रखा जाना चाहिए। ये खुले में क्यों रखी गई हैं, इसकी रिपोर्ट औषधि निरीक्षक से मांगी जाएगी। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच कराएंगे।” बोले प्रभारी सीएमओ- कमरों से दवाएं हटाने को पत्र लिखेंगे प्रभारी सीएमओ डॉ. अमित रावत ने कहा कि तीन कमरे औषधि विभाग के पास हैं। दवाएं हटाने के लिए औषधि विभाग को पत्र लिखा जा रहा है, ताकि इन कमरों का इस्तेमाल सीएमओ कार्यालय के काम में किया जा सके।

