जगह- दीघा घाट, पटना
वक्त- रात के 10 बजे गंगा नदी किनारे सड़क पर खड़े ठेला पर बैठा करीब एक साल का यह बच्चा भूख के मारे लगातार रो रहा है। पेट खाली है, मच्छर नोच रहे हैं। शरीर पर पूरे कपड़े नहीं। बच्चा समझ नहीं पा रहा कि मम्मी दूध क्यों नहीं दे रही है। यह हालत किसी एक बच्चे की नहीं। पटना के दीघा घाट और गंगा पथ (मरीन ड्राइव) के नीचे बसे बिंद टोली में बाढ़ का पानी भर गया है। इसके चलते करीब 800 परिवार सड़क पर आ गए हैं। इन परिवारों के सैकड़ों बच्चों को ठीक से खाना नहीं मिल रहा। गंगा पथ के एप्रोच रोड और सड़क किनारे शरण लिए बिंदटोली के करीब 4 हजार लोग किस हालत में हैं? इन्हें किस तरह की परेशानी हो रही है। यह जानने के लिए भास्कर की टीम रात 10 बजे पहुंची। बिहार के 14 जिलों के 82 प्रखंडों की 491 पंचायतें डूबीं हैं। 36 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 5 हजार स्कूल पानी में डूबने के चलते बंद हैं। 500 से ज्यादा श्मशान डूब गए हैं, जिसके चलते अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट, साथ में जानिए बाढ़ प्रभावित जिलों का हाल। हर साल गंगा में डूब जाती है बिंद टोली पटना के दीघा घाट और मरीन ड्राइव के नीचे स्थित बिंदटोली के करीब 4 हजार लोग हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते ही पूरी बस्ती जलमग्न हो जाती है। लोग अपने मवेशियों के साथ सड़क किनारे या गंगा पथ के एप्रोच रोड पर शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। हमने सड़क किनारे टेंट या खुले में रह रहे लोगों से उनका हाल जाना। सीमा देवी ने कहा, ‘दोनों टाइम चावल मिलता है वह भी कच्चा। सब्जी भी सिर्फ पानी में आलू उबाल कर देते हैं। सुबह में 11 या 12 बजे खाना मिलता है। कभी-कभी तो 1 भी बज जाता है। घर में छोटे बच्चे हैं। कम से कम उनको दूध मिलना चाहिए। सबसे बड़ी परेशानी पीने के पानी की है। जिनके पास पैसे हैं वे तो पानी खरीदकर ले आते हैं, हमलोग कहां से लाएं। बच्चे के कान में दर्द है। कोई देखने वाला नहीं है।’ सांप-बिच्छुओं के डर में गुजर रही रात सब्जी बेचने वाली शांति देवी ने कहा, ‘मेरे घर में पानी घुस गया है। हम लोगों के पास कोई साधन नहीं है। न रहने का इंतजाम है न बच्चों को खिलाने का। सुबह में बच्चे चूड़ा और गुड़ खाकर रह रहे हैं। दोपहर का खाना 1 बजे तक मिलता है। पानी में घुसकर आना-जाना और सारा काम करना पड़ता है। इसके कारण पैर में इंफेक्शन हो गया है।’ ‘खाने में दाल, भात और सिर्फ आलू की सब्जी दी जा रही है। सभी बच्चे वही खाकर रह रहे हैं। बच्चों के लिए दूध नहीं मिल रहा है। अंधेरे के कारण बच्चे सो नहीं पाते, रात भर रोते हैं।’ लालमणी देवी ने अपना दुखड़ा सुनाया, ‘हमलोग अपने बच्चों को पढ़ना चाहते हैं। उन्हें बड़ा आदमी बनना चाहते हैं, लेकिन स्कूल में फीस देने के भी पैसे नहीं हैं। चाहती हूं कि बेटी की नौकरी लग जाए। इसके बाद उसकी शादी करें। बाढ़ के चलते बेटी स्कूल नहीं जा पा रही है। पानी भरा होने के कारण स्कूल नहीं खुला है। मोबाइल चार्ज करने के लिए बाजार भेजना पड़ता है।’ खाना मिले या न मिले, पीने का पानी चाहिए सुकुल ने कहा, ‘सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। हमलोग बहुत दूर से पानी लेकर आते हैं। खाना मिले या नहीं, साफ पानी सबको मिलना चाहिए। यहां शौचालय की भी समस्या है। महिलाएं बाहर जाती हैं।’ अशोक महतो ने कहा, ‘हर साल बिंद टोली डूबती है। 2 से 4 दिन तक खाने के लिए लंगर लगा दिया जाता है। इसके बाद कोई देखने वाला नहीं। सरकार ने हम लोगों के फसल लगे खेत काटकर पुल बनवा दिया, लेकिन बिंद टोली में मिट्टी भरने को लेकर कार्रवाई नहीं की जा रही है।’ बिरजू ने बताया, ‘हर साल बिंद टोली डूब जाती है, लेकिन इसका हल नहीं निकलता। सरकार दो समय खाना दे रही है। बच्चों को बाहर से लाकर कुछ-कुछ खिलाना पड़ता है।’ बिहार में बाढ़ से 36 लाख लोग प्रभावित, 5 हजार स्कूल डूबे बिहार में गंगा, कोसी और गंडक जैसी नदियों के उफान से 14 जिलों में 36 लाख लोग बाढ़ से घिरे हुए हैं। बुधवार दोपहर को पटना के दीघा घाट पर गंगा नदी का जलस्तर 51.29 मीटर दर्ज किया गया। एक दिन पहले यह 50.52 मीटर था। गंगा का पानी खतरे के निशान से 0.84 मीटर ऊपर है। बाढ़ के चलते पटना, मुंगेर और भागलपुर समेत 14 जिलों के 5 हजार स्कूल पानी में डूब गए हैं। एक महीने से करीब 3 लाख से अधिक छात्रों की पढ़ाई ठप है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने क्लास 1 से 12वीं तक की परीक्षाओं का शेड्यूल घोषित कर दिया है। 500 से ज्यादा श्मशान डूबे बाढ़ के चलते 500 से अधिक श्मशान डूब गए हैं। गंगा, गंडक जैसी नदियों के किनारे के श्मशान घाट डूबे हैं, जिसके चलते अंतिम संस्कार करने में परेशानी हो रही है। अब जानिए बाढ़ प्रभावित 14 जिलों का हाल
1- पटना में घट रहा गंगा का पानी, सभी 50 घाट जलमग्न पटना में गंगा के जलस्तर में उतार चढ़ाव हो रहा है। बुधवार दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर 51.29 मीटर रिकॉर्ड किया गया। एक दिन पहले यह 50.52 मीटर था। मंगलवार को दीघा घाट पर जलस्तर लाल निशान से 1.01 मीटर था। पटना में गंगा के सभी 50 घाट जलमग्न हैं। पुनपुन नदी में पानी घटने की रफ्तार धीमी है। श्रीपालपुर गेज प्वाइंट पर 0.36 मीटर कम हुआ है। यहां जलस्तर खतरे के निशान से 2.58 मीटर ऊपर है। बाढ़ प्रभावित मनेर, दानापुर, पाटलिपुत्र, पुनपुन, बख्तियारपुर, मोकामा आदि अंचलों में 201 नावें चलाई जा रही हैं। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की 10 टीमें लगी हैं। 2- भागलपुर: यूनिवर्सिटी में चल रही छात्र गंगा और कोसी नदी के उफान से जिले में बाढ़ विकराल होती जा रही है। 82 पंचायतों में 269 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। प्रभावित लोगों की संख्या 3.87 लाख हो गई है। गंगा नदी का जलस्तर 32.81 मीटर दर्ज किया गया। तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में गंगा का पानी घुस गया है। प्रशासनिक भवन, सीनेट हॉल, महिला छात्रावास, कैंटीन, प्रोफेसर्स कॉलोनी समेत कैंपस के अधिकांश हिस्से जलमग्न हो गए हैं। छात्रों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
नाथनगर के बेलखुरिया, मनिहारी और मनियारपुर के स्कूलों में बाढ़ और बारिश का पानी घुस गया है। कई जगहों पर घुटने भर से लेकर कई फीट तक पानी है। बेलखुरिया पंचायत के मध्य विद्यालय बेलखुरिया की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां बच्चे कंधे पर स्कूल बैग लेकर पानी के बीच से गुजरते दिखे। 3- कटिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ा, खतरे में रेलवे ट्रैक गंगा, कोसी, बरंडी और कारी कोसी नदियों में उफान है। कुरसेला, बरारी, मनिहारी और अमदाबाद अंचलों के 238 गांवों में रहने वाले 4.33 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। कुरसेला में कोसी नदी का जलस्तर 31.55 मीटर दर्ज किया गया। एक दिन पहले यह 31.40 मीटर था। पानी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर है। मनिहारी आउटर सिग्नल के पास गंगा का पानी रेलवे ट्रैक से महज एक मीटर दूर रह गया है। रिसाव तेज होने से रेल लाइन धंसने का खतरा मंडराने लगा है। 4- बेगूसराय में डूबे श्मशान घाट, जहां-तहां हो रहा अंतिम संस्कार बेगूसराय में गंगा नदी के बाढ़ के चलते अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है। गंगा किनारे के श्मशान घाट पानी में डूब गए हैं। इसके चलते जहां-तहां अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बेगूसराय में गंगा किनारे चार प्रमुख श्मशान घाट (सिमरिया घाट, अयोध्या घाट, झमटिया घाट और मुंगेर घाट) हैं। अयोध्या घाट पूरी तरह से डूब जाने के कारण वहां अंतिम संस्कार बंद कर दिया गया है। झमटिया और सिमरिया घाट पर बांध के किनारे अंतिम संस्कार हो रहा है। 5- खगड़िआ में खतरे के निशान से ऊपर कोसी, 13 तक स्कूल बंद कोसी नदी खगड़िया में खतरे के निशान से 1.41 मीटर ऊपर बह रही है। बुधवार दोपहर को जलस्तर 35.26 मीटर रिकॉर्ड किया गया। एक दिन पहले यह 35.15 मीटर था। बाढ़ का पानी स्कूलों तक पहुंच गया है। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 59 बाढ़ प्रभावित विद्यालयों को 13 सितंबर तक बंद कर दिया है। वैशाली से समस्तीपुर तक ये 9 जिलों भी बाढ़ की चपेट में वैशाली: गंगा और गंडक में आए उफान के चलते हाजीपुर से राघोपुर तक सड़कें पानी में डूबी हैं। 6 प्रखंड के 85 गांव के करीब 95 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं। गोपालगंज: वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने के चलते गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। डुमरियाघाट के समीप नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई। समस्तीपुर: मोहनपुर, मोहिउद्ददीनगर व विद्यापतिनगर प्रखंडों के 2.33 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। 81 सामुदायिक रसोई एवं 18 मेडिकल कैंप चलाए जा रहे हैं। भोजपुर: गंगा, सोन, बनास, गांगी, धर्मावती व छेर नदियां उफान पर हैं। आरा सदर प्रखंड के 50 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। आरा-बक्सर एनएच-84, आरा-जमीरा-चांदीपथ, आरा-पैगा पथ और आरा-सरैंया-सिन्हा पथ सहित कई रास्तों पर आवागमन बाधित है। जिले में 40,047.55 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में है। सीवान: सरयू नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने गुठनी, दरौली और सिसवन प्रखंडों में बाढ़ का खतरा है। गुनी प्रखंड में बाढ़ का पानी भर गया है। शेखपुरा: हरोहर नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से घाटकुसुम्भा प्रखंड की पांच पंचायतों के करीब 17 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ का पानी 100 से अधिक घरों में प्रवेश कर गया है। मुंगेर: छह प्रखंडों की 37 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। गंगा का पानी बरियारपुर के प्रखंड व अंचल कार्यालय व थाना परिसर में भी पहुंच गया। बरियारपुर-खड़गपुर मार्ग पर सड़क के दोनों ओर बाढ़ का पानी जमा है। ढोल पहाड़ी गांव में बाढ़ से 1 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। सारण: 8 प्रखंडों की 39 पंचायतों व नगर पंचायत क्षेत्रों के 121 गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। 2 लाख 37 हजार 152 से अधिक की आबादी बाढ़ प्रभावित है। बक्सर: बक्सर, चौसा, ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी अंचल के 25 गांव के करीब 10 हजार लोग बाढ़ प्रभावित हैं। 12 नावें चलाई जा रही हैं। जगह- दीघा घाट, पटना
वक्त- रात के 10 बजे गंगा नदी किनारे सड़क पर खड़े ठेला पर बैठा करीब एक साल का यह बच्चा भूख के मारे लगातार रो रहा है। पेट खाली है, मच्छर नोच रहे हैं। शरीर पर पूरे कपड़े नहीं। बच्चा समझ नहीं पा रहा कि मम्मी दूध क्यों नहीं दे रही है। यह हालत किसी एक बच्चे की नहीं। पटना के दीघा घाट और गंगा पथ (मरीन ड्राइव) के नीचे बसे बिंद टोली में बाढ़ का पानी भर गया है। इसके चलते करीब 800 परिवार सड़क पर आ गए हैं। इन परिवारों के सैकड़ों बच्चों को ठीक से खाना नहीं मिल रहा। गंगा पथ के एप्रोच रोड और सड़क किनारे शरण लिए बिंदटोली के करीब 4 हजार लोग किस हालत में हैं? इन्हें किस तरह की परेशानी हो रही है। यह जानने के लिए भास्कर की टीम रात 10 बजे पहुंची। बिहार के 14 जिलों के 82 प्रखंडों की 491 पंचायतें डूबीं हैं। 36 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। 5 हजार स्कूल पानी में डूबने के चलते बंद हैं। 500 से ज्यादा श्मशान डूब गए हैं, जिसके चलते अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट, साथ में जानिए बाढ़ प्रभावित जिलों का हाल। हर साल गंगा में डूब जाती है बिंद टोली पटना के दीघा घाट और मरीन ड्राइव के नीचे स्थित बिंदटोली के करीब 4 हजार लोग हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ते ही पूरी बस्ती जलमग्न हो जाती है। लोग अपने मवेशियों के साथ सड़क किनारे या गंगा पथ के एप्रोच रोड पर शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। हमने सड़क किनारे टेंट या खुले में रह रहे लोगों से उनका हाल जाना। सीमा देवी ने कहा, ‘दोनों टाइम चावल मिलता है वह भी कच्चा। सब्जी भी सिर्फ पानी में आलू उबाल कर देते हैं। सुबह में 11 या 12 बजे खाना मिलता है। कभी-कभी तो 1 भी बज जाता है। घर में छोटे बच्चे हैं। कम से कम उनको दूध मिलना चाहिए। सबसे बड़ी परेशानी पीने के पानी की है। जिनके पास पैसे हैं वे तो पानी खरीदकर ले आते हैं, हमलोग कहां से लाएं। बच्चे के कान में दर्द है। कोई देखने वाला नहीं है।’ सांप-बिच्छुओं के डर में गुजर रही रात सब्जी बेचने वाली शांति देवी ने कहा, ‘मेरे घर में पानी घुस गया है। हम लोगों के पास कोई साधन नहीं है। न रहने का इंतजाम है न बच्चों को खिलाने का। सुबह में बच्चे चूड़ा और गुड़ खाकर रह रहे हैं। दोपहर का खाना 1 बजे तक मिलता है। पानी में घुसकर आना-जाना और सारा काम करना पड़ता है। इसके कारण पैर में इंफेक्शन हो गया है।’ ‘खाने में दाल, भात और सिर्फ आलू की सब्जी दी जा रही है। सभी बच्चे वही खाकर रह रहे हैं। बच्चों के लिए दूध नहीं मिल रहा है। अंधेरे के कारण बच्चे सो नहीं पाते, रात भर रोते हैं।’ लालमणी देवी ने अपना दुखड़ा सुनाया, ‘हमलोग अपने बच्चों को पढ़ना चाहते हैं। उन्हें बड़ा आदमी बनना चाहते हैं, लेकिन स्कूल में फीस देने के भी पैसे नहीं हैं। चाहती हूं कि बेटी की नौकरी लग जाए। इसके बाद उसकी शादी करें। बाढ़ के चलते बेटी स्कूल नहीं जा पा रही है। पानी भरा होने के कारण स्कूल नहीं खुला है। मोबाइल चार्ज करने के लिए बाजार भेजना पड़ता है।’ खाना मिले या न मिले, पीने का पानी चाहिए सुकुल ने कहा, ‘सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। हमलोग बहुत दूर से पानी लेकर आते हैं। खाना मिले या नहीं, साफ पानी सबको मिलना चाहिए। यहां शौचालय की भी समस्या है। महिलाएं बाहर जाती हैं।’ अशोक महतो ने कहा, ‘हर साल बिंद टोली डूबती है। 2 से 4 दिन तक खाने के लिए लंगर लगा दिया जाता है। इसके बाद कोई देखने वाला नहीं। सरकार ने हम लोगों के फसल लगे खेत काटकर पुल बनवा दिया, लेकिन बिंद टोली में मिट्टी भरने को लेकर कार्रवाई नहीं की जा रही है।’ बिरजू ने बताया, ‘हर साल बिंद टोली डूब जाती है, लेकिन इसका हल नहीं निकलता। सरकार दो समय खाना दे रही है। बच्चों को बाहर से लाकर कुछ-कुछ खिलाना पड़ता है।’ बिहार में बाढ़ से 36 लाख लोग प्रभावित, 5 हजार स्कूल डूबे बिहार में गंगा, कोसी और गंडक जैसी नदियों के उफान से 14 जिलों में 36 लाख लोग बाढ़ से घिरे हुए हैं। बुधवार दोपहर को पटना के दीघा घाट पर गंगा नदी का जलस्तर 51.29 मीटर दर्ज किया गया। एक दिन पहले यह 50.52 मीटर था। गंगा का पानी खतरे के निशान से 0.84 मीटर ऊपर है। बाढ़ के चलते पटना, मुंगेर और भागलपुर समेत 14 जिलों के 5 हजार स्कूल पानी में डूब गए हैं। एक महीने से करीब 3 लाख से अधिक छात्रों की पढ़ाई ठप है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने क्लास 1 से 12वीं तक की परीक्षाओं का शेड्यूल घोषित कर दिया है। 500 से ज्यादा श्मशान डूबे बाढ़ के चलते 500 से अधिक श्मशान डूब गए हैं। गंगा, गंडक जैसी नदियों के किनारे के श्मशान घाट डूबे हैं, जिसके चलते अंतिम संस्कार करने में परेशानी हो रही है। अब जानिए बाढ़ प्रभावित 14 जिलों का हाल
1- पटना में घट रहा गंगा का पानी, सभी 50 घाट जलमग्न पटना में गंगा के जलस्तर में उतार चढ़ाव हो रहा है। बुधवार दोपहर दो बजे गंगा का जलस्तर 51.29 मीटर रिकॉर्ड किया गया। एक दिन पहले यह 50.52 मीटर था। मंगलवार को दीघा घाट पर जलस्तर लाल निशान से 1.01 मीटर था। पटना में गंगा के सभी 50 घाट जलमग्न हैं। पुनपुन नदी में पानी घटने की रफ्तार धीमी है। श्रीपालपुर गेज प्वाइंट पर 0.36 मीटर कम हुआ है। यहां जलस्तर खतरे के निशान से 2.58 मीटर ऊपर है। बाढ़ प्रभावित मनेर, दानापुर, पाटलिपुत्र, पुनपुन, बख्तियारपुर, मोकामा आदि अंचलों में 201 नावें चलाई जा रही हैं। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की 10 टीमें लगी हैं। 2- भागलपुर: यूनिवर्सिटी में चल रही छात्र गंगा और कोसी नदी के उफान से जिले में बाढ़ विकराल होती जा रही है। 82 पंचायतों में 269 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। प्रभावित लोगों की संख्या 3.87 लाख हो गई है। गंगा नदी का जलस्तर 32.81 मीटर दर्ज किया गया। तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में गंगा का पानी घुस गया है। प्रशासनिक भवन, सीनेट हॉल, महिला छात्रावास, कैंटीन, प्रोफेसर्स कॉलोनी समेत कैंपस के अधिकांश हिस्से जलमग्न हो गए हैं। छात्रों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
नाथनगर के बेलखुरिया, मनिहारी और मनियारपुर के स्कूलों में बाढ़ और बारिश का पानी घुस गया है। कई जगहों पर घुटने भर से लेकर कई फीट तक पानी है। बेलखुरिया पंचायत के मध्य विद्यालय बेलखुरिया की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां बच्चे कंधे पर स्कूल बैग लेकर पानी के बीच से गुजरते दिखे। 3- कटिहार में नदियों का जलस्तर बढ़ा, खतरे में रेलवे ट्रैक गंगा, कोसी, बरंडी और कारी कोसी नदियों में उफान है। कुरसेला, बरारी, मनिहारी और अमदाबाद अंचलों के 238 गांवों में रहने वाले 4.33 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। कुरसेला में कोसी नदी का जलस्तर 31.55 मीटर दर्ज किया गया। एक दिन पहले यह 31.40 मीटर था। पानी खतरे के निशान से 1.55 मीटर ऊपर है। मनिहारी आउटर सिग्नल के पास गंगा का पानी रेलवे ट्रैक से महज एक मीटर दूर रह गया है। रिसाव तेज होने से रेल लाइन धंसने का खतरा मंडराने लगा है। 4- बेगूसराय में डूबे श्मशान घाट, जहां-तहां हो रहा अंतिम संस्कार बेगूसराय में गंगा नदी के बाढ़ के चलते अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो गया है। गंगा किनारे के श्मशान घाट पानी में डूब गए हैं। इसके चलते जहां-तहां अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बेगूसराय में गंगा किनारे चार प्रमुख श्मशान घाट (सिमरिया घाट, अयोध्या घाट, झमटिया घाट और मुंगेर घाट) हैं। अयोध्या घाट पूरी तरह से डूब जाने के कारण वहां अंतिम संस्कार बंद कर दिया गया है। झमटिया और सिमरिया घाट पर बांध के किनारे अंतिम संस्कार हो रहा है। 5- खगड़िआ में खतरे के निशान से ऊपर कोसी, 13 तक स्कूल बंद कोसी नदी खगड़िया में खतरे के निशान से 1.41 मीटर ऊपर बह रही है। बुधवार दोपहर को जलस्तर 35.26 मीटर रिकॉर्ड किया गया। एक दिन पहले यह 35.15 मीटर था। बाढ़ का पानी स्कूलों तक पहुंच गया है। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 59 बाढ़ प्रभावित विद्यालयों को 13 सितंबर तक बंद कर दिया है। वैशाली से समस्तीपुर तक ये 9 जिलों भी बाढ़ की चपेट में वैशाली: गंगा और गंडक में आए उफान के चलते हाजीपुर से राघोपुर तक सड़कें पानी में डूबी हैं। 6 प्रखंड के 85 गांव के करीब 95 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं। गोपालगंज: वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने के चलते गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। डुमरियाघाट के समीप नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई। समस्तीपुर: मोहनपुर, मोहिउद्ददीनगर व विद्यापतिनगर प्रखंडों के 2.33 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। 81 सामुदायिक रसोई एवं 18 मेडिकल कैंप चलाए जा रहे हैं। भोजपुर: गंगा, सोन, बनास, गांगी, धर्मावती व छेर नदियां उफान पर हैं। आरा सदर प्रखंड के 50 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। आरा-बक्सर एनएच-84, आरा-जमीरा-चांदीपथ, आरा-पैगा पथ और आरा-सरैंया-सिन्हा पथ सहित कई रास्तों पर आवागमन बाधित है। जिले में 40,047.55 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में है। सीवान: सरयू नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने गुठनी, दरौली और सिसवन प्रखंडों में बाढ़ का खतरा है। गुनी प्रखंड में बाढ़ का पानी भर गया है। शेखपुरा: हरोहर नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से घाटकुसुम्भा प्रखंड की पांच पंचायतों के करीब 17 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। बाढ़ का पानी 100 से अधिक घरों में प्रवेश कर गया है। मुंगेर: छह प्रखंडों की 37 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। गंगा का पानी बरियारपुर के प्रखंड व अंचल कार्यालय व थाना परिसर में भी पहुंच गया। बरियारपुर-खड़गपुर मार्ग पर सड़क के दोनों ओर बाढ़ का पानी जमा है। ढोल पहाड़ी गांव में बाढ़ से 1 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। सारण: 8 प्रखंडों की 39 पंचायतों व नगर पंचायत क्षेत्रों के 121 गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। 2 लाख 37 हजार 152 से अधिक की आबादी बाढ़ प्रभावित है। बक्सर: बक्सर, चौसा, ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी अंचल के 25 गांव के करीब 10 हजार लोग बाढ़ प्रभावित हैं। 12 नावें चलाई जा रही हैं।

