पुल निर्माण के 13 साल हुए, एप्रोच पथ नहीं बना:इंजीनियरों ने वर्क रिपोर्ट में एस्टीमेट नहीं बनाया, पुल पर चढ़ने के लिए ग्रामीणों ने लगाई सीढ़ी

पुल निर्माण के 13 साल हुए, एप्रोच पथ नहीं बना:इंजीनियरों ने वर्क रिपोर्ट में एस्टीमेट नहीं बनाया, पुल पर चढ़ने के लिए ग्रामीणों ने लगाई सीढ़ी

समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर एक ऐसा पुल है जिसपर चढ़ने के लिए लोगों ने लोहे की सीढ़ी लगाई है। इंजीनियरों ने वर्क रिपोर्ट में पहुंच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण का एस्टीमेट ही नहीं बनाया है। जिसका नतीजा है कि पुल निर्माण के 13 साल बाद भी पहुंच पथ नहीं है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से पुल पर चढ़ने के लिए एक लोहे की सीढ़ी लगवाई है। जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक ग्रामीण समस्या लेकर गए, पर समाधान नहीं निकला। एप्रोच पथ नहीं होने के कारण खानपुर और रोसड़ा प्रखंड के दर्जनों गांवों के लोगों को आज भी करीब 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। मामला खानपुर प्रखंड का शिवैसिंगपुर गांव का है। शिलान्यास के एक साल में बन गया था पुल खानपुर प्रखंड के गुजरने वाली बागमती नदी की पुरानी धारा पर डगरुआ बलहा गांव को रोसड़ा मुख्यालय से जोड़ने के लिए कलवाड़ा घाट पर आरसीसी उच्च स्तरीय पुल का शिलान्यास किया गया था। शिलान्यास नाबार्ड योजना के तहत 2013 में 8 करोड़ 65 लाख रुपए की लागत से वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक अशोक कुमार मुन्ना ने किया था। पुल का निर्माण एक साल के अंदर हो गया था। 5 पाए के पुल की कुल लंबाई 123.75 मीटर की है। पुल का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बावजूद दोनों ओर एप्रोच पथ नहीं बना।
नदी का पानी बढ़ने पर नाव सहारा स्थानीय बलहा गांव निवासी मो. उसमान बताते हैं कि पुल बनने के बाद भी लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे थे। जिस कारण गांव के लोगों ने 200-400 रुपए आपसी सहयोग कर लोहे की सीढी बनवाई है। अभी तो नदी सूखी है, जिस कारण लोग पुल के नीचे से आ-जा रहे हैं। नदी में पानी बढ़ने पर सीढी के सहारे पुल पर चढ़ते हैं। पानी जब काफी बढ़ जाता है तो लोग आज भी नाव का उपयोग करते हैं। अगर पहुंचपथ बन जाता तो बाढ़ के समय भी आराम से आवाजाही कर सकते थे। 5 गांव के लोगों को सहूलियत होगी पुल के पूर्वी छोड़ में संपर्क पथ बन जाने से खानपुर और शिवाजीनगर प्रखंड के करीब 5 गांव के लोगों को सहूलियत होती। पुल खानपुर प्रखंड के अलावे शिवाजीनगर प्रखंड को जोड़ते हुए रोसड़ा और बहेड़ी को जोड़ती है। संपर्क पथ बनने से हांसोपुर, रेबड़ा, खानपुर से बहेड़ी, बंधार, परशुराम, बाघोपुर, रोसड़ा जाने-आने में और बंधार, परशुराम, बल्लीपुर के अलावे प्रखंड के कई गांव के लोगों को खानपुर, समस्तीपुर जाने में काफी सहुलियत होती। लेकिन पुल के संपर्क पथ निर्माण नहीं होने से फिलहाल लोगों को सादीपुर या फिर गुदारघाट पुल का सहारा लेना पड़ता है। जो काफी दूरी है।
जमीन अधिग्रहण के लिए फंड ही नहीं पहुंच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण फंसा हुआ है। नदी के बाद पहुंच पथ बनाने के लिए जमीन की जरूत है। पुल के बाद निजी जमीन है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिस समय पुल का नक्शा और एस्टीमेट बना उसी समय इंजीनियरों ने नक्शा में पहुंच पथ के लिए जमीन की चर्चा नहीं की। नक्शा पास भी हो गया। राशि आ गई जिससे पुल भी बन गया, लेकिन पहुंच पथ बनाने की बारी आई तो जमीन के कारण कार्य रुक गया। चुकी जमीन अधिग्रहण के लिए पुल निर्माण फंड में कोई राशि नहीं थी। ग्रामीण मो. नौशाद बताते हैं कि कुछ दिन तो लगा कि काम आगे बढे़गा, लेकिन धीरे-धीरे जानकारी मिली कि जमीन अधिग्रहण नहीं होने के कारण निर्माण रोक दिया गया है। एक-दो ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहण करनी है। सरकार जल्द इस पर ध्यान दें ताकि लोगों की परेशानी कम हो। मरीजों को लादकर ले जाना पड़ता, कई की मौत हुई ग्रामीणों के अनुसार बरसात के समय में जब पानी का लेवल बढ़ जाता है तो नाव से लोग आते-जाते हैं। खास कर मरीजों को खटिया पर लाद कर नाव पर चढ़ाना होता है। देरी की वजह के कारण कई ग्रामीणों की मौत तक हो चुकी है।
जल्द एप्रोच पथ का निर्माण होगा
सथानीय विधायक साइंटिस्ट मांजरिक मृणाल ने बताया कि जिस समय पुल का निर्माण हुआ, इंजीनियरों को नक्शा बनाने में कमी की। पहुंच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण को एस्टीमेट में शामिल नहीं किया गया था। विधायक बनने के बाद जब मामले की जानकारी हुई तो इस मुद्दे पर मुख्य सचिव के साथ ही मुख्यमंत्री से मुलाकर कर पहुंच पथ निर्माण का आग्रह किया है। इसी सप्ताह आरसीडी विभाग के मुख्य अभियंता ने स्थल का निरीक्षण किया है। नए सिरे से एस्टीमेट बनाकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर पहुंच पथ का जल्द निर्माण शुरू होगा। समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर एक ऐसा पुल है जिसपर चढ़ने के लिए लोगों ने लोहे की सीढ़ी लगाई है। इंजीनियरों ने वर्क रिपोर्ट में पहुंच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण का एस्टीमेट ही नहीं बनाया है। जिसका नतीजा है कि पुल निर्माण के 13 साल बाद भी पहुंच पथ नहीं है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से पुल पर चढ़ने के लिए एक लोहे की सीढ़ी लगवाई है। जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक ग्रामीण समस्या लेकर गए, पर समाधान नहीं निकला। एप्रोच पथ नहीं होने के कारण खानपुर और रोसड़ा प्रखंड के दर्जनों गांवों के लोगों को आज भी करीब 5 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। मामला खानपुर प्रखंड का शिवैसिंगपुर गांव का है। शिलान्यास के एक साल में बन गया था पुल खानपुर प्रखंड के गुजरने वाली बागमती नदी की पुरानी धारा पर डगरुआ बलहा गांव को रोसड़ा मुख्यालय से जोड़ने के लिए कलवाड़ा घाट पर आरसीसी उच्च स्तरीय पुल का शिलान्यास किया गया था। शिलान्यास नाबार्ड योजना के तहत 2013 में 8 करोड़ 65 लाख रुपए की लागत से वारिसनगर विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक अशोक कुमार मुन्ना ने किया था। पुल का निर्माण एक साल के अंदर हो गया था। 5 पाए के पुल की कुल लंबाई 123.75 मीटर की है। पुल का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बावजूद दोनों ओर एप्रोच पथ नहीं बना।
नदी का पानी बढ़ने पर नाव सहारा स्थानीय बलहा गांव निवासी मो. उसमान बताते हैं कि पुल बनने के बाद भी लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे थे। जिस कारण गांव के लोगों ने 200-400 रुपए आपसी सहयोग कर लोहे की सीढी बनवाई है। अभी तो नदी सूखी है, जिस कारण लोग पुल के नीचे से आ-जा रहे हैं। नदी में पानी बढ़ने पर सीढी के सहारे पुल पर चढ़ते हैं। पानी जब काफी बढ़ जाता है तो लोग आज भी नाव का उपयोग करते हैं। अगर पहुंचपथ बन जाता तो बाढ़ के समय भी आराम से आवाजाही कर सकते थे। 5 गांव के लोगों को सहूलियत होगी पुल के पूर्वी छोड़ में संपर्क पथ बन जाने से खानपुर और शिवाजीनगर प्रखंड के करीब 5 गांव के लोगों को सहूलियत होती। पुल खानपुर प्रखंड के अलावे शिवाजीनगर प्रखंड को जोड़ते हुए रोसड़ा और बहेड़ी को जोड़ती है। संपर्क पथ बनने से हांसोपुर, रेबड़ा, खानपुर से बहेड़ी, बंधार, परशुराम, बाघोपुर, रोसड़ा जाने-आने में और बंधार, परशुराम, बल्लीपुर के अलावे प्रखंड के कई गांव के लोगों को खानपुर, समस्तीपुर जाने में काफी सहुलियत होती। लेकिन पुल के संपर्क पथ निर्माण नहीं होने से फिलहाल लोगों को सादीपुर या फिर गुदारघाट पुल का सहारा लेना पड़ता है। जो काफी दूरी है।
जमीन अधिग्रहण के लिए फंड ही नहीं पहुंच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण फंसा हुआ है। नदी के बाद पहुंच पथ बनाने के लिए जमीन की जरूत है। पुल के बाद निजी जमीन है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिस समय पुल का नक्शा और एस्टीमेट बना उसी समय इंजीनियरों ने नक्शा में पहुंच पथ के लिए जमीन की चर्चा नहीं की। नक्शा पास भी हो गया। राशि आ गई जिससे पुल भी बन गया, लेकिन पहुंच पथ बनाने की बारी आई तो जमीन के कारण कार्य रुक गया। चुकी जमीन अधिग्रहण के लिए पुल निर्माण फंड में कोई राशि नहीं थी। ग्रामीण मो. नौशाद बताते हैं कि कुछ दिन तो लगा कि काम आगे बढे़गा, लेकिन धीरे-धीरे जानकारी मिली कि जमीन अधिग्रहण नहीं होने के कारण निर्माण रोक दिया गया है। एक-दो ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहण करनी है। सरकार जल्द इस पर ध्यान दें ताकि लोगों की परेशानी कम हो। मरीजों को लादकर ले जाना पड़ता, कई की मौत हुई ग्रामीणों के अनुसार बरसात के समय में जब पानी का लेवल बढ़ जाता है तो नाव से लोग आते-जाते हैं। खास कर मरीजों को खटिया पर लाद कर नाव पर चढ़ाना होता है। देरी की वजह के कारण कई ग्रामीणों की मौत तक हो चुकी है।
जल्द एप्रोच पथ का निर्माण होगा
सथानीय विधायक साइंटिस्ट मांजरिक मृणाल ने बताया कि जिस समय पुल का निर्माण हुआ, इंजीनियरों को नक्शा बनाने में कमी की। पहुंच पथ के लिए जमीन अधिग्रहण को एस्टीमेट में शामिल नहीं किया गया था। विधायक बनने के बाद जब मामले की जानकारी हुई तो इस मुद्दे पर मुख्य सचिव के साथ ही मुख्यमंत्री से मुलाकर कर पहुंच पथ निर्माण का आग्रह किया है। इसी सप्ताह आरसीडी विभाग के मुख्य अभियंता ने स्थल का निरीक्षण किया है। नए सिरे से एस्टीमेट बनाकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर पहुंच पथ का जल्द निर्माण शुरू होगा।  

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