11 साल पुराने किडनैपिंग मामले में 2 दोषियों को सजा:शेखपुरा में ठेकेदारी को लेकर हुआ था विवाद, कोर्ट ने 3-3 साल की जेल सुनाई

11 साल पुराने किडनैपिंग मामले में 2 दोषियों को सजा:शेखपुरा में ठेकेदारी को लेकर हुआ था विवाद, कोर्ट ने 3-3 साल की जेल सुनाई

शेखपुरा सिविल कोर्ट के प्रधान जिला जज संतोष कुमार तिवारी ने 11 साल पुराने अपहरण के मामले में फैसला सुनाया है। इसमें नालंदा जिले के दो दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। जज ने मंगलवार को दोनों को दोषी ठहराकर जेल भेज दिया था। गुरुवार को सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए दोषियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया। इस मामले की जानकारी जिला लोक अभियोजक उदय नारायण सिंहा और अपर लोक अभियोजक शंभू शरण प्रसाद सिंह ने दी। ठेकेदारी को लेकर हुआ था विवाद उन्होंने बताया कि यह घटना 2 अक्टूबर 2015 को निर्माण कार्य के ठेकेदारी विवाद के चलते हुई थी। हरनौत थाना क्षेत्र के विभिन्न गांव के कन्हैया महतो और सुधीर राम ने शेखपुरा जिले के केवटी थाना अंतर्गत काबिलगंज गांव निवासी हीरा चौधरी का अपहरण कर लिया था। अपहरण से पहले हीरा चौधरी को बदमाशों से जान से मारने की धमकियां भी मिल रही थी। जब हीरा चौधरी देर शाम तक घर नहीं लौटे, तो उनकी पत्नी दुर्गा देवी ने थाने में FIR दर्ज कराई। पत्नी ने 4 लोगों पर लगाया था किडनैपिंग का आरोप मुकदमे में 4 लोग को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। जिनके ऊपर बोलेरो वाहन से अगवा करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने FIR पर कार्रवाई करते हुए सबसे पहले हीरा चौधरी को छुड़ाया। पुलिस ने इस मामले में अनुसंधान बाद 2 लोगों के खिलाफ आरोप सत्य पाया। जबकि दो अन्य के विरुद्ध लगाया गया आरोप निराधार पाया। पुलिस ने कोर्ट में दो लोगों के विरुद्ध ही कोर्ट में आरोप पत्र दायर की थी। अभियोजन पक्ष ने सभी सबूत पेश किए और दोषियों को सजा देने की मांग की। वहीं, दोषियों के वकील ने कम से कम सजा देने की अपील की। शेखपुरा सिविल कोर्ट के प्रधान जिला जज संतोष कुमार तिवारी ने 11 साल पुराने अपहरण के मामले में फैसला सुनाया है। इसमें नालंदा जिले के दो दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। जज ने मंगलवार को दोनों को दोषी ठहराकर जेल भेज दिया था। गुरुवार को सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए दोषियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया। इस मामले की जानकारी जिला लोक अभियोजक उदय नारायण सिंहा और अपर लोक अभियोजक शंभू शरण प्रसाद सिंह ने दी। ठेकेदारी को लेकर हुआ था विवाद उन्होंने बताया कि यह घटना 2 अक्टूबर 2015 को निर्माण कार्य के ठेकेदारी विवाद के चलते हुई थी। हरनौत थाना क्षेत्र के विभिन्न गांव के कन्हैया महतो और सुधीर राम ने शेखपुरा जिले के केवटी थाना अंतर्गत काबिलगंज गांव निवासी हीरा चौधरी का अपहरण कर लिया था। अपहरण से पहले हीरा चौधरी को बदमाशों से जान से मारने की धमकियां भी मिल रही थी। जब हीरा चौधरी देर शाम तक घर नहीं लौटे, तो उनकी पत्नी दुर्गा देवी ने थाने में FIR दर्ज कराई। पत्नी ने 4 लोगों पर लगाया था किडनैपिंग का आरोप मुकदमे में 4 लोग को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। जिनके ऊपर बोलेरो वाहन से अगवा करने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने FIR पर कार्रवाई करते हुए सबसे पहले हीरा चौधरी को छुड़ाया। पुलिस ने इस मामले में अनुसंधान बाद 2 लोगों के खिलाफ आरोप सत्य पाया। जबकि दो अन्य के विरुद्ध लगाया गया आरोप निराधार पाया। पुलिस ने कोर्ट में दो लोगों के विरुद्ध ही कोर्ट में आरोप पत्र दायर की थी। अभियोजन पक्ष ने सभी सबूत पेश किए और दोषियों को सजा देने की मांग की। वहीं, दोषियों के वकील ने कम से कम सजा देने की अपील की।  

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