‘पूर्णिया में भवन निर्माण विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी की ओर से हर टेंडर पर कथित तौर पर 20 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। कमीशन नहीं देने पर फाइलों को लंबे समय तक पेंडिंग रखा जाता। इतना ही नहीं, टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कमीशन की राशि और प्रतिशत तय कर लिए जाते थे, कुछ रकम एडवांस भी ले ली जाती थी। कमीशन का कोई फिक्स रेट भी नहीं था। किसी से 20 तो किसी से 30 प्रतिशत तक कमीशन ली जाती थी और तय रेट में किसी तरह की कटौती मंजूर नहीं की जाती थी।’ ये बातें नाम न छापने की शर्त पर पूर्णिया के एक ठेकेदार ने बताई। ठेकेदार की मानें तो उनसे भी कमीशन लिया गया था। दरअसल, बुधवार (16 सितंबर) को सत्येंद्र कुमार चौधरी के पटना और पूर्णिया के 4 ठिकानों पर विजिलेंस की टीम ने छापेमारी की थी। कार्रवाई में 5 मंजिला लिफ्ट वाला आलीशान बंगला, 7 प्लॉट, फ्लैट, नकद और सोने-हीरे के गहने मिले। निगरानी ने अचल संपत्ति की कीमत 3.60 करोड़ रुपए और चल संपत्ति का मूल्य 26 लाख रुपए आंकी है। सत्येंद्र कुमार चौधरी कहां के रहने वाले हैं? उनकी पोस्टिंग और जॉब में आने की कहानी क्या है? भवन निर्माण विभाग में टेंडर में कमीशन का क्या मामला है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। बुधवार को विजिलेंस की छापेमारी की 3 तस्वीरें देखिए सबसे पहले सत्येंद्र कुमार चौधरी के बारे में जानिए सत्येंद्र कुमार पटना, धनरुआ के भदौरा के रहने वाले हैं। जुलाई 2026 में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से प्रमोट होकर सुपरिटेंडेंट इंजीनियर बने थे। इसके बाद उनका तबादला पटना से पूर्णिया किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, सत्येंद्र कुमार चौधरी ने अपनी पत्नी उषा देवी, सास के नाम कई जगह संपत्ति बनाई है। उनके परिवार के नाम पर कुल 7 अचल संपत्तियां हैं, जिनमें पटना और पूर्णिया में मकान और जमीन शामिल हैं। इसके अलावा, फुलवारीशरीफ में पांच मंजिला आलीशान मकान, नौबतपुर में कुल 74 डिसमिल के चार प्लॉट और दानापुर में 7.18 डिसमिल का एक प्लॉट की भी जानकारी सामने आई है। ग्रेटर नोएडा में फ्लैट बिहार के अलावा, यूपी के ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सत्येंद्र चौधरी ने करीब 4 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी साल 2011 से 2025 के बीच ही खड़ी की है। जुलाई में पूर्णिया में उनकी पोस्टिंग हुई, इसके कुछ महीने के बाद ही विजिलेंस ने सत्येंद्र चौधरी के खिलाफ करीब 1 करोड़ 97 लाख 58 हजार 70 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया था, जो उनकी वास्तविक आय से 68 प्रतिशत अधिक है। अब टेंडर में कमीशन की कहानी जानिए नाम न छापने की शर्त पर विभाग से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, पैसों का लेन-देन सीधे तौर पर नहीं होता था, बल्कि डील कार्यालय से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित एक चाय की दुकान पर की जाती था। ये भी बताया जा रहा है कि सत्येंद्र कुमार चौधरी के राजनीतिक संपर्क काफी मजबूत थे और वे अपनी मनचाही पोस्टिंग कराने में सक्षम माने जाते थे। सूत्रों के मुताबिक, भवन निर्माण विभाग के टेंडर में कमीशन मांगे जाने की जानकारी किसी को न हो, इसका भी सत्येंद्र चौधरी की ओर से ख्याल रखा जाता था। हर बार ठिकाना बदला जाता था सत्येंद्र चौधरी की ओर से कभी भी एक निश्चित ठिकाने पर किसी से बातचीत नहीं होती थी। विभाग की बिल्डिंग से बाहर चाय की दुकान पर कमीशन का रेट तो फिक्स होता था, लेकिन हर बार ठिकाना बदल जाता था। आशंका जताई जा रही थी कि शायद सत्येंद्र चौधरी को इसकी भनक थी कि करीब 14 साल में खड़ी की गई करोड़ों की संपत्ति के बारे में कोई उनकी शिकायत कर सकता है। हालांकि, जुलाई में पूर्णिया आने और कुछ महीने के बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किए जाने के बाद भी उन्होंने कुछ टेंडर में कमीशन ली। अब पटना रेड सत्येंद्र चौधरी के ठिकाने पर छापेमारी की तस्वीरें पूर्णिया में बुधवार सुबह निगरानी की टीम ने एक साथ सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के घर-ऑफिस पर छापेमारी की थी। सुबह 7 बजे दो डीएसपी संतोष कुमार और बिनोद कुमार के नेतृत्व में 9 सदस्यीय टीम ने कार्रवाई की गई थी। सत्येंद्र चौधरी के घर से मिले दस्तावेजों की विजिलेंस की टीम जांच कर रही है। जांच के बाद ही सत्येंद्र चौधरी की संपत्ति के सोर्स और इनकम के बीच के कनेक्शन के बारे में जानकारी मिल सकेगी। विजिलेंस की टीम सत्येंद्र चौधरी के बैंकिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी बारीकी से पड़ताल में जुटी है। ‘पूर्णिया में भवन निर्माण विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी की ओर से हर टेंडर पर कथित तौर पर 20 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। कमीशन नहीं देने पर फाइलों को लंबे समय तक पेंडिंग रखा जाता। इतना ही नहीं, टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कमीशन की राशि और प्रतिशत तय कर लिए जाते थे, कुछ रकम एडवांस भी ले ली जाती थी। कमीशन का कोई फिक्स रेट भी नहीं था। किसी से 20 तो किसी से 30 प्रतिशत तक कमीशन ली जाती थी और तय रेट में किसी तरह की कटौती मंजूर नहीं की जाती थी।’ ये बातें नाम न छापने की शर्त पर पूर्णिया के एक ठेकेदार ने बताई। ठेकेदार की मानें तो उनसे भी कमीशन लिया गया था। दरअसल, बुधवार (16 सितंबर) को सत्येंद्र कुमार चौधरी के पटना और पूर्णिया के 4 ठिकानों पर विजिलेंस की टीम ने छापेमारी की थी। कार्रवाई में 5 मंजिला लिफ्ट वाला आलीशान बंगला, 7 प्लॉट, फ्लैट, नकद और सोने-हीरे के गहने मिले। निगरानी ने अचल संपत्ति की कीमत 3.60 करोड़ रुपए और चल संपत्ति का मूल्य 26 लाख रुपए आंकी है। सत्येंद्र कुमार चौधरी कहां के रहने वाले हैं? उनकी पोस्टिंग और जॉब में आने की कहानी क्या है? भवन निर्माण विभाग में टेंडर में कमीशन का क्या मामला है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। बुधवार को विजिलेंस की छापेमारी की 3 तस्वीरें देखिए सबसे पहले सत्येंद्र कुमार चौधरी के बारे में जानिए सत्येंद्र कुमार पटना, धनरुआ के भदौरा के रहने वाले हैं। जुलाई 2026 में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से प्रमोट होकर सुपरिटेंडेंट इंजीनियर बने थे। इसके बाद उनका तबादला पटना से पूर्णिया किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, सत्येंद्र कुमार चौधरी ने अपनी पत्नी उषा देवी, सास के नाम कई जगह संपत्ति बनाई है। उनके परिवार के नाम पर कुल 7 अचल संपत्तियां हैं, जिनमें पटना और पूर्णिया में मकान और जमीन शामिल हैं। इसके अलावा, फुलवारीशरीफ में पांच मंजिला आलीशान मकान, नौबतपुर में कुल 74 डिसमिल के चार प्लॉट और दानापुर में 7.18 डिसमिल का एक प्लॉट की भी जानकारी सामने आई है। ग्रेटर नोएडा में फ्लैट बिहार के अलावा, यूपी के ग्रेटर नोएडा में एक फ्लैट की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सत्येंद्र चौधरी ने करीब 4 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी साल 2011 से 2025 के बीच ही खड़ी की है। जुलाई में पूर्णिया में उनकी पोस्टिंग हुई, इसके कुछ महीने के बाद ही विजिलेंस ने सत्येंद्र चौधरी के खिलाफ करीब 1 करोड़ 97 लाख 58 हजार 70 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया था, जो उनकी वास्तविक आय से 68 प्रतिशत अधिक है। अब टेंडर में कमीशन की कहानी जानिए नाम न छापने की शर्त पर विभाग से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, पैसों का लेन-देन सीधे तौर पर नहीं होता था, बल्कि डील कार्यालय से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित एक चाय की दुकान पर की जाती था। ये भी बताया जा रहा है कि सत्येंद्र कुमार चौधरी के राजनीतिक संपर्क काफी मजबूत थे और वे अपनी मनचाही पोस्टिंग कराने में सक्षम माने जाते थे। सूत्रों के मुताबिक, भवन निर्माण विभाग के टेंडर में कमीशन मांगे जाने की जानकारी किसी को न हो, इसका भी सत्येंद्र चौधरी की ओर से ख्याल रखा जाता था। हर बार ठिकाना बदला जाता था सत्येंद्र चौधरी की ओर से कभी भी एक निश्चित ठिकाने पर किसी से बातचीत नहीं होती थी। विभाग की बिल्डिंग से बाहर चाय की दुकान पर कमीशन का रेट तो फिक्स होता था, लेकिन हर बार ठिकाना बदल जाता था। आशंका जताई जा रही थी कि शायद सत्येंद्र चौधरी को इसकी भनक थी कि करीब 14 साल में खड़ी की गई करोड़ों की संपत्ति के बारे में कोई उनकी शिकायत कर सकता है। हालांकि, जुलाई में पूर्णिया आने और कुछ महीने के बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किए जाने के बाद भी उन्होंने कुछ टेंडर में कमीशन ली। अब पटना रेड सत्येंद्र चौधरी के ठिकाने पर छापेमारी की तस्वीरें पूर्णिया में बुधवार सुबह निगरानी की टीम ने एक साथ सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के घर-ऑफिस पर छापेमारी की थी। सुबह 7 बजे दो डीएसपी संतोष कुमार और बिनोद कुमार के नेतृत्व में 9 सदस्यीय टीम ने कार्रवाई की गई थी। सत्येंद्र चौधरी के घर से मिले दस्तावेजों की विजिलेंस की टीम जांच कर रही है। जांच के बाद ही सत्येंद्र चौधरी की संपत्ति के सोर्स और इनकम के बीच के कनेक्शन के बारे में जानकारी मिल सकेगी। विजिलेंस की टीम सत्येंद्र चौधरी के बैंकिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी बारीकी से पड़ताल में जुटी है।

