स्कूल के एक कमरे में चल रहीं चार क्लास:जमुई में 430 बच्चों पर सिर्फ 3 कमरे और 1 शिक्षक से पढ़ाई, साइंस-कंप्यूटर लैब नहीं

स्कूल के एक कमरे में चल रहीं चार क्लास:जमुई में 430 बच्चों पर सिर्फ 3 कमरे और 1 शिक्षक से पढ़ाई, साइंस-कंप्यूटर लैब नहीं

जमुई के चकाई प्रखंड के +2 उत्क्रमित उच्च विद्यालय ठाड़ी में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। स्कूल में 9वीं से 12वीं तक की चारों कक्षाएं एक ही कमरे में संचालित हो रही हैं। सामने सिर्फ एक ब्लैकबोर्ड है और पढ़ाने के लिए एक शिक्षक मौजूद रहते हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की बड़ी चुनौती है। विद्यालय में पहली से आठवीं तक 265 और 9वीं से 12वीं तक 165 विद्यार्थी नामांकित हैं। यानी पहली से 12वीं तक कुल 430 छात्र-छात्राएं हैं। इन विद्यार्थियों के लिए स्कूल में महज तीन कमरे उपलब्ध हैं। कमरों की कमी के कारण एक ही कमरे में कई कक्षाओं को बैठाना पड़ रहा है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… एक कमरे में चार कक्षाएं, एक ही ब्लैकबोर्ड 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। चारों कक्षाओं के सामने एक ही ब्लैकबोर्ड होने के कारण अलग-अलग विषयों की पढ़ाई में भी परेशानी होती है। बच्चों का कहना है कि शोर और आपस में चल रही अलग-अलग कक्षाओं के कारण पढ़ाई पर ध्यान लगाना मुश्किल होता है। कई बच्चों को बेंच तक नसीब नहीं जगह की कमी का असर बैठने की व्यवस्था पर भी पड़ा है। स्कूल में सभी विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं। कई बच्चे बेंच पर बैठकर पढ़ते हैं तो कई को फर्श पर दरी बिछाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। 10वीं की छात्रा पूनम कुमारी और कविता मुर्मू ने बताया कि बोर्ड परीक्षा नजदीक है। ऐसे समय में दूसरी कक्षाओं के बच्चों के साथ एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करने से तैयारी प्रभावित होती है। छात्राओं ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग कमरे और शांत वातावरण की जरूरत बताई। साइंस लैब, कंप्यूटर और लाइब्रेरी भी नहीं 12वीं के छात्र गुरुलाल टुडू और रंजीत मरांडी ने बताया कि विद्यालय में साइंस लैब, कंप्यूटर और लाइब्रेरी जैसी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इससे विद्यार्थियों को प्रायोगिक और अतिरिक्त अध्ययन में परेशानी होती है। छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं 11वीं की छात्रा रंजू कुमारी ने बताया कि विद्यालय में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं है। इससे छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत कुल सात शिक्षक हैं, लेकिन विषयवार शिक्षकों की कमी बनी हुई है। 9वीं में अंग्रेजी और गणित, जबकि 10वीं में हिंदी के शिक्षक की जरूरत है। 11वीं में चार प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं 11वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और राजनीति विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। इससे खासकर इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों की विषयवार पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 12वीं में अंग्रेजी, गणित, भूगोल और गृह विज्ञान के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। बोर्ड परीक्षा के समय इन विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं होने से विद्यार्थियों की परेशानी और बढ़ गई है। भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध प्रभारी प्रधानाध्यापक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने और तकनीकी कारणों से भवन निर्माण का टेंडर रद्द हो गया था। विधायक और शिक्षा विभाग को दी गई जानकारी प्रधानाध्यापक के अनुसार विद्यालय की समस्याओं से स्थानीय विधायक सावित्री देवी और जिला शिक्षा विभाग को लिखित रूप से अवगत कराया गया है। विभाग की ओर से आश्वासन मिला है कि आगामी टेंडर प्रक्रिया में विद्यालय भवन निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। कब बदलेगी स्कूल की तस्वीर? 430 विद्यार्थियों के लिए तीन कमरों की व्यवस्था, विषयवार शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी है। अब देखना यह है कि नए भवन और शिक्षकों की व्यवस्था का आश्वासन कब तक जमीन पर उतरता है और बोर्ड परीक्षार्थियों को कब बेहतर पढ़ाई का माहौल मिल पाता है। जमुई के चकाई प्रखंड के +2 उत्क्रमित उच्च विद्यालय ठाड़ी में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। स्कूल में 9वीं से 12वीं तक की चारों कक्षाएं एक ही कमरे में संचालित हो रही हैं। सामने सिर्फ एक ब्लैकबोर्ड है और पढ़ाने के लिए एक शिक्षक मौजूद रहते हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की बड़ी चुनौती है। विद्यालय में पहली से आठवीं तक 265 और 9वीं से 12वीं तक 165 विद्यार्थी नामांकित हैं। यानी पहली से 12वीं तक कुल 430 छात्र-छात्राएं हैं। इन विद्यार्थियों के लिए स्कूल में महज तीन कमरे उपलब्ध हैं। कमरों की कमी के कारण एक ही कमरे में कई कक्षाओं को बैठाना पड़ रहा है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… एक कमरे में चार कक्षाएं, एक ही ब्लैकबोर्ड 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जाता है। चारों कक्षाओं के सामने एक ही ब्लैकबोर्ड होने के कारण अलग-अलग विषयों की पढ़ाई में भी परेशानी होती है। बच्चों का कहना है कि शोर और आपस में चल रही अलग-अलग कक्षाओं के कारण पढ़ाई पर ध्यान लगाना मुश्किल होता है। कई बच्चों को बेंच तक नसीब नहीं जगह की कमी का असर बैठने की व्यवस्था पर भी पड़ा है। स्कूल में सभी विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं। कई बच्चे बेंच पर बैठकर पढ़ते हैं तो कई को फर्श पर दरी बिछाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। 10वीं की छात्रा पूनम कुमारी और कविता मुर्मू ने बताया कि बोर्ड परीक्षा नजदीक है। ऐसे समय में दूसरी कक्षाओं के बच्चों के साथ एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करने से तैयारी प्रभावित होती है। छात्राओं ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग कमरे और शांत वातावरण की जरूरत बताई। साइंस लैब, कंप्यूटर और लाइब्रेरी भी नहीं 12वीं के छात्र गुरुलाल टुडू और रंजीत मरांडी ने बताया कि विद्यालय में साइंस लैब, कंप्यूटर और लाइब्रेरी जैसी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इससे विद्यार्थियों को प्रायोगिक और अतिरिक्त अध्ययन में परेशानी होती है। छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं 11वीं की छात्रा रंजू कुमारी ने बताया कि विद्यालय में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा नहीं है। इससे छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत कुल सात शिक्षक हैं, लेकिन विषयवार शिक्षकों की कमी बनी हुई है। 9वीं में अंग्रेजी और गणित, जबकि 10वीं में हिंदी के शिक्षक की जरूरत है। 11वीं में चार प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं 11वीं कक्षा में भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और राजनीति विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। इससे खासकर इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों की विषयवार पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 12वीं में अंग्रेजी, गणित, भूगोल और गृह विज्ञान के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। बोर्ड परीक्षा के समय इन विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं होने से विद्यार्थियों की परेशानी और बढ़ गई है। भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध प्रभारी प्रधानाध्यापक डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने और तकनीकी कारणों से भवन निर्माण का टेंडर रद्द हो गया था। विधायक और शिक्षा विभाग को दी गई जानकारी प्रधानाध्यापक के अनुसार विद्यालय की समस्याओं से स्थानीय विधायक सावित्री देवी और जिला शिक्षा विभाग को लिखित रूप से अवगत कराया गया है। विभाग की ओर से आश्वासन मिला है कि आगामी टेंडर प्रक्रिया में विद्यालय भवन निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। कब बदलेगी स्कूल की तस्वीर? 430 विद्यार्थियों के लिए तीन कमरों की व्यवस्था, विषयवार शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच बच्चों की पढ़ाई जारी है। अब देखना यह है कि नए भवन और शिक्षकों की व्यवस्था का आश्वासन कब तक जमीन पर उतरता है और बोर्ड परीक्षार्थियों को कब बेहतर पढ़ाई का माहौल मिल पाता है।  

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