सूरज ढलते ही इस जंगल में जाना है मना! क्या 400 साल पुराने वन देवी मंदिर की कहानी से ही प्रेरित है ‘Vvaan’?

सूरज ढलते ही इस जंगल में जाना है मना! क्या 400 साल पुराने वन देवी मंदिर की कहानी से ही प्रेरित है ‘Vvaan’?

Vvaan Van Devi Temple: बिहार में कई प्राचीन मंदिर हैं जो स्थानीय लोककथाओं से जुड़े हैं, लेकिन हाल ही में एक मंदिर ने तब सबका ध्यान खींचा जब इसे सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​और तमन्ना भाटिया की आने वाली फिल्म ‘व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ से जोड़ा गया। जहां ‘स्त्री’, ‘भेड़िया’ और ‘मुंज्या’ जैसी फिल्मों ने मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र की कहानियां दिखाईं, वहीं यह आने वाली फिल्म बिहार की एक लोककथा पर आधारित है और रहस्यमयी वन देवी मंदिर से प्रेरित है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह लगभग 400 साल पुराना है। क्या आपको अब तक यह दिलचस्प लगा? आइए बिहार के इस रहस्यमयी मंदिर और इसने फिल्म को कैसे प्रेरित किया, इसके बारे में जानते हैं।

क्या ‘व्वान’ किसी सच्ची कहानी पर आधारित है? (Is Vvaan Based on a Real Story?)

सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​और तमन्ना भाटिया की आने वाली फिल्म बिहार के वन देवी मंदिर से प्रेरित है। यह बात लेखक अरुणाभ कुमार ने बताई। फिल्म के लेखक और डायरेक्टर दीपक कुमार मिश्रा ने भी फिल्म की प्रेरणा के बारे में बात करते हुए बताया कि इसकी कहानी पटना के पास वन देवी मंदिर से जुड़ी एक असली लोककथा पर आधारित है।

उस मंदिर को 16वीं सदी में बनाया गया था

ANI से बात करते हुए अरुणाभ कुमार ने कहा, “उस मंदिर के पीछे की कहानी यह है कि इसे 16वीं सदी में बनाया गया था।” वन देवी मंदिर की अपनी यात्रा के दौरान जंगल से जुड़ी कहानियों और लोककथाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा, “जंगल में कुछ ऐसी चीजें थीं जो आस-पास के लोगों को परेशान करती थीं, और एक परंपरा थी कि लोगों को सूरज डूबने के बाद जंगल में जाने की मनाही थी। वह लोककथा आज भी प्रचलित है।” यहीं से ‘व्वान’ की कहानी का जन्म हुआ।

वन देवी मंदिर के बारे में

मां वन देवी मंदिर, 400 साल पुराना एक वन-मंदिर है। यह बिहार में पटना से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम में बिहटा के पास, अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों को जोड़ने वाले स्थान पर स्थित है। यहां देवी की पारंपरिक मूर्ति के बजाय, उन्हें एक पवित्र पत्थर के ‘पिंड’ के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर वन देवी की पूजा से जुड़ा है, जिन्हें भक्त जंगल की रक्षक देवी मानते हैं। पीढ़ियों से स्थानीय समुदायों ने इस मंदिर से जुड़ी कहानियों को संजोकर रखा है; मंदिर की एकांत जगह और जंगल से जुड़ी परंपराएँ इसके रहस्यमयी माहौल को और बढ़ाती हैं।

जंगल की रक्षक देवी से जुड़ी एक लोककथा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह देवी आस-पास के जंगलों और वहां रहने वाले लोगों की रक्षा करती हैं। यह मंदिर उन लोक-परंपराओं से भी जुड़ा है जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं। हालांकि, इस मंदिर से कई लोककथाएं जुड़ी हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर कहानियां स्थानीय मौखिक इतिहास का हिस्सा हैं, न कि लिखित ऐतिहासिक रिकॉर्ड का। लोककथाओं के अनुसार, राघोपुर के रहने वाले देवी के एक भक्त, विद्यानंद मिश्र ने इस मंदिर की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी।

वो विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी की पूजा करने के लिए नियमित रूप से लंबी दूरी की यात्रा करते थे। उम्र बढ़ने के साथ, लंबी दूरी के कारण देवी की पूजा के लिए यात्रा करना मुश्किल हो गया, फिर भी वो हर बार देवी की पूजा के लिए यात्रा करते रहे। उनकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर, देवी उनके सपने में आईं और उनसे कहा कि वो उनके पवित्र ‘पिंड’ का एक टुकड़ा अपने स्थानीय वन-क्षेत्र वाले घर ले आएं। उन्होंने उस पवित्र पत्थर को वहां स्थापित किया जहां अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों की सीमाएं मिलती हैं। बता दें कि यह इलाका कभी गहरे और घने जंगलों से घिरा हुआ था।

‘Vvaan: Force of the Forest’ का टीजर

हाल ही में ‘Vvaan: Force of the Forest’ का टीजर रिलीज हुआ था जिमसें फिल्म की रहस्यमयी और रोमांचक दुनिया की झलक दिखाई गई है। फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया मुख्य किरदारों में हैं, जबकि कहानी का बैकग्राउंड बिहार के जंगलों और वन देवी से जुड़ी लोककथा पर आधारित दिखाया गया है। रहस्य, डर और रोमांच से भरपूर ट्रेलर फिल्म की कहानी को लेकर दर्शकों में उत्साह है।

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