बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। तीन प्रत्याशी पहली बार चुनाव जीते हैं। चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों में देखें तो पटना शिक्षक सीट से जीते डॉ. संजीव कुमार सबसे अमीर हैं। उनके पास 43.04 करोड़ रुपए की संपत्ति है। जदयू के नीरज कुमार चौथी दफा चुनाव जीते हैं। सबसे पहले उन्हें सूरजभान सिंह ने नीतीश से कहकर टिकट दिलाया था। अनंत सिंह की मदद से नीरज को पहली जीत मिली थी। भास्कर की रिपोर्ट में पढ़िए, चुनाव जीतने या आगे रहने वाले प्रत्याशी कौन हैं? इनके पास कितनी संपत्ति है? कितने मामलों में आरोपी हैं? 1. पटना स्नातक सीट: कभी अनंत सिंह के करीबी थे नीरज, सूरजभान ने दिलाया था टिकट पटना स्नातक सीट जीतने वाले जदयू के सीनियर लीडर नीरज कुमार एक समय बाहुबली नेता सूरजभान सिंह के करीबी थे। बात 2002 की है। सूरजभान ने नीतीश कुमार से कहकर नीरज को पहली बार एमएलसी चुनाव का टिकट दिलाया था। वह आरजेडी से आजाद गांधी से हार गए थे। इसके बाद नीरज धीरे-धीरे सूरजभान सिंह से दूर हुए और अनंत सिंह के करीबी बन गए। 2008 में विधान परिषद का चुनाव था। अनंत सिंह ने नीतीश से बात कर नीरज को टिकट दिलाया। चुनाव में उन्हें पूरा समर्थन दिया। नीरज पहली बार चुनाव जीते और विधान परिषद के सदस्य बने। इसके बाद 2014 में दूसरी बार व 2020 में तीसरी बार जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। अब 2026 में लगातार चौथी जीत दर्ज की है। नीरज कुमार पटना जिला के मोकामा के मुंदियारटोला के रहने वाले हैं। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता हैं।
2. कोसी स्नातक सीट: हार से हैट्रिक तक एनके यादव का सफर मेडिकल पेशे से राजनीति में आए भाजपा के एनके यादव ने कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई है। 2014 में पहली और 2020 में दूसरी बार जीतने के बाद 2026 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। एनके यादव 2009 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे। उन्हें 8,828 वोट (1.40%) मिले थे। जमानत जब्त हो गई। 2010 में भागलपुर सदर विधानसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर चुनाव लड़े थे। 19,479 वोट (16.65%) लाकर तीसरे स्थान पर रहे। लगातार दो चुनाव हारने के बाद भी राजनीति में सक्रियता जारी रखी। भाजपा से जुड़ने के बाद विधान परिषद पहुंचे एनके यादव 2014 में भाजपा से जुड़े। उसी साल कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लड़े और जीतकर पहली बार एमएलसी बने। 2020 के चुनाव में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्हें 20,841 वोट मिले थे, जबकि राजद प्रत्याशी डॉ. नितेश कुमार को 13,940 वोट मिले थे। एनके यादव ने 6,901 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। मेडिकल पेशे से राजनीति तक का सफर एनके यादव मेडिकल पेशे से जुड़े रहे हैं। वह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। मूल रूप से झारखंड के गोड्डा जिले से हैं। भागलपुर उनकी कर्मभूमि रही है। एनके यादव का परिवार भी चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनकी पत्नी डॉ. वीणा यादव भागलपुर की मेयर रह चुकी हैं। उन्होंने 2007 से 2012 तक महापौर की जिम्मेदारी संभाली। उनकी बेटी डॉ. श्रेया यादव स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। बेटे डॉ. निलय कृष्ण सर्जन हैं।
3. दरभंगा स्नातक सीट: निर्दलीय MLC रहे सर्वेश कुमार को भाजपा ने दिया था टिकट सर्वेश कुमार का मूल राजनीतिक-सामाजिक जुड़ाव बेगूसराय से है। उनका पेशा स्वरोजगार है। उनकी पत्नी गृहिणी हैं। उन्होंने छपरा के राजेंद्र कॉलेज से 1981 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। सर्वेश कुमार 2020 में भाजपा के टिकट पर दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से MLC चुनाव लड़ना चाहते थे। टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और जीते। सर्वेश को 15,595 मत मिले थे। इस बार सर्वेश को भाजपा ने टिकट दिया था। उन्होंने जीत दर्ज की है।
4. तिरहुत स्नातक सीट: शिक्षामित्र रहे बंशीधर ने लिया था केके पाठक से पंगा तिरहुत स्नातक सीट से MLC चुनाव में आगे चल रहे बंशीधर ब्रजवासी ने शिक्षामित्र से MLC तक का सफर तय किया है। वह शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव रहे केके पाठक से पंगा लेकर सुर्खियों में आए थे। बात 2024 की है। केके पाठक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव थे। वह एक के बाद एक सख्त निर्देश जारी कर रहे थे। बंशीधर ने उनके निर्देशों का पालन करने से मना कर दिया था। के.के. पाठक के निर्देश पर वंशीधर को पहले निलंबित फिर सेवा से बर्खास्त किया गया। JDU नेता देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद 2024 में तिरहुत स्नातक सीट पर उपचुनाव हुआ था। वंशीधर निर्दलीय चुनाव लड़े और JDU के अभिषेक झा को हरा दिया। 2026 में एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने की ओर बढ़ रहे हैं। 5. पटना शिक्षक सीट: जदयू छोड़कर RJD में आए, पिता 5 बार बने थे विधायक डॉ. संजीव कुमार पहले खगड़िया के परबत्ता से जदयू के विधायक थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में RJD के दिगंबर प्रसाद तिवारी को 951 वोटों के अंतर से हराया था। पिछले साल जदयू छोड़कर राजद में शामिल हुए थे। भूमिहार जाति से आने वाले संजीव कुमार का परिवार लंबे समय से खगड़िया की राजनीति में प्रभाव रखता रहा है। 1979 में जन्मे डॉ. संजीव कुमार पूर्व मंत्री और पांच बार विधायक रहे डॉ. रामानंद प्रसाद सिंह (आरएन सिंह) के बेटे हैं। आरएन सिंह 5 बार विधायक बने थे। राजनीति में आने से पहले डॉ. संजीव कुमार ने मेडिकल क्षेत्र में काम किया। उन्होंने मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल और सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। वह पटना में अपना डायग्नोस्टिक सेंटर चलाते हैं। 6. दरभंगा शिक्षक सीट: 14 साल भाजपा में रहे, अब जनसुराज के पहले MLC बने दरभंगा शिक्षक सीट से चुनाव जीतने वाले डॉ. सुरेश प्रसाद राय विधान परिषद में जनसुराज के पहले सदस्य बनेंगे। एक सामान्य शिक्षक से बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष तक का सफर तय करने वाले सुरेश 14 साल तक भाजपा से जुड़े रहे। सुरेश प्रसाद राय का जन्म 5 जनवरी 1959 को समस्तीपुर जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक से लेकर मैट्रिक तक की शिक्षा बीपी स्कूल से पूरी की। इसके बाद बीएससी और एमएससी जीडी कॉलेज से किया। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की। 7 जून 1979 को बेगूसराय के मोहनपुर की रहने वाली विभा कुमारी से शादी की। उन्होंने बेगूसराय जिला मुख्यालय के सुहृद नगर में 1981 में सुहृद बाल शिक्षा मंदिर की स्थापना की। 31 जनवरी 1984 से हाई स्कूल में विज्ञान शिक्षक के रूप में उन्होंने सरकारी सेवा शुरू की। राज्य स्तर पर विज्ञान विषय में उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 7. तिरहुत शिक्षक सीट: वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर थे नरेंद्र सिंह भाजपा के टिकट पर तिरहुत शिक्षक सीट से चुनाव जीतने वाले नरेंद्र प्रसाद सिंह रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। 1996 से 2008 तक तीन बार लगातार इस सीट से जीतते आ रहे थे। 2014 में JDU-BJP के अलगाव का खामियाजा इन्हें भुगतना पड़ा था। ऐसे में इस सीट पर इनका अपना एक नेटवर्क है, जो इस चुनाव में इनके काम आया। नरेंद्र प्रसाद सिंह उच्च शिक्षा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से MSC और PHD की थी। यूनिवर्सिटी में वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर के रूप में काम किया। विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। नरेंद्र प्रसाद की राजनीति का प्रमुख केंद्र वित्त रहित शिक्षकों की समस्याएं, शिक्षकों का प्रमोशन, सेवा शर्तें और कॉलेजों को सरकारी सहायता दिलाने जैसे विषय रहे हैं। संबद्ध कॉलेजों को अनुदान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़े प्रयासों में भी उनकी भूमिका रही है।
8. सारण शिक्षक सीट: पहली बार चुनाव लड़े राहुल राज, जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राहुल राज ने जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया है। वह पहली बार MLC चुनाव लड़े और जीते हैं। राजपूत जाति से आने वाले राहुल पीएचडी होल्डर और वीआईपी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। राहुल राज स्कूल-कॉलेज चलाते हैं। इसके साथ ही दूसरे कारोबार भी संभालते हैं। उनके पिता का नाम विपिन सिंह है। सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के मुकरेड़ा गांव के रहने वाले राहुल बीजेपी प्रदेश कार्य समिति के सदस्य के साथ-साथ रिविलगंज ब्लॉक प्रमुख भी हैं। बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। तीन प्रत्याशी पहली बार चुनाव जीते हैं। चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों में देखें तो पटना शिक्षक सीट से जीते डॉ. संजीव कुमार सबसे अमीर हैं। उनके पास 43.04 करोड़ रुपए की संपत्ति है। जदयू के नीरज कुमार चौथी दफा चुनाव जीते हैं। सबसे पहले उन्हें सूरजभान सिंह ने नीतीश से कहकर टिकट दिलाया था। अनंत सिंह की मदद से नीरज को पहली जीत मिली थी। भास्कर की रिपोर्ट में पढ़िए, चुनाव जीतने या आगे रहने वाले प्रत्याशी कौन हैं? इनके पास कितनी संपत्ति है? कितने मामलों में आरोपी हैं? 1. पटना स्नातक सीट: कभी अनंत सिंह के करीबी थे नीरज, सूरजभान ने दिलाया था टिकट पटना स्नातक सीट जीतने वाले जदयू के सीनियर लीडर नीरज कुमार एक समय बाहुबली नेता सूरजभान सिंह के करीबी थे। बात 2002 की है। सूरजभान ने नीतीश कुमार से कहकर नीरज को पहली बार एमएलसी चुनाव का टिकट दिलाया था। वह आरजेडी से आजाद गांधी से हार गए थे। इसके बाद नीरज धीरे-धीरे सूरजभान सिंह से दूर हुए और अनंत सिंह के करीबी बन गए। 2008 में विधान परिषद का चुनाव था। अनंत सिंह ने नीतीश से बात कर नीरज को टिकट दिलाया। चुनाव में उन्हें पूरा समर्थन दिया। नीरज पहली बार चुनाव जीते और विधान परिषद के सदस्य बने। इसके बाद 2014 में दूसरी बार व 2020 में तीसरी बार जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। अब 2026 में लगातार चौथी जीत दर्ज की है। नीरज कुमार पटना जिला के मोकामा के मुंदियारटोला के रहने वाले हैं। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता हैं।
2. कोसी स्नातक सीट: हार से हैट्रिक तक एनके यादव का सफर मेडिकल पेशे से राजनीति में आए भाजपा के एनके यादव ने कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई है। 2014 में पहली और 2020 में दूसरी बार जीतने के बाद 2026 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। एनके यादव 2009 के लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे। उन्हें 8,828 वोट (1.40%) मिले थे। जमानत जब्त हो गई। 2010 में भागलपुर सदर विधानसभा सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर चुनाव लड़े थे। 19,479 वोट (16.65%) लाकर तीसरे स्थान पर रहे। लगातार दो चुनाव हारने के बाद भी राजनीति में सक्रियता जारी रखी। भाजपा से जुड़ने के बाद विधान परिषद पहुंचे एनके यादव 2014 में भाजपा से जुड़े। उसी साल कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद का चुनाव लड़े और जीतकर पहली बार एमएलसी बने। 2020 के चुनाव में उन्होंने दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्हें 20,841 वोट मिले थे, जबकि राजद प्रत्याशी डॉ. नितेश कुमार को 13,940 वोट मिले थे। एनके यादव ने 6,901 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। मेडिकल पेशे से राजनीति तक का सफर एनके यादव मेडिकल पेशे से जुड़े रहे हैं। वह स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं। मूल रूप से झारखंड के गोड्डा जिले से हैं। भागलपुर उनकी कर्मभूमि रही है। एनके यादव का परिवार भी चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनकी पत्नी डॉ. वीणा यादव भागलपुर की मेयर रह चुकी हैं। उन्होंने 2007 से 2012 तक महापौर की जिम्मेदारी संभाली। उनकी बेटी डॉ. श्रेया यादव स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ हैं। बेटे डॉ. निलय कृष्ण सर्जन हैं।
3. दरभंगा स्नातक सीट: निर्दलीय MLC रहे सर्वेश कुमार को भाजपा ने दिया था टिकट सर्वेश कुमार का मूल राजनीतिक-सामाजिक जुड़ाव बेगूसराय से है। उनका पेशा स्वरोजगार है। उनकी पत्नी गृहिणी हैं। उन्होंने छपरा के राजेंद्र कॉलेज से 1981 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। सर्वेश कुमार 2020 में भाजपा के टिकट पर दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से MLC चुनाव लड़ना चाहते थे। टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और जीते। सर्वेश को 15,595 मत मिले थे। इस बार सर्वेश को भाजपा ने टिकट दिया था। उन्होंने जीत दर्ज की है।
4. तिरहुत स्नातक सीट: शिक्षामित्र रहे बंशीधर ने लिया था केके पाठक से पंगा तिरहुत स्नातक सीट से MLC चुनाव में आगे चल रहे बंशीधर ब्रजवासी ने शिक्षामित्र से MLC तक का सफर तय किया है। वह शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव रहे केके पाठक से पंगा लेकर सुर्खियों में आए थे। बात 2024 की है। केके पाठक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव थे। वह एक के बाद एक सख्त निर्देश जारी कर रहे थे। बंशीधर ने उनके निर्देशों का पालन करने से मना कर दिया था। के.के. पाठक के निर्देश पर वंशीधर को पहले निलंबित फिर सेवा से बर्खास्त किया गया। JDU नेता देवेश चंद्र ठाकुर के सांसद बनने के बाद 2024 में तिरहुत स्नातक सीट पर उपचुनाव हुआ था। वंशीधर निर्दलीय चुनाव लड़े और JDU के अभिषेक झा को हरा दिया। 2026 में एक बार फिर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने की ओर बढ़ रहे हैं। 5. पटना शिक्षक सीट: जदयू छोड़कर RJD में आए, पिता 5 बार बने थे विधायक डॉ. संजीव कुमार पहले खगड़िया के परबत्ता से जदयू के विधायक थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में RJD के दिगंबर प्रसाद तिवारी को 951 वोटों के अंतर से हराया था। पिछले साल जदयू छोड़कर राजद में शामिल हुए थे। भूमिहार जाति से आने वाले संजीव कुमार का परिवार लंबे समय से खगड़िया की राजनीति में प्रभाव रखता रहा है। 1979 में जन्मे डॉ. संजीव कुमार पूर्व मंत्री और पांच बार विधायक रहे डॉ. रामानंद प्रसाद सिंह (आरएन सिंह) के बेटे हैं। आरएन सिंह 5 बार विधायक बने थे। राजनीति में आने से पहले डॉ. संजीव कुमार ने मेडिकल क्षेत्र में काम किया। उन्होंने मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल और सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। वह पटना में अपना डायग्नोस्टिक सेंटर चलाते हैं। 6. दरभंगा शिक्षक सीट: 14 साल भाजपा में रहे, अब जनसुराज के पहले MLC बने दरभंगा शिक्षक सीट से चुनाव जीतने वाले डॉ. सुरेश प्रसाद राय विधान परिषद में जनसुराज के पहले सदस्य बनेंगे। एक सामान्य शिक्षक से बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष तक का सफर तय करने वाले सुरेश 14 साल तक भाजपा से जुड़े रहे। सुरेश प्रसाद राय का जन्म 5 जनवरी 1959 को समस्तीपुर जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक से लेकर मैट्रिक तक की शिक्षा बीपी स्कूल से पूरी की। इसके बाद बीएससी और एमएससी जीडी कॉलेज से किया। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की। 7 जून 1979 को बेगूसराय के मोहनपुर की रहने वाली विभा कुमारी से शादी की। उन्होंने बेगूसराय जिला मुख्यालय के सुहृद नगर में 1981 में सुहृद बाल शिक्षा मंदिर की स्थापना की। 31 जनवरी 1984 से हाई स्कूल में विज्ञान शिक्षक के रूप में उन्होंने सरकारी सेवा शुरू की। राज्य स्तर पर विज्ञान विषय में उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 7. तिरहुत शिक्षक सीट: वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर थे नरेंद्र सिंह भाजपा के टिकट पर तिरहुत शिक्षक सीट से चुनाव जीतने वाले नरेंद्र प्रसाद सिंह रिटायर्ड प्रोफेसर हैं। 1996 से 2008 तक तीन बार लगातार इस सीट से जीतते आ रहे थे। 2014 में JDU-BJP के अलगाव का खामियाजा इन्हें भुगतना पड़ा था। ऐसे में इस सीट पर इनका अपना एक नेटवर्क है, जो इस चुनाव में इनके काम आया। नरेंद्र प्रसाद सिंह उच्च शिक्षा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से MSC और PHD की थी। यूनिवर्सिटी में वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर के रूप में काम किया। विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। नरेंद्र प्रसाद की राजनीति का प्रमुख केंद्र वित्त रहित शिक्षकों की समस्याएं, शिक्षकों का प्रमोशन, सेवा शर्तें और कॉलेजों को सरकारी सहायता दिलाने जैसे विषय रहे हैं। संबद्ध कॉलेजों को अनुदान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़े प्रयासों में भी उनकी भूमिका रही है।
8. सारण शिक्षक सीट: पहली बार चुनाव लड़े राहुल राज, जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राहुल राज ने जेडीयू के आनंद पुष्कर को हराया है। वह पहली बार MLC चुनाव लड़े और जीते हैं। राजपूत जाति से आने वाले राहुल पीएचडी होल्डर और वीआईपी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। राहुल राज स्कूल-कॉलेज चलाते हैं। इसके साथ ही दूसरे कारोबार भी संभालते हैं। उनके पिता का नाम विपिन सिंह है। सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के मुकरेड़ा गांव के रहने वाले राहुल बीजेपी प्रदेश कार्य समिति के सदस्य के साथ-साथ रिविलगंज ब्लॉक प्रमुख भी हैं।

