जिला चिकित्सालय में पदस्थ एक महिला कर्मचारी की शिकायत पर महिला थाना बड़वानी में गुरवार रात सिविल सर्जन डॉ. मनोज खन्ना के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। महिला ने उन पर छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना, पद के दुरुपयोग और कार्यस्थल पर डर का माहौल बनाने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 74, 75 और 78 के तहत मामला दर्ज किया है। पीड़िता के अनुसार, उन्होंने कलेक्टर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजी थी। उन्होंने 3 सितंबर को भी महिला थाना सेल पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। पिता की बीमारी के कारण छुट्टी मांगी थी, मंजूर नहीं की महिला ने शिकायत में बताया कि उनके 71 वर्षीय पिता को 16 अप्रैल को स्ट्रोक आया था। वे सात दिन वेंटिलेटर पर रहे और 6 मई को ट्रेकोस्टॉमी के साथ अस्पताल से डिस्चार्ज हुए। पीड़िता के मुताबिक, 31 मई तक घर पर 24 घंटे नर्सिंग देखभाल की व्यवस्था करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इकलौती अविवाहित बेटी होने के कारण पिता की देखभाल की जिम्मेदारी उन पर है। महिला का आरोप है कि मेडिकल रिपोर्ट के साथ छुट्टी का आवेदन देने के बावजूद 17 से 31 मई तक की छुट्टी मंजूर नहीं की गई और उनका 75 दिन का वेतन रोक दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौखिक रूप से निवेदन करने पर उन्हें कार्यालय समय के बाद मिलने के लिए दबाव बनाया गया। हाजिरी रजिस्टर में गड़बड़ी का आरोप शिकायत के अनुसार, 6 और 7 अगस्त को छुट्टी के आवेदन पर हाजिरी रजिस्टर में सवालिया निशान लगाए गए। महिला का दावा है कि 15 और 21 अगस्त को ड्यूटी पर मौजूद रहने के बावजूद उन्हें अनुपस्थित दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 1 सितंबर को उन्हें हाजिरी रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से रोका गया और आवक शाखा में उनका आवेदन लेने से भी मना कर दिया गया। महिला ने बताया कि पूर्व सिविल सर्जन डॉ. अनिता सिंगारे ने 19 सितंबर 2024 को पत्र क्रमांक 7899 के जरिए मानवीय आधार पर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक आने की अनुमति दी थी। उनके अनुसार, वर्तमान सिविल सर्जन ने इस अनुमति को नजरअंदाज किया। सिविल सर्जन ने आरोपों को निराधार बताया डॉ. मनोज खन्ना ने महिला के सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि महिला समय पर कार्यालय नहीं आतीं और बिना सूचना के छुट्टी पर चली जाती हैं। उन्होंने दावा किया कि महिला अप्रैल से करीब डेढ़ महीने तक लगातार अनुपस्थित रही थीं, सुबह 11:30 बजे आती हैं और दोपहर 2 बजे से पहले चली जाती हैं। डॉ. खन्ना के अनुसार, अनुपस्थिति का मामला भोपाल भेजा गया है। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।

