Sant Ravidas Nagar Bhadohi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भदोही जिले के नामकरण को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि अब भदोही जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। कारपेट एक्सपो मार्ट में 50वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले का उद्घाटन करने के बाद भिखारीपुर मैदान में आयोजित एक विशाल जनसभा में मुख्यमंत्री ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
इस घोषणा के साथ भदोही के नाम का राजनीतिक इतिहास एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जिले के गठन के बाद से अब तक इसके नाम में कई बदलाव हो चुके हैं। हर बार सत्ता परिवर्तन के साथ नाम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक सोच सामने आती रही है।
सियासत के साथ बदलता रहा है भदोही का नाम
भदोही जिले के नाम का इतिहास प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ बदलता रहा है। 30 जून, 1994 को सबसे पहले मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी सरकार ने वाराणसी से अलग कर इस क्षेत्र को ‘भदोही’ नाम से एक नया जिला बनाया था। इसके बाद 4 दिसंबर, 1997 को मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी की सरकार ने इसका नाम बदलकर महान संत के सम्मान में ‘संत रविदास नगर’ कर दिया था।
स्थापना के बाद 5वीं बार हुआ नाम परिवर्तन
नाम बदलने का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 12 नवंबर, 1999 को रामप्रकाश गुप्ता की तत्कालीन भाजपा सरकार ने जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दोनों नामों को मिला दिया और जिले का नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ कर दिया। इसके बाद 6 दिसंबर, 2014 को अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सरकार ने संत रविदास नगर का नाम हटाकर इसे फिर से सिर्फ ‘भदोही’ कर दिया था। अब 4 अक्टूबर, 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर दोनों नामों को जोड़कर जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम दिया है। इस तरह से जिले के गठन के बाद से अब तक कुल 5 बार इसका नाम बदला जा चुका है।
संत रविदास के सम्मान में हुआ फैसला
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नाम परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य महान संत रविदास की महत्ता और समाज में उनके अमूल्य योगदान को मान्यता देना है। संत रविदास भारतीय समाज के एक ऐसे महान संत और कवि थे जिन्होंने हमेशा समानता, भाईचारे और समरसता का संदेश दिया। जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने संत रविदास के विचारों को याद किया और उनके योगदान की जमकर सराहना की।

