Military Weapons Stolen: सिकंदराबाद के बोलारम स्थित 20वीं मद्रास रेजिमेंट के हाई-सिक्योरिटी कैंटोनमेंट इलाके से सैन्य हथियारों की चोरी के मामले में संयुक्त जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मिलिट्री इंटेलिजेंस, सदर्न कमांड और तेलंगाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक पूर्व सेना हवलदार को हिरासत में लिया गया है। जांच के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर स्कूटी से कैंटोनमेंट में प्रवेश किया, शस्त्रागार का ताला तोड़ा और 12 हथियार लेकर फरार हो गया।
घटना 29 और 30 अगस्त के सप्ताहांत की बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, उस दौरान पूरी बटालियन, जिसमें कमांडिंग ऑफिसर भी शामिल थे, फील्ड फायरिंग के लिए पोखरण गई हुई थी। इसी मौके का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर चोरी को अंजाम दिया।
रात में शस्त्रागार का ताला तोड़कर ले गया हथियार
जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी ने 29 अगस्त की रात शस्त्रागार का ताला तोड़ा और वहां से AK असॉल्ट राइफल, INSAS राइफल और अन्य हथियारों समेत कुल 12 हथियार और गोला-बारूद निकाल लिया। उसने हथियारों को पहले रेजिमेंट से बाहर घने पेड़ों और झाड़ियों के बीच छिपा दिया। इसके बाद आरोपी अपनी एक्टिवा से हथियारों को अपने घर ले गया। अगले दिन उसने कथित तौर पर चोरी के हथियारों को अपनी कार में रखा और मुख्य राजमार्गों से बचते हुए उन्हें नागारकुर्नूल जिले में ले जाकर जमीन में दबा दिया।
48 घंटे का मौका देखकर बनाई थी योजना
जांच में सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर चोरी के लिए 29-30 अगस्त की रात का समय जानबूझकर चुना था। उसे पता था कि सप्ताहांत के दौरान शस्त्रागार के स्टॉक की जांच नहीं होगी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, उसने करीब 48 घंटे की इस अवधि को हथियार हटाने और उन्हें सुरक्षित जगह पर छिपाने के लिए इस्तेमाल किया। हथियारों की चोरी का पता 31 अगस्त को नियमित इन्वेंट्री के दौरान चला। इसके बाद रात में घर में सेंधमारी और सरकारी संपत्ति की चोरी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
70 से ज्यादा लोगों से पूछताछ के बाद पूर्व सैनिक पर पहुंचा शक
जांच टीम ने शुरुआत में 70 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इसके बाद जांच का फोकस हाल में सेवानिवृत्त या सेवा से बाहर हुए सैन्यकर्मियों की ओर किया गया। मोबाइल टावर लोकेशन, CCTV फुटेज और डिजिटल सुरागों के आधार पर जांचकर्ताओं को पूर्व हवलदार तक पहुंचने में सफलता मिली। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर चोरी की बात स्वीकार की। उसने दावा किया कि वह अपने कमांडिंग ऑफिसर से नाराज था, क्योंकि उसके आचरण को देखते हुए अधिकारी ने उसे तीन साल का सेवा विस्तार देने से इनकार कर दिया था।
6-7 सैन्य अधिकारी जांच के दायरे में
हालांकि, जांचकर्ताओं को आरोपी की यह वजह पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगी। मामले में 6-7 सेवारत सैन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि हथियारों को शस्त्रागार से बाहर निकालने में किसी अंदरूनी व्यक्ति की मदद हो सकती है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इतनी कड़ी सुरक्षा वाले सैन्य परिसर में बाहरी व्यक्ति के लिए अकेले हथियारों के भंडार तक पहुंचना और बड़ी संख्या में हथियार लेकर निकलना आसान नहीं था।
चोरी के पीछे बड़ी साजिश का शक
जांच एजेंसियां अब इस संभावना को भी खंगाल रही हैं कि चोरी के पीछे केवल व्यक्तिगत दुश्मनी का मकसद नहीं था। सैन्य ग्रेड के 12 असॉल्ट राइफल और गोला-बारूद चोरी होने से सुरक्षा एजेंसियों में चिंता बढ़ गई है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि हथियारों को किसी आपराधिक या देशविरोधी नेटवर्क तक पहुंचाने की योजना हो सकती थी। हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, चोरी किए गए सभी हथियार बरामद कर लिए गए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है और हथियार चोरी के पीछे संभावित अंदरूनी मिलीभगत तथा अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।

