लखनऊ के आशियाना थाने के वर्ष 2022 के एक मुकदमे में आरोपी जयकेश त्रिपाठी कोर्ट की अभिरक्षा से फरार हो गया। 9 सितंबर को आरोपी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर वारंट निरस्तीकरण की अर्जी लगाई थी। अर्जी खारिज होने के बाद उसे जिला जेल भेजने का आदेश हुआ, लेकिन जेल जाने से पहले ही वह कोर्ट परिसर से निकल गया। मामले में न्यायालय के वरिष्ठ लिपिक आलोक त्रिपाठी ने वजीरगंज थाने में तहरीर देकर FIR दर्ज करने की मांग की है। दिल की बीमारी बताकर पानी पीने के बहाने बाहर निकला, फिर नहीं लौटा तहरीर के मुताबिक, जयकेश त्रिपाठी के खिलाफ आशियाना थाने में मुकदमा दर्ज है। 9 सितंबर को उसने न्यायालय में आत्मसमर्पण करते हुए वारंट निरस्तीकरण प्रार्थनापत्र दिया था। इसके बाद कोर्ट मोहर्रिर प्रवीन कुमार और पूजा मिश्रा ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया। कोर्ट ने वारंट निरस्तीकरण की अर्जी खारिज करते हुए आरोपी के खिलाफ वारंट तैयार कर उसे जिला कारागार भेजने का आदेश दिया।
इसी दौरान कोर्ट मोहर्रिर ने बताया कि आरोपी ने खुद को दिल की बीमारी से पीड़ित बताते हुए लघुशंका और पानी पीने के लिए थोड़ी देर बाहर जाने की बात कही। इसके बाद वह वापस नहीं आया। कोर्ट मोहर्रिर ने उसे आसपास काफी तलाश किया, लेकिन उसका पता नहीं चला। तहरीर में कहा गया है कि आरोपी न्यायिक अभिरक्षा में था और बिना किसी न्यायालयी आदेश के वहां से फरार हुआ। एमएलसी से कारोबारी रिश्ते का भी दावा जयकेश त्रिपाठी को लेकर यह भी चर्चा है कि वह भाजपा के एक एमएलसी का बिजनेस पार्टनर रहा है। हालांकि, इस कारोबारी रिश्ते की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। पुलिस अब आरोपी की तलाश के साथ कोर्ट की अभिरक्षा से उसके निकलने की परिस्थितियों की जांच करेगी। वरिष्ठ लिपिक ने आरोपी के खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है। तहरीर 11 सितंबर को दी गई है।

