धान की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही समस्तीपुर में पैक्स अध्यक्षों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। जिले के पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने फैसला लिया है कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 1 नवंबर से वे धान की सरकारी खरीद नहीं करेंगे। इससे जिले में धान खरीद की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, सरकारी केंद्रों पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों की परेशानी भी बढ़ सकती है। इस संबंध में समस्तीपुर कोऑपरेटिव के अध्यक्ष विनोद कुमार राय की अध्यक्षता में जिले के सभी पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की आपात बैठक हुई। इसमें सहकारी समितियों की समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर चर्चा की गई। अध्यक्षों ने कहा कि सरकार धान खरीद की जिम्मेदारी समितियों को देती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली राशि और दूसरी सुविधाओं का भुगतान समय पर नहीं होता। इससे समितियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बकाया भुगतान-कमीशन की दर बढ़ाने की मांग बैठक में पैक्स अध्यक्षों ने धान अधिप्राप्ति की बकाया राशि का भुगतान जल्द करने की मांग उठाई। इसके साथ ही अतिरिक्त समय में किए गए काम का भी उचित भुगतान करने की बात कही। उनका कहना था कि धान खरीद के दौरान समितियों को कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, लेकिन इसके अनुपात में भुगतान नहीं मिलता। अध्यक्षों ने समितियों को मिलने वाले कमीशन, मिलिंग शुल्क, मंडी श्रमिक शुल्क और हैंडलिंग शुल्क की दरों की समीक्षा कर उन्हें बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि मजदूरों की मजदूरी, धान की ढुलाई और रखरखाव समेत कई कामों पर खर्च करना पड़ता है। मौजूदा भुगतान व्यवस्था में इन खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। धान खरीद का लक्ष्य 60 लाख करने की मांग बैठक में राज्य में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य बढ़ाकर 60 लाख करने की मांग भी उठाई गई। पैक्स अध्यक्षों का कहना था कि किसानों से अधिक धान खरीदने का लक्ष्य तय करने के साथ समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत करना भी जरूरी है। पर्याप्त संसाधन और उचित भुगतान मिलने पर ही समितियां किसानों से समय पर धान खरीद सकेंगी। उन्होंने कहा कि धान खरीद के दौरान समितियों पर काम का दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में खरीद का लक्ष्य बढ़ाने के साथ व्यवस्था में जरूरी बदलाव करना भी जरूरी है। इससे किसानों को धान बेचने में सुविधा होगी और समितियां भी बेहतर तरीके से काम कर सकेंगी। एसएफसी के साथ समझौते की स्वायत्तता देने की मांग पैक्स अध्यक्षों ने राज्य सरकार की गारंटी पर राज्य के सहकारी एसएफसी के साथ त्रिपक्षीय समझौता करने की स्वायत्तता समितियों को देने की मांग की। उनका कहना था कि समितियों को कामकाज में जरूरी अधिकार मिलने चाहिए, ताकि धान खरीद की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी न हो। इसके अलावा धान अधिप्राप्ति करने वाली समितियों को उर्वरक की आपूर्ति और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया गया। अध्यक्षों ने कहा कि पैक्स ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ये किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक में भूमिका निभाते हैं। इसलिए समितियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए। 1 नवंबर से खरीद बंद करने का फैसला बैठक में शामिल पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार और संबंधित विभाग गंभीरता से विचार नहीं करते, तब तक धान अधिप्राप्ति का काम करना संभव नहीं होगा। इसी के बाद 1 नवंबर से जिले के किसी भी पैक्स अध्यक्ष द्वारा धान की खरीद नहीं करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले से धान खरीद शुरू होने से पहले ही सहकारिता विभाग के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। यदि समय रहते पैक्स अध्यक्षों और विभाग के बीच सहमति नहीं बनी तो सरकारी खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ सकता है, जो अपनी उपज सरकारी दर पर बेचने की तैयारी कर रहे हैं। अब पैक्स अध्यक्षों की मांगों पर सरकार और विभागीय अधिकारियों के अगले कदम का इंतजार है। वहीं, किसानों की नजर भी इस बात पर है कि धान खरीद तय समय पर शुरू हो पाती है या नहीं। धान की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले ही समस्तीपुर में पैक्स अध्यक्षों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। जिले के पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने फैसला लिया है कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 1 नवंबर से वे धान की सरकारी खरीद नहीं करेंगे। इससे जिले में धान खरीद की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, सरकारी केंद्रों पर धान बेचने की तैयारी कर रहे किसानों की परेशानी भी बढ़ सकती है। इस संबंध में समस्तीपुर कोऑपरेटिव के अध्यक्ष विनोद कुमार राय की अध्यक्षता में जिले के सभी पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों की आपात बैठक हुई। इसमें सहकारी समितियों की समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों पर चर्चा की गई। अध्यक्षों ने कहा कि सरकार धान खरीद की जिम्मेदारी समितियों को देती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली राशि और दूसरी सुविधाओं का भुगतान समय पर नहीं होता। इससे समितियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बकाया भुगतान-कमीशन की दर बढ़ाने की मांग बैठक में पैक्स अध्यक्षों ने धान अधिप्राप्ति की बकाया राशि का भुगतान जल्द करने की मांग उठाई। इसके साथ ही अतिरिक्त समय में किए गए काम का भी उचित भुगतान करने की बात कही। उनका कहना था कि धान खरीद के दौरान समितियों को कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, लेकिन इसके अनुपात में भुगतान नहीं मिलता। अध्यक्षों ने समितियों को मिलने वाले कमीशन, मिलिंग शुल्क, मंडी श्रमिक शुल्क और हैंडलिंग शुल्क की दरों की समीक्षा कर उन्हें बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि मजदूरों की मजदूरी, धान की ढुलाई और रखरखाव समेत कई कामों पर खर्च करना पड़ता है। मौजूदा भुगतान व्यवस्था में इन खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। धान खरीद का लक्ष्य 60 लाख करने की मांग बैठक में राज्य में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य बढ़ाकर 60 लाख करने की मांग भी उठाई गई। पैक्स अध्यक्षों का कहना था कि किसानों से अधिक धान खरीदने का लक्ष्य तय करने के साथ समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत करना भी जरूरी है। पर्याप्त संसाधन और उचित भुगतान मिलने पर ही समितियां किसानों से समय पर धान खरीद सकेंगी। उन्होंने कहा कि धान खरीद के दौरान समितियों पर काम का दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे में खरीद का लक्ष्य बढ़ाने के साथ व्यवस्था में जरूरी बदलाव करना भी जरूरी है। इससे किसानों को धान बेचने में सुविधा होगी और समितियां भी बेहतर तरीके से काम कर सकेंगी। एसएफसी के साथ समझौते की स्वायत्तता देने की मांग पैक्स अध्यक्षों ने राज्य सरकार की गारंटी पर राज्य के सहकारी एसएफसी के साथ त्रिपक्षीय समझौता करने की स्वायत्तता समितियों को देने की मांग की। उनका कहना था कि समितियों को कामकाज में जरूरी अधिकार मिलने चाहिए, ताकि धान खरीद की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी न हो। इसके अलावा धान अधिप्राप्ति करने वाली समितियों को उर्वरक की आपूर्ति और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का मुद्दा भी उठाया गया। अध्यक्षों ने कहा कि पैक्स ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ये किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक में भूमिका निभाते हैं। इसलिए समितियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होना चाहिए। 1 नवंबर से खरीद बंद करने का फैसला बैठक में शामिल पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार और संबंधित विभाग गंभीरता से विचार नहीं करते, तब तक धान अधिप्राप्ति का काम करना संभव नहीं होगा। इसी के बाद 1 नवंबर से जिले के किसी भी पैक्स अध्यक्ष द्वारा धान की खरीद नहीं करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले से धान खरीद शुरू होने से पहले ही सहकारिता विभाग के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। यदि समय रहते पैक्स अध्यक्षों और विभाग के बीच सहमति नहीं बनी तो सरकारी खरीद की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ सकता है, जो अपनी उपज सरकारी दर पर बेचने की तैयारी कर रहे हैं। अब पैक्स अध्यक्षों की मांगों पर सरकार और विभागीय अधिकारियों के अगले कदम का इंतजार है। वहीं, किसानों की नजर भी इस बात पर है कि धान खरीद तय समय पर शुरू हो पाती है या नहीं।

