नाबालिग को 7 से 8 दिन तक कमरे में बंधक बनाकर दुष्कर्म करने के आरोप में करीब 10 महीने जेल में रहे युवक को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया है। अभियोजन पक्ष के आरोपों और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के साथ ही बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए यात्रा संबंधी दस्तावेजों को कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना। बचाव पक्ष का कहना था कि जिस अवधि में घटना होना बताई गई, उस दौरान आरोपी दोस्तों के साथ मथुरा-वृंदावन गया था। विशेष न्यायाधीश शिप्रा पटेल ने 28 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया अभियोजन के अनुसार 20 मार्च 2024 को आरोपी नाबालिग को उसके घर से ले गया था। आरोप था कि इसके बाद उसे एक कमरे में बंधक बनाकर रखा और 7-8 दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में 28 मार्च 2024 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। बचाव पक्ष ने पेश किए ट्रेन टिकट, पार्किंग की रसीद और तस्वीरें आरोपी की ओर से एडवोकेट आशीष एस. शर्मा ने अदालत में दलील दी कि 20 से 24 मार्च 2024 के बीच आरोपी दोस्तों के साथ था। वह 21 से 24 मार्च तक मथुरा-वृंदावन की यात्रा पर गया था। बचाव पक्ष ने इस संबंध में गवाह पेश किए। गवाहों ने बताया कि आरोपी उनके साथ किराए के कमरे में रहता था और होली के अवसर पर सभी मथुरा-वृंदावन गए थे। इस दलील के समर्थन में इंदौर रेलवे स्टेशन की दोपहिया पार्किंग की रसीद, मथुरा आने-जाने के ट्रेन टिकट और यात्रा की तस्वीरें भी कोर्ट में पेश की गईं। कोर्ट ने फैसले में उल्लेख किया कि बचाव पक्ष के गवाहों से विस्तृत जिरह के बावजूद उनके बयान खंडित नहीं हो सके। दस्तावेजों और तस्वीरों से भी आरोपी के यात्रा पर होने की दलील को समर्थन मिला। पीड़िता और माता-पिता के बयानों में मिले अंतर कोर्ट ने पीड़िता और उसके माता-पिता के बयानों में घटनाक्रम को लेकर महत्वपूर्ण अंतर भी पाया। पीड़िता ने बताया था कि आरोपी उसे इंदौर से बस में महू ले गया था, जबकि उसके वापस आने और उसे लाए जाने की परिस्थितियों को लेकर माता-पिता के बयानों में अलग-अलग बातें सामने आईं। इसके अलावा जांच के दौरान घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोगों और मकान मालिक से पूछताछ नहीं की गई थी। बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी का मुद्दा भी कोर्ट के सामने रखा। अभियोजन आरोप साबित करने में रहा असफल सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद विशेष न्यायाधीश शिप्रा पटेल ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन यात्रा से जुड़े साक्ष्यों और बयानों में विरोधाभास को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया।

