रायबरेली में सई नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। डीह विकास खंड के तटीय इलाकों में बाढ़ और भीषण कटान का खतरा मंडरा रहा है, जिससे लगभग एक दर्जन गांवों में दहशत का माहौल है। पिछले लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। बघौला, पुरे बरगद, रायपुर महेवा, सराय माणिक, घिसीगृह और सेमरी झाकरासी जैसे गांव सर्वाधिक प्रभावित हैं। इसके अतिरिक्त, आसपास के करीब एक दर्जन अन्य गांव भी इसकी चपेट में हैं। यह क्षेत्र नदी के कटान के प्रति अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है।
नदी का पानी तटबंधों को पार कर खेतों में फैल गया है, जिससे किसानों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, नदी के दोनों किनारों पर 40 बीघे से अधिक धान की फसल पूरी तरह डूब चुकी है। लगातार पानी भरने से फसलों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। नदी के बढ़ते जलस्तर और प्रशासन द्वारा अब तक ठोस सुरक्षा इंतजाम न किए जाने से ग्रामीणों में रोष और भय व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो पानी जल्द ही कई बस्तियों और घरों तक पहुंच जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से तत्काल मौके पर पहुंचकर कटान रोकने के उपाय करने और जलमग्न फसलों के मुआवजे का आकलन करने की मांग की है।

