बालाघाट के भरवेली क्षेत्र के हीरापुर स्थित श्री सिद्ध पीठ विष्णुधाम मंदिर में चल रही श्री हनुमंत कथा में मंगलवार को भगवान श्रीराम और हनुमान जी के मिलन का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास आचार्य रोहित रिछारिया ने हनुमान जी की रामभक्ति, निष्ठा और सेवाभाव का महत्व बताया। इस दौरान मंदिर समिति ने दुर्गा पंडाल प्रतियोगिता के विजेताओं के नाम भी घोषित किए। हनुमान जी की निस्वार्थ सेवा का महत्व बताया आचार्य रोहित रिछारिया ने कहा कि हनुमान जी का जीवन भक्तों के लिए आदर्श है। उनकी अटूट श्रद्धा और निस्वार्थ सेवा सिखाती है कि सच्ची भक्ति में अहंकार और स्वार्थ नहीं होता। श्रीराम-हनुमान मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्ति में लीन रहे। शहरी क्षेत्र में नव शक्ति दुर्गा उत्सव समिति पहले स्थान पर श्री सिद्ध पीठ विष्णुधाम मंदिर समिति ने हाल ही में हुई दुर्गा पंडाल प्रतियोगिता के परिणाम घोषित किए। शहरी क्षेत्र में मां दुर्गा प्रतिमा श्रेणी में नव शक्ति दुर्गा उत्सव समिति, बालाघाट को पहला, नया सराफा दुर्गा उत्सव समिति, बालाघाट को दूसरा और आराधना दुर्गा उत्सव समिति को तीसरा स्थान मिला। पंडाल सजावट में इन समितियों को स्थान पंडाल डेकोरेशन श्रेणी में विंध्यवासिनी दुर्गा उत्सव समिति, भटेरा रोड; नव जागृति दुर्गा उत्सव समिति, जोड़ा महुआ, बूढ़ी और जन जागृति दुर्गा उत्सव समिति, झांसी रानी चौक को चुना गया। अनुशासन एवं धार्मिक वातावरण श्रेणी में श्री सार्वजनिक बंगाली दुर्गा उत्सव समिति, नव जागृति दुर्गा उत्सव समिति, जोड़ा महुआ, बूढ़ी और श्री सार्वजनिक गुजराती समाज दुर्गा उत्सव समिति को स्थान मिला। ग्रामीण क्षेत्र की विजेता समितियां ग्रामीण क्षेत्र की मां दुर्गा प्रतिमा श्रेणी में मां महाकाली सेवा समिति, सियारपाठ, बैहर; मां सिंहवाहिनी दुर्गा उत्सव समिति, पुरानी गुजरी चौक, लांजी और जय माता दी दुर्गा उत्सव समिति, देवटोला को चुना गया। पंडाल डेकोरेशन श्रेणी में मां महाकाली सेवा समिति, सियारपाठ, बैहर; नव दुर्गा उत्सव समिति, वारासिवनी और सद्भावना मित्र मंडल समिति, बस स्टैंड लांजी को स्थान मिला। अनुशासन एवं धार्मिक वातावरण श्रेणी में सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति, भरवेली; मां सरस्वती महोत्सव समिति, लालबर्रा और श्री गणेश नवदुर्गा उत्सव समिति, गंज बाजार, लालबर्रा को चुना गया। उत्सव समितियों को प्रोत्साहित करना उद्देश्य मंदिर समिति के अनुसार, प्रतियोगिता का उद्देश्य दुर्गा उत्सव समितियों को प्रोत्साहित करना और आयोजनों में रचनात्मकता, स्वच्छता व अनुशासन को बढ़ावा देना है।

