जामिया तुल हिदाया ट्रस्ट से जुड़ी वक्फ जमीन और अफजल विहार कॉलोनी का विवाद एक बार फिर चर्चा में है। मामले के परिवादी डॉ. मोहम्मद शोएब ने आरोप लगाया है कि राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद नासिर खान सड़वा 22 अक्टूबर को निर्धारित तारीख पर जांच में शामिल नहीं हुए। अब 30 अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर निगाहें टिकी हैं। हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना नहीं करने का आरोप परिवादी डॉ. मोहम्मद शोएब के अनुसार, राजस्थान हाईकोर्ट ने नासिर खान सड़वा को 22 अक्टूबर को मुकदमे की जांच में शामिल होने के निर्देश दिए थे। उनका आरोप है कि निर्धारित तारीख पर नासिर खान जांच में शामिल नहीं हुए। इस मामले में अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत में इस संबंध में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर सबकी निगाहें रहेंगी। पुलिस जांच को लेकर परिवादी ने रखा पक्ष डॉ. मोहम्मद शोएब ने जयसिंहपुरा खोर थाना पुलिस की जांच को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि थाना पुलिस निष्पक्ष तरीके से जांच कर रही है। उन्होंने मामले से जुड़ी कथित अनियमितताओं की पड़ताल और निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवादी के मुताबिक, नासिर खान सड़वा के खिलाफ अन्य थानों में भी चार मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों की प्रकृति और वर्तमान स्थिति की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से की जानी आवश्यक है। वक्फ जमीन वापस दिलाने की मांग परिवादी डॉ. मोहम्मद शोएब का कहना है कि उनकी लड़ाई का उद्देश्य जामिया तुल हिदाया की वक्फ जमीन वापस दिलाना है। उन्होंने दावा किया कि जब तक जमीन संस्था को वापस नहीं मिलती, तब तक वह कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। इस विवाद में आपराधिक जांच के साथ जमीन के स्वामित्व और कथित सौदों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल भी अहम है। अफजल विहार कॉलोनी की वैधानिक स्थिति पर भी सवाल विवाद का एक प्रमुख पहलू अफजल विहार कॉलोनी है। परिवादी का आरोप है कि जामिया तुल हिदाया से जुड़ी वक्फ जमीन पर कथित रूप से अवैध तरीके से कॉलोनी बसाई गई। उनका कहना है कि कॉलोनी के संबंध में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और नगर निगम को कई बार शिकायतें दी गई हैं। शिकायतों में कथित अनियमितताओं की जांच और कॉलोनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

