जयपुर जंक्शन पर मंगलवार सुबह चेन्नई से आई ट्रेन में करीब 2 करोड़ रुपए की इलायची पकड़ी गई। आरपीएफ और जीआरपी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ट्रेन के पार्सल कोच में बिना बिल के करोड़ों रुपए की इलायची भेजी जा रही है। इसके बाद आरपीएफ ने ट्रेन के एसएलआर कोच की जांच की तो इलायची के 89 बैग मिले। इनका वजन करीब 45 क्विंटल है। इनके साथ कैल्शियम जिंक स्टेबलाइजर के 3 बैग भी मिले। किसी भी सामान का जीएसटी बिल और ई-वे बिल नहीं मिला।
जांच में सामने आया कि करीब 2 करोड़ रुपए कीमत के माल की रेलवे बिल्टी महज 48 हजार रुपए की बनाई गई थी। इससे जीएसटी चोरी के साथ रेलवे को भी किराए में नुकसान होने की आशंका है। मामले में पार्सल बाबुओं की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जीएसटी विभाग ने माल की जांच शुरू कर दी है। माल मंगवाने वाली पार्टी को बुलाया गया, लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। एक महीने से आ रही थी खेप, मुखबिर से मिला इनपुट
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन से बड़े पार्सल के जरिए इलायची की खेप आने की सूचना मिली थी। इसके बाद पिछले एक महीने से निगरानी की जा रही थी। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे ट्रेन संख्या 12967 चेन्नई-जयपुर के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर पहुंची। इसके बाद एसएलआर कोच संख्या 226818 की जांच की गई। इसमें इलायची के 89 बैग मिले। इनमें 64 जूट और 25 प्लास्टिक के कट्टे थे। इसके अलावा कैल्शियम जिंक स्टेबलाइजर के 3 बैग भी मिले। जांच में किसी भी सामान के वैध बिल नहीं मिले।
2 करोड़ के माल की बिल्टी 48 हजार रुपए की
इलायची की कीमत करीब 2 करोड़ रुपए बताई जा रही है, जबकि रेलवे में इसकी बिल्टी महज 48 हजार रुपए की बनाई गई थी। रेलवे में पार्सल बुक करते समय सामान की कीमत बताना जरूरी होता है। इससे सामान गुम होने या नुकसान होने पर उसकी कीमत के आधार पर क्लेम किया जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, माल की वास्तविक कीमत के हिसाब से रेलवे का किराया भी अधिक बनता। ऐसे में कम कीमत की बिल्टी बनाकर रेलवे को भी आर्थिक नुकसान पहुंचाने की आशंका है।
पार्सल बाबुओं की भूमिका संदिग्ध, जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप
माल की बुकिंग और बिना बिल के खेप भेजे जाने के मामले में पार्सल बाबुओं की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। अधिकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान पार्सल कर्मचारियों ने सहयोग नहीं किया और जांच में बाधा डालने की कोशिश की। अब यह जांच की जाएगी कि बिना जीएसटी बिल और ई-वे बिल के इतना माल कैसे भेजा गया और बुकिंग के समय उसकी कीमत कम क्यों बताई गई। पार्सल बुकिंग से जुड़े कर्मचारियों और लीजधारक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जीएसटी चोरी का अनुमान, माल छुड़वाने नहीं पहुंचा कोई
आरपीएफ की सूचना पर सीजीएसटी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और माल की जांच की। माल मंगवाने वाली पार्टी को टैक्स जमा करने के लिए स्टेशन बुलाया गया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद सीजीएसटी अधिकारी हेमंत अरोड़ा ने लिखित निर्देश दिए कि विभाग की अनुमति के बिना माल किसी को नहीं सौंपा जाए। इसके बाद पूरी खेप को पार्सल गोदाम में सुरक्षित रखवा दिया गया। 20 से 25 लाख रुपए की जीएसटी चोरी
अधिकारियों के शुरुआती अनुमान के अनुसार, इस मामले में करीब 20 से 25 लाख रुपए की जीएसटी चोरी हो सकती है। हालांकि, माल की वास्तविक कीमत का आकलन अभी नहीं हुआ है। बुधवार सुबह 10 बजे मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। माल की कीमत तय होने के बाद जीएसटी और जुर्माने की वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी।
जयपुर आईपीएफ प्रदीप कुमार ने बताया कि मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर ट्रेन के एसएलआर कोच की जांच की गई थी। इसमें इलायची और कैल्शियम जिंक स्टेबलाइजर के बैग बिना जीएसटी बिल और ई-वे बिल के मिले। जीएसटी विभाग को सूचना देकर माल सुरक्षित रखवा दिया गया है। विभाग की अनुमति के बिना माल किसी को नहीं सौंपा जाएगा।

