श्रमिक हिंसा से जुड़े मामलों में अदालत ने योगेश मीणा और सृष्टि गुप्ता को जमानत दी है। अदालत ने खास तौर पर इस तथ्य को महत्व दिया कि आरोपितों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही, सृष्टि गुप्ता के मामले में दाखिल आरोप पत्र में घटना में उसकी सक्रिय संलिप्तता स्पष्ट नहीं होने की बात भी अदालत के सामने आई। हालांकि दोनों पर अलग-अलग कोतवाली में 11 मुकदमे दर्ज हैं। इसलिए रिहाई नहीं होगी। ऐसे में अन्य मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण फिलहाल दोनों की जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी। अपर सत्र न्यायाधीश सोमप्रभा मिश्र की अदालत ने नोएडा के सेक्टर-84 में हुई श्रमिक हिंसा से जुड़े फेज दो कोतवाली के अपराध संख्या 165 में योगेश मीणा की जमानत मंजूर की। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि 13 अप्रैल को मदरसन फैक्ट्री के पास वेतनवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसा में बदल गया था। घटना के समय नहीं था मौजूद
इस दौरान तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस व फैक्ट्री कर्मचारियों पर हमले के आरोप लगे थे। बचाव पक्ष के मुताबिक, योगेश का नाम शुरुआती मुकदमे में नहीं था और घटना के समय उसकी मौके पर मौजूदगी भी नहीं थी। उसे 30 मई को गिरफ्तार किया गया था और 20 जून से वह जेल में है। अदालत ने केस डायरी और रिचा ग्लोबल के वाट्सऐप चैट का अवलोकन करने के बाद माना कि आंदोलन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हिंसा में बदलने के तथ्य सामने आते हैं। साथ ही योगेश का कोई आपराधिक इतिहास नहीं मिलने को भी जमानत के पक्ष में महत्वपूर्ण आधार माना गया। 11 को गिरफ्तार 13 की घटना
इसी तरह फेज तीन कोतवाली में दर्ज अपराध संख्या 151 में सृष्टि गुप्ता को भी जमानत दी गई। यह मामला सेक्टर-64, 65, 67, 68 और 69 में श्रमिक हिंसा, यातायात बाधित करने, फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और मारपीट से जुड़ा है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि सृष्टि को 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था, जबकि संबंधित घटना 13 अप्रैल की थी। पूर्व की प्राथमिकी में भी उसका नाम नहीं था। अभियोजन ने सृष्टि पर दुष्प्रेरण और षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाते हुए जमानत का विरोध किया। हालांकि अदालत ने चार्जशीट में उसकी घटना में सक्रिय संलिप्तता स्पष्ट नहीं पाए जाने और कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने को देखते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर दी।


