सीवान में त्योहारों के मद्देनजर सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जगह-जगह सघन वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। यातायात पुलिस, स्थानीय थाना और परिवहन विभाग की टीमें वाहनों की जांच कर रही हैं। हेलमेट, लाइसेंस और अन्य जरूरी कागजात नहीं मिलने पर नियमानुसार जुर्माना भी लगाया जा रहा है। लेकिन सीवान में परिवहन विभाग की वाहन जांच की कार्यशैली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी खुद ऐसी व्यवस्था चला रहे हैं, जिसमें जिम्मेदार अधिकारी गाड़ी के अंदर बैठे रहते हैं और सड़क पर सिपाही वाहन चालकों को रोककर जांच करते नजर आते हैं। ऐसा ही नजारा शहर के गोपालगंज मोड़ पर देखने को मिला। यहां परिवहन विभाग और बिहार सरकार लिखी शीशे बंद स्कॉर्पियो खड़ी थी। गाड़ी के अंदर एमवीआई देवांकित कुमार मौजूद थे, जबकि बाहर एक सिपाही हाथ में ई-चालान मशीन लेकर आने-जाने वाले दोपहिया वाहनों को रोक रहा था। चालकों को रोककर कागजात की जांच की सिपाही वाहन चालकों को रोककर कागजात की जांच कर रहा था। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि हेलमेट और अन्य छोटी-मोटी कमियां मिलने पर मशीन से चालान काटने के बजाय लेन-देन कर वाहन चालकों को छोड़ दिया जा रहा है। 31 जुलाई 2026 को एडीजी यातायात सुधांशु कुमार ने स्पष्ट किया था कि बिहार में सिपाही और एएसआई रैंक के पुलिसकर्मी वाहनों को रोककर जांच और चालान की कार्रवाई नहीं करेंगे। यह अधिकार सब इंस्पेक्टर और उससे ऊपर के अधिकारियों को दिया गया है। अधीनस्थ पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी यातायात नियंत्रण तक सीमित रहेगी। ऐसे में गोपालगंज मोड़ पर सिपाही के माध्यम से कराई जा रही जांच की वैधानिक स्थिति और विभागीय जिम्मेदारी की जांच जरूरी है। वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर अभियान कर दिया समाप्त मामले का दूसरा पहलू यह भी है कि जैसे ही मौके पर वाहन जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू हुई, सिपाही ने विरोध जताया। इसके बाद स्कॉर्पियो से एमवीआई देवांकित कुमार बाहर निकले। उनसे सवाल पूछने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बजाय वहां मौजूद लोगों को इशारा किया और वाहन जांच अभियान समाप्त कर पूरी टीम के साथ रवाना हो गए। स्थानीय लोगों का दावा है कि एमवीआई अक्सर बाइपास और सुनसान जगहों पर इसी तरह गाड़ी खड़ी कर अधीनस्थ कर्मियों से जांच और चालान की कार्रवाई करवाते हैं। जब इस संबंध में देवांकित कुमार से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने जवाब देने के बजाय विज्ञप्ति भेजने की बात कही और वहां से चले गए। सीवान में त्योहारों के मद्देनजर सुरक्षा और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जगह-जगह सघन वाहन जांच अभियान चलाया जा रहा है। यातायात पुलिस, स्थानीय थाना और परिवहन विभाग की टीमें वाहनों की जांच कर रही हैं। हेलमेट, लाइसेंस और अन्य जरूरी कागजात नहीं मिलने पर नियमानुसार जुर्माना भी लगाया जा रहा है। लेकिन सीवान में परिवहन विभाग की वाहन जांच की कार्यशैली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी खुद ऐसी व्यवस्था चला रहे हैं, जिसमें जिम्मेदार अधिकारी गाड़ी के अंदर बैठे रहते हैं और सड़क पर सिपाही वाहन चालकों को रोककर जांच करते नजर आते हैं। ऐसा ही नजारा शहर के गोपालगंज मोड़ पर देखने को मिला। यहां परिवहन विभाग और बिहार सरकार लिखी शीशे बंद स्कॉर्पियो खड़ी थी। गाड़ी के अंदर एमवीआई देवांकित कुमार मौजूद थे, जबकि बाहर एक सिपाही हाथ में ई-चालान मशीन लेकर आने-जाने वाले दोपहिया वाहनों को रोक रहा था। चालकों को रोककर कागजात की जांच की सिपाही वाहन चालकों को रोककर कागजात की जांच कर रहा था। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने बताया कि हेलमेट और अन्य छोटी-मोटी कमियां मिलने पर मशीन से चालान काटने के बजाय लेन-देन कर वाहन चालकों को छोड़ दिया जा रहा है। 31 जुलाई 2026 को एडीजी यातायात सुधांशु कुमार ने स्पष्ट किया था कि बिहार में सिपाही और एएसआई रैंक के पुलिसकर्मी वाहनों को रोककर जांच और चालान की कार्रवाई नहीं करेंगे। यह अधिकार सब इंस्पेक्टर और उससे ऊपर के अधिकारियों को दिया गया है। अधीनस्थ पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी यातायात नियंत्रण तक सीमित रहेगी। ऐसे में गोपालगंज मोड़ पर सिपाही के माध्यम से कराई जा रही जांच की वैधानिक स्थिति और विभागीय जिम्मेदारी की जांच जरूरी है। वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर अभियान कर दिया समाप्त मामले का दूसरा पहलू यह भी है कि जैसे ही मौके पर वाहन जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू हुई, सिपाही ने विरोध जताया। इसके बाद स्कॉर्पियो से एमवीआई देवांकित कुमार बाहर निकले। उनसे सवाल पूछने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसके बजाय वहां मौजूद लोगों को इशारा किया और वाहन जांच अभियान समाप्त कर पूरी टीम के साथ रवाना हो गए। स्थानीय लोगों का दावा है कि एमवीआई अक्सर बाइपास और सुनसान जगहों पर इसी तरह गाड़ी खड़ी कर अधीनस्थ कर्मियों से जांच और चालान की कार्रवाई करवाते हैं। जब इस संबंध में देवांकित कुमार से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने जवाब देने के बजाय विज्ञप्ति भेजने की बात कही और वहां से चले गए।

