भागलपुर और पूर्वी बिहार को सीमांचल से जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु 1 अक्टूबर से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। पुल की मरम्मत और दोबारा बनाने के काम के लिए सरकार ने यह आखिरी फैसला लिया है। करीब 3 महीने तक चलने वाले इस काम के दौरान लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो, इसके लिए गंगा नदी में 12 बड़े जहाज चलाए जाएंगे। खास बात यह है कि इन जहाजों में सफर करने वाले यात्रियों से कोई किराया नहीं लिया जाएगा। पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र ने बताया कि सरकार पुल की मजबूती और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहती। पुल पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक और उसकी बनावट को देखते हुए मरम्मत और सुधार का काम जरूरी हो गया है। इससे पहले भी पुल बंद करने की तैयारी थी, लेकिन भागलपुर समेत आसपास के इलाकों में आई तेज बाढ़ के कारण यह फैसला टालना पड़ा था। बाढ़ के दौरान पुल बंद होने से लोगों को आने-जाने में बड़ी दिक्कत हो सकती थी। अब हालात सुधरने के बाद काम शुरू करने की पूरी तैयारी है। गंगा में चलेंगे 12 जहाज, जरूरत पड़ी तो संख्या बढ़ेगी पुल बंद होने के बाद सबसे बड़ी चिंता भागलपुर-नवगछिया के बीच आने-जाने वाले लोगों की है। इसको देखते हुए सरकार ने गंगा में 12 बड़े जहाज चलाने की योजना बनाई है। मंत्री ने कहा कि यात्रियों की संख्या और जरूरत को देखते हुए जहाजों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। यानी पुल पर पहिए थमने के बाद गंगा की लहरों पर लोगों का सफर शुरू होगा। सरकार का दावा है कि इस वैकल्पिक व्यवस्था से पुल बंद रहने की अवधि में लोगों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सिर्फ मरम्मत नहीं, बदलेगा पुल का स्वरूप
पथ निर्माण मंत्री के अनुसार, विक्रमशिला सेतु पर केवल खानापूर्ति वाली मरम्मत नहीं होगी, बल्कि इसकी संरचना और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। पुल के एक्सपेंशन जॉइंट्स की जांच और मरम्मत, रेलिंग को मजबूत करने, सड़क की सतह को बेहतर और समतल करने व रोशनी की व्यवस्था को दुरुस्त करने जैसे काम किए जाएंगे।
पुल के अलग-अलग हिस्सों की भी विशेषज्ञ टीमों की ओर से जांच की जाएगी। पहले भी टीमों ने पुल का निरीक्षण किया है और आगे भी इसकी संरचनात्मक स्थिति की जांच जारी रहेगी। भागलपुर और पूर्वी बिहार को सीमांचल से जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु 1 अक्टूबर से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। पुल की मरम्मत और दोबारा बनाने के काम के लिए सरकार ने यह आखिरी फैसला लिया है। करीब 3 महीने तक चलने वाले इस काम के दौरान लोगों को आने-जाने में दिक्कत न हो, इसके लिए गंगा नदी में 12 बड़े जहाज चलाए जाएंगे। खास बात यह है कि इन जहाजों में सफर करने वाले यात्रियों से कोई किराया नहीं लिया जाएगा। पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेंद्र ने बताया कि सरकार पुल की मजबूती और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करना चाहती। पुल पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक और उसकी बनावट को देखते हुए मरम्मत और सुधार का काम जरूरी हो गया है। इससे पहले भी पुल बंद करने की तैयारी थी, लेकिन भागलपुर समेत आसपास के इलाकों में आई तेज बाढ़ के कारण यह फैसला टालना पड़ा था। बाढ़ के दौरान पुल बंद होने से लोगों को आने-जाने में बड़ी दिक्कत हो सकती थी। अब हालात सुधरने के बाद काम शुरू करने की पूरी तैयारी है। गंगा में चलेंगे 12 जहाज, जरूरत पड़ी तो संख्या बढ़ेगी पुल बंद होने के बाद सबसे बड़ी चिंता भागलपुर-नवगछिया के बीच आने-जाने वाले लोगों की है। इसको देखते हुए सरकार ने गंगा में 12 बड़े जहाज चलाने की योजना बनाई है। मंत्री ने कहा कि यात्रियों की संख्या और जरूरत को देखते हुए जहाजों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। यानी पुल पर पहिए थमने के बाद गंगा की लहरों पर लोगों का सफर शुरू होगा। सरकार का दावा है कि इस वैकल्पिक व्यवस्था से पुल बंद रहने की अवधि में लोगों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सिर्फ मरम्मत नहीं, बदलेगा पुल का स्वरूप
पथ निर्माण मंत्री के अनुसार, विक्रमशिला सेतु पर केवल खानापूर्ति वाली मरम्मत नहीं होगी, बल्कि इसकी संरचना और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा। पुल के एक्सपेंशन जॉइंट्स की जांच और मरम्मत, रेलिंग को मजबूत करने, सड़क की सतह को बेहतर और समतल करने व रोशनी की व्यवस्था को दुरुस्त करने जैसे काम किए जाएंगे।
पुल के अलग-अलग हिस्सों की भी विशेषज्ञ टीमों की ओर से जांच की जाएगी। पहले भी टीमों ने पुल का निरीक्षण किया है और आगे भी इसकी संरचनात्मक स्थिति की जांच जारी रहेगी।

