नगरपरिषद की ओर से शहरभर में घर-घर कचरा संग्रहण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वार्ड नंबर 48 में इन दावों की हकीकत पूरी तरह उलट नजर आती है। स्थानीय नागरिक नगरपरिषद और नगर विकास न्यास (यूआईटी) की लचर कार्यशैली से बेहद परेशान हैं। स्थिति यह है कि वार्ड की अंदरूनी सड़कें खस्ताहाल हैं। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पूरी तरह ठप पड़ा है। चुनाव के समय किए गए वादे अब तक हवा-हवाई साबित हुए हैं। इससे वार्डवासियों में भारी रोष व्याप्त है। वार्ड पार्षद रामरतन घोड़ेला ने नगरपरिषद पर सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया है। पार्षद के अनुसार शहर के अन्य इलाकों में कचरा उठाने के लिए आधुनिक ऑटो टिपर दिए गए हैं। जबकि वार्ड 48 को मात्र एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के भरोसे छोड़ दिया गया है। यह ट्रॉली भी दिन में सिर्फ एक फेरा लगाती है। इससे पूरे क्षेत्र का कचरा उठना असंभव है। नियमित उठाव न होने से खाली पड़े भूखंड डंपिंग यार्ड बन चुके हैं। वहां से उठती बदबू और पनपते मच्छरों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। 25 प्रतिशत लाइटें बंद: गंदगी के अलावा प्रकाश व्यवस्था भी बेपटरी है। पार्षद ने बताया कि शिवाजी नगर, डाल कॉलोनी और देवनगर जैसी प्रमुख बस्तियों में लगभग 25 प्रतिशत स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। यूआईटी और नगरपरिषद के अधिकारियों को बार-बार सूचित करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अधिकारी केवल टालमटोल कर रहे हैं। दिवाली का महापर्व नजदीक है। ऐसे में अंधेरे और गंदगी के बीच त्योहार मनाने को मजबूर लोगों का सब्र टूट रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो अधिकारियों का घेराव कर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। { समान संसाधन वितरण: नप वार्ड 48 की आबादी व क्षेत्रफल के अनुपात में कम से कम 2 से 3 ऑटो टिपर तुरंत आवंटित करे। कचरा उठाने का समय व रूट चार्ट तय कर सार्वजनिक किया जाए। { सख्त निगरानी व जवाबदेही: स्वच्छता निरीक्षकों की नियमित फील्ड विजिट अनिवार्य हो। ट्रैक्टर-ट्रॉली और कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति व कार्य रिपोर्ट की जीपीएस या डिजिटल निगरानी की जाए। { स्ट्रीट लाइट मरम्मत के लिए त्वरित अभियान: दिवाली से पूर्व यूआईटी और परिषद की एक संयुक्त विद्युत टीम बनाकर वार्ड में सर्वे किया जाए। 48 घंटे के भीतर सभी बंद लाइटों को चालू किया जाए। { सड़क पैचवर्क और कीटनाशक छिड़काव: टूटी सड़कों पर तत्काल पैचवर्क कराया जाए ताकि वाहनों की आवाजाही सुगम हो सके। कचरे के ढेरों वाले स्थानों पर कीटनाशक दवा और चूने का छिड़काव किया जाए। { एकल शिकायत निवारण प्रणाली: वार्ड स्तर पर यूआईटी और परिषद का एक संयुक्त सहायता नंबर जारी हो। वहां दर्ज शिकायतों का 24 से 48 घंटे के भीतर निस्तारण अनिवार्य किया जाए।

