सुहागिनों का प्रमुख पर्व करवा चौथ गुरुवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। जिला मुख्यालय सहित जिलेभर में पर्व में आस्था रखने वाली महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ व्रत रखेंगी। बुधवार को करवा चौथ के व्रत को लेकर महिलाओं ने मिट्टी के करवे व पूजन सामग्री खरीदारी। गुरुवार को दिनभर व्रत रखने के बाद रात को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। महिलाएं छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलेंगी। दिन में महिलाएं पूजा, श्रृंगार और कथा सुनने में व्यस्त रहेंगी। तो कुछ जगहों पर विभिन्न संस्थाओं या फिर महिलाएं की ओर से सामूहिक आयोजन होंगे। कुछ महिलाएं व्रत का उद्यापन भी करेंगी। ज्योतिषाचार्य बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि सूर्योदय सुबह 6:48 बजे और सूर्यास्त शाम 5:55 बजे होगा, जबकि चंद्रोदय रात 8:36 बजे होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि रोहिणी नक्षत्र सुबह 11:11 बजे तक रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र होगा। चंद्रमा वृष राशि में विचरण करेगा। करवा चौथ पर चंद्रमा के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा की जाती है। महिलाएं करवा माता की पूजा कर व्रत कथा सुनती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अविवाहिताएं भी अच्छे वर की कामना से व्रत रखती हैं। महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग की सामग्री भेंट कर पर्व की खुशियां साझा करती हैं। सूर्योदय के साथ होगी व्रत की शुरुआत : करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत रखती हैं। दिनभर पूजा की तैयारी और सोलह शृंगार किया जाता है। शाम को करवा माता के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा कर व्रत कथा सुनी जाती है। कथा के समय साबुत अनाज और मिठाई रखने की परंपरा है। पूजन के समय देव प्रतिमाओं का मुख पश्चिम दिशा में और महिलाओं का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए। चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखकर अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।

