वाराणसी समेत देशभर में एक साथ 14 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को छापेमारी की। यह छापेमारी फर्जी टोल कलेक्शन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई। टीम ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, पश्चिम बंगाल और NCR से जुड़े कार्यालयों और आवासों पर कार्रवाई की। फर्जी FASTag के जरिए ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को टोल से पार कराने के मामले में मास्टरमाइंड आलोक सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है। फर्जी FASTag से ओवरलोडेड ट्रकों को निकालने का खेल जांच में सामने आया है कि फर्जी FASTag और पायरेटेड सॉफ्टवेयर के जरिए ओवरलोडेड और कमर्शियल वाहनों को टोल से पार कराया जा रहा था। इस नेटवर्क में बड़ी संख्या में खनन से जुड़े ट्रकों के शामिल होने की बात सामने आई है। वाराणसी के लाला नगर टोल प्लाजा पर स्टांप चोरी के मामले को भी जांच के दायरे में रखा गया है। अब तक की जांच के अनुसार, NHAI के सर्वर के समानांतर फर्जी या पायरेटेड सॉफ्टवेयर तैयार कर अवैध वसूली का नेटवर्क चलाया जा रहा था। आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ करीब 5% वसूली दिखाई जाती थी, जबकि बाकी 95% रकम में हेराफेरी की जा रही थी। हरहुआ से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क वाराणसी से टोल घोटाले के मास्टरमाइंड आलोक सिंह की गिरफ्तारी के बाद जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि वह हरहुआ में रहकर नेटवर्क संचालित कर रहा था। यहीं से ट्रकों के लिए फर्जी FASTag तैयार किए जाने की बात सामने आई है। 200 से ज्यादा टोल प्लाजा जांच के घेरे में ED की जांच अब देशभर के 200 से ज्यादा टोल प्लाजा तक पहुंच गई है। इनमें उत्तर प्रदेश के करीब 100 टोल प्लाजा भी शामिल बताए जा रहे हैं। एजेंसी कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की जांच कर रही है। ED की टीमें टोल संचालकों, IT कर्मचारियों और आरोपियों के बीच कथित रकम के लेनदेन की जांच कर रही हैं। छापेमारी के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक खातों और संदिग्ध या बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। एजेंसी घोटाले की रकम के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए सबूत जुटा रही है।

