जनशिकायतों के निस्तारण में आगरा कमिश्नरेट पुलिस ने एक बार फिर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। अगस्त महीने की IGRS रैंकिंग में आगरा को सभी 10 मानकों पर पूरे 100 प्रतिशत अंक मिले हैं। प्रदेश सरकार की एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) पर हर महीने रैंकिंग जारी होती है। इसमें देखा जाता है कि शिकायतों का निपटारा कितनी जल्दी और कितनी गुणवत्ता के साथ हुआ। आगरा कमिश्नरेट इससे पहले भी टॉप पर रह चुका है। 5874 शिकायतों पर लिया गया फीडबैक
पुलिस मीडिया सेल के मुताबिक अगस्त में कमिश्नरेट से जुड़ी कुल 5,874 शिकायतों पर शासन स्तर से फीडबैक लिया गया। हर केस में तथ्यों के आधार पर जांच हुई, समय पर कार्रवाई की गई और शिकायतकर्ता से लगातार बातचीत की गई। इसी वजह से गुणवत्ता के पैमाने पर पूरे नंबर मिले। कैसे तय होती है रैंकिंग?
IGRS पर नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज करते हैं। शासन इसकी रोज मॉनिटरिंग करता है। रैंकिंग में तीन बातों का सबसे ज्यादा वजन होता है – शिकायत कितनी जल्दी निपटी, समाधान संतोषजनक था या नहीं और शिकायतकर्ता संतुष्ट हुआ या नहीं। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया, “हम रोज 20 शिकायतकर्ताओं से खुद बात कर फीडबैक लेते हैं, ताकि पता चले कि समस्या का असली समाधान हुआ है या नहीं।” 40 से कम अंक वालों की शुक्रवार को परेड
कमिश्नरेट में रोज सुबह 10 से 10:30 बजे के बीच मॉनिटरिंग होती है और अंक दिए जाते हैं। जिन कर्मचारियों के अंक 40 से कम होते हैं, उन्हें शुक्रवार को परेड में आना अनिवार्य होता है। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि यह सिर्फ नंबरों का खेल नहीं है, बल्कि लोगों के भरोसे का मामला है। आगे भी पारदर्शिता और त्वरित न्याय के सिद्धांत पर काम जारी रहेगा।

