समालखा के पुराने बस अड्डे पर समालखा-पानीपत रूट के ऑटो और ईको ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से अन्य रूटों से ग्रीन बसों को हटाकर समालखा-पानीपत रूट पर चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे उन्हें पर्याप्त सवारियां नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों में शामिल राजेंद्र, काला प्रधान, मोहित, जगपाल मनाना, असनु, भगवानदास, राजपाल, सुनील और बलदेव समेत कई ऑटो ड्राइवर शामिल रहे। उन्होंने बताया कि समालखा इलाके में सैकड़ों ऑटो और ईको चालक रोज पानीपत और समालखा के बीच सवारियां ढोते हैं। इसी कमाई से उनके परिवारों का गुजारा चलता है। ग्रीन बसों की वजह से नहीं मिल रही सवारियां ऑटो और ईको ड्राइवरों के अनुसार, ग्रीन बसें हर पांच मिनट में रुक रही हैं। इससे यात्रियों का एक बड़ा हिस्सा बसों में सफर कर रहा है, और ऑटो व ईको चालकों को सवारियां नहीं मिल पा रही हैं। कई चालक पूरा दिन गाड़ी लेकर खड़े रहते हैं, लेकिन बिना कमाई के घर लौटने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि एक ऑटो या ईको चालक के साथ दो अन्य परिवारों की रोजी-रोटी भी जुड़ी होती है। अगर उनका काम ऐसे ही प्रभावित होता रहा, तो उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो जाएगा। ई बसों की संख्या कम करने की मांग चालकों ने मांग की है कि समालखा-पानीपत रूट पर ग्रीन बसों की संख्या कम की जाए। साथ ही, बसों को एक तय समय अंतराल पर चलाया जाए, ताकि ऑटो और ईको चालकों को भी सवारियां मिल सकें। चालकों ने बताया कि वे समालखा के विधायक मनमोहन सिंह भड़ाना से मिलकर अपनी समस्या और मांगों के बारे में बताएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपने वाहनों की चाबियां विधायक को सौंपने जैसा कदम उठाने पर मजबूर होंगे।

