प्रदूषण से जूझने वाले फरीदाबाद ने स्वच्छ हवा की दिशा में पिछले तीन वर्षों में लंबी छलांग लगाई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराए गए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहर इस बार देशभर में 14वें स्थान पर रहा। खास बात यह है कि वर्ष 2023 में 47वें स्थान पर रहने वाला फरीदाबाद अब 33 पायदान ऊपर पहुंच चुका है। पिछले वर्ष के मुकाबले भी शहर की रैंकिंग में पांच स्थान का सुधार हुआ है। वर्ष 2025 में फरीदाबाद 19वें और 2024 में 21वें स्थान पर था। नगर निगम का दावा है कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए किए गए कई कामों का असर रैंकिंग में दिखाई दिया है। हरियाली बढ़ाने से लेकर सड़कों की धूल रोकने तक काम नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत नगर निगम को वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 28 करोड़ रुपये मिले थे। इस राशि का इस्तेमाल शहर में ग्रीन बेल्ट विकसित करने, पौधरोपण करने और मुंबई-बड़ौदरा एक्सप्रेसवे के किनारे नमो वन विकसित करने सहित कई कार्यों में किया गया। निगम के मुताबिक इस राशि का करीब 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खर्च हो चुका है। शहर के चारों जोन में पौधरोपण अभियान भी चलाया गया। इसके अलावा सड़कों पर बने गड्ढों को भरने और सड़क की धूल को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया। नौ मशीनों से सड़कों की सफाई का दावा धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम की नौ स्वीपिंग मशीनें सड़कों पर उतारी गई हैं। स्वास्थ्य शाखा की ओर से उन सड़कों को चिन्हित किया जाता है जहां धूल की समस्या ज्यादा है। इसके बाद एजेंसी के माध्यम से सफाई कराई जाती है। निगम का कहना है कि मशीनों की निगरानी जीपीएस के जरिए की जाती है। हालांकि, शहर की जमीनी स्थिति में तस्वीर हर जगह एक जैसी नहीं है। फरीदाबाद की कई प्रमुख और अंदरूनी सड़कों पर लंबे समय तक स्वीपिंग मशीनें नहीं पहुंचने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। छह महीने में एक हजार से ज्यादा गड्ढे भरे नगर निगम कमिश्नर यशेन्द्र सिंह ने बताया कि निगम की ओर से बेहतर करने का प्रयास लगातार जारी रहेगा। पिछले छह महीने में एक हजार से अधिक गड्ढों को भरने का काम किया है। सड़क की धूल कम करने के लिए स्वीपिंग मशीनों के साथ पानी का छिड़काव भी कराया जा रहा है। इसको और ज्यादा बेहतर बनाने के लिए काम किया जा रहा है।

