शहर के मेडिकल हब कहे जाने वाले लाइन बाजार में सोमवार को 8 घंटे से अधिक समय तक बिजली गायब रहने से अस्पतालों में लाखों रुपए का डीजल जल गया। इससे डॉक्टरों में भारी आक्रोश है। 12 अक्टूबर को लंबी बिजली कटौती के कारण डॉ. विनोद धारेवा के अस्पताल में ₹6000 और डॉ. तारकेश्वर कुमार के अस्पताल में ₹3000 का डीजल जल गया। इलाके का कोई भी अस्पताल ऐसा नहीं रहा, जहां कम से कम ₹2000 का डीजल न जला हो। आक्रोशित डॉक्टरों और व्यवसायियों ने अब बिहार सरकार के चीफ सेक्रेटरी से शिकायत करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। डॉक्टरों का आरोप है कि लाइन बाजार क्षेत्र में घंटों बिजली गुल रहती है। विभाग कभी पूर्व सूचना देकर तो कभी बिना सूचना दिनभर अघोषित कटौती करता है। मेंटेनेंस के नाम पर बिजली काटना आम जुमला बन चुका है, जिससे नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और जांच सेंटरों का काम ठप पड़ रहा है। हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. विनोद धारेवा, डॉ. अजय कुमार, आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष चौधरी, पूर्व अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार, सचिव प्रिंस पंकज, कोषाध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर कुमार समेत दर्जनों डॉक्टरों ने अविलंब सुधार की मांग की है। डॉ. धारेवा ने कहा कि मेंटेनेंस का कोई लेखा-जोखा नहीं है। बिजली न रहने से मेडिकल उपकरण चलाने में भारी परेशानी और मरीजों के लिए रिस्क बना रहता है। डॉक्टरों ने बताया कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावों के बीच लोकल फॉल्ट और मनमानी कटौती से उन्हें लाखों रुपए जेनरेटर पर फूंकने पड़ रहे हैं। यदि हालात नहीं सुधरे तो नर्सिंग होम, क्लीनिक और जांच सेंटर बंद करने की नौबत आ जाएगी। डॉक्टरों ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से भी करने की बात कही है। बिजली विभाग के कार्यपालक विद्युत अभियंता बलवीर प्रसाद बागिश ने बताया कि दुर्गापूजा को लेकर करीब चार दिनों से लाइन बाजार पीएसएस में मेंटेनेंस कार्य चल रहा था। सड़क किनारे पेड़ों की टहनी छंटाई भी हो रही थी। सोमवार को ब्रेकर कार्य चल रहा था, जिसकी पूर्व सूचना दी गई थी। निर्धारित समय से थोड़ा अधिक समय लग जाने के कारण आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रही। अब यह मेंटेनेंस कार्य बंद कर दिया गया है, इसलिए आगे बिजली बाधित होने की स्थिति नहीं रहेगी। शहर के मेडिकल हब कहे जाने वाले लाइन बाजार में सोमवार को 8 घंटे से अधिक समय तक बिजली गायब रहने से अस्पतालों में लाखों रुपए का डीजल जल गया। इससे डॉक्टरों में भारी आक्रोश है। 12 अक्टूबर को लंबी बिजली कटौती के कारण डॉ. विनोद धारेवा के अस्पताल में ₹6000 और डॉ. तारकेश्वर कुमार के अस्पताल में ₹3000 का डीजल जल गया। इलाके का कोई भी अस्पताल ऐसा नहीं रहा, जहां कम से कम ₹2000 का डीजल न जला हो। आक्रोशित डॉक्टरों और व्यवसायियों ने अब बिहार सरकार के चीफ सेक्रेटरी से शिकायत करने का निर्णय लिया है, जिसके लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। डॉक्टरों का आरोप है कि लाइन बाजार क्षेत्र में घंटों बिजली गुल रहती है। विभाग कभी पूर्व सूचना देकर तो कभी बिना सूचना दिनभर अघोषित कटौती करता है। मेंटेनेंस के नाम पर बिजली काटना आम जुमला बन चुका है, जिससे नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और जांच सेंटरों का काम ठप पड़ रहा है। हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. विनोद धारेवा, डॉ. अजय कुमार, आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष चौधरी, पूर्व अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार, सचिव प्रिंस पंकज, कोषाध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर कुमार समेत दर्जनों डॉक्टरों ने अविलंब सुधार की मांग की है। डॉ. धारेवा ने कहा कि मेंटेनेंस का कोई लेखा-जोखा नहीं है। बिजली न रहने से मेडिकल उपकरण चलाने में भारी परेशानी और मरीजों के लिए रिस्क बना रहता है। डॉक्टरों ने बताया कि 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावों के बीच लोकल फॉल्ट और मनमानी कटौती से उन्हें लाखों रुपए जेनरेटर पर फूंकने पड़ रहे हैं। यदि हालात नहीं सुधरे तो नर्सिंग होम, क्लीनिक और जांच सेंटर बंद करने की नौबत आ जाएगी। डॉक्टरों ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से भी करने की बात कही है। बिजली विभाग के कार्यपालक विद्युत अभियंता बलवीर प्रसाद बागिश ने बताया कि दुर्गापूजा को लेकर करीब चार दिनों से लाइन बाजार पीएसएस में मेंटेनेंस कार्य चल रहा था। सड़क किनारे पेड़ों की टहनी छंटाई भी हो रही थी। सोमवार को ब्रेकर कार्य चल रहा था, जिसकी पूर्व सूचना दी गई थी। निर्धारित समय से थोड़ा अधिक समय लग जाने के कारण आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रही। अब यह मेंटेनेंस कार्य बंद कर दिया गया है, इसलिए आगे बिजली बाधित होने की स्थिति नहीं रहेगी।

