‘टाइप-1 डायबिटीज’ से जूझ रहे बच्चों और उनके परिजनों के लिए राहत की खबर है। राजस्थान में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मरीजों की जांच और इलाज को डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जाएगा। अगर बच्चा तय समय पर HbA1c जांच नहीं कराता है तो सिस्टम परिजनों के साथ-साथ इलाज करने वाले डॉक्टर को भी अलर्ट भेजेगा। बच्चे ने कितनी कैलोरी ली, उसके आधार पर अब कितने इंसुलिन की जरूरत है, इसकी जानकारी भी तुरंत मिलेगी। साथ ही डोज में जरा सी गड़बड़ी होने पर परिजनों को नोटिफिकेशन मिलेगा। इसके साथ ही डेटा का इस्तेमाल SMS हॉस्पिटल के डॉक्टर मरीजों के शरीर में इंसुलिन बनाने के लिए ‘सेल्स ट्रांसप्लांट’ पर रिसर्च में करेंगे। स्वास्थ्य विभाग के ‘मिशन मधुहारी’ प्रोजेक्ट के तहत ‘मधुरूप AI’ प्रोग्राम क्या है? इससे कितने मरीजों को फायदा मिलेगा? AI कैसे काम करेगा? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए ऐसे ही सवालों के जवाब… सबसे पहले जानिए AI से क्या बदलेगा? राजस्थान में इस बीमारी से पीड़ितों की अनुमानित संख्या 53 हजार से ज्यादा है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने ऐसे मरीजों के लिए ‘मिशन मधुहारी’ के तहत ‘मधुहारी क्लिनिक’ खोले थे। इन क्लिनिक पर अब तक रजिस्टर्ड मरीजों की संख्या 3 हजार 474 है। इनमें से 137 मरीजों पर ये पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इस प्रोग्राम को ‘मुधुरूप AI’ नाम दिया गया है। इससे 4 तरह के कामों में मदद मिलेगी… 1. HbA1c जांच का अलर्ट : हर 3 महीने में मुफ्त HbA1c जांच की जाएगी। तय समय पर जांच नहीं कराने वाले मरीज के परिजनों और संबंधित डॉक्टर को मोबाइल पर अलर्ट मिलेगा। 2. डिजिटल लॉगबुक से ट्रैकिंग : इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए सबसे मुश्किल काम होता है डाइट और इंसुलिन की सही मात्रा को ट्रैक करना। बच्चे ने दिनभर क्या खाया और कितनी कैलोरी ली, इसकी जानकारी परिजनों को डिजिटल लॉगबुक में दर्ज करनी होगी। 3. AI बताएगा कितना इंसुलिन चाहिए : डिजिटल लॉगबुक में भरी डिटेल के आधार पर AI टूल बताएगा कि मरीज को भोजन से कितनी कैलोरी मिल चुकी है और अब उसे कितने इंसुलिन की जरूरत है। 4. डोज में गड़बड़ी होने पर मिलेगा अलर्ट: इंसुलिन ज्यादा लगाने या खाने की मात्रा में गड़बड़ी से मरीज के खून में ग्लूकोज का स्तर गिर जाता है। इससे ‘शुगर अटैक’ का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन अब AI इंसुलिन और भोजन के बीच असंतुलन होने पर उसका एनालिसिस कर परिजनों को अलर्ट भेजेगा। टाइप-1 डायबिटीज में बच्चों की हर दिन निगरानी जरूरी टाइप-1 डायबिटीज में शरीर का पैंक्रियाज (अग्नाश्य) पर्याप्त इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित करता है। इसलिए ऐसे मरीजों को नियमित रूप से इंसुलिन लेना पड़ता है। बच्चों में इसकी चुनौती और ज्यादा होती है, क्योंकि उन्हें स्कूल, खेलकूद और डेली एक्टिविटी के साथ खान-पान और इंसुलिन का संतुलन बनाए रखना पड़ता है। खतरनाक है ये बीमारी, हो सकता है शुगर अटैक? डॉक्टर्स के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज खतरनाक है। इसमें शरीर के पैंक्रियाज (अग्न्याशय) में इंसुलिन हार्मोन बनना पूरी तरह बंद हो जाता है। अगर इंसुलिन की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाए और मरीज ने पर्याप्त खाना नहीं खाया हो तो ब्लड में ग्लूकोज बहुत कम हो सकता है। इसे ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ या शुगर अटैक की स्थिति कहते हैं। टाइप-1 डायबिटीज के बच्चों में ऐसी स्थिति पर तुरंत ध्यान देना जरूरी होता है। मधुरूप AI सिस्टम का उद्देश्य ऐसे जोखिम वाले पैटर्न की पहचान कर समय पर परिजनों को अलर्ट देना है। इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं के ट्रांसप्लांट पर भी रिसर्च स्वास्थ्य विभाग टाइप-1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन बनाने वाली आइलेट सेल्स (Islet Cells) के ट्रांसप्लांट पर रिसर्च की तैयारी भी कर रहा है। इसके लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को मधुरूप AI प्रोग्राम से जोड़ा जाएगा, ताकि रिसर्च के लिए जरूरी मरीजों का डेटा उपलब्ध हो सके। आइलेट सेल ट्रांसप्लांट में डोनर के स्वस्थ पैंक्रियाज से विशेष प्रक्रिया के जरिए इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को अलग किया जाता है। इसके बाद इन्हें मरीज के लिवर तक पहुंचाया जाता है, जहां ये कोशिकाएं स्थापित होकर इंसुलिन बनाने का काम कर सकती हैं। पहले फेज में HbA1c ट्रैकिंग : स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. सुनील सिंह ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों के लिए मधुहारी क्लिनिक शुरू किए गए थे। अब इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए ‘मधुरूप AI’ विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में 137 मरीजों को प्रोग्राम में शामिल किया गया है। पहले चरण में बच्चों की HbA1c जांच को ट्रैक किया जाएगा। समय पर जांच नहीं कराने वाले बच्चों और उनके परिजनों को अलर्ट भेजा जाएगा। जरूरत पड़ने पर क्लिनिक की ओर से फोन भी किया जाएगा। फेज-2 में कैलोरी के आधार पर इंसुलिन की जरूरत का आकलन करने वाला सिस्टम विकसित किया जाएगा। क्या है मधुहारी क्लिनिक? मधुहारी क्लिनिक राजस्थान सरकार की एक विशेष पहल है, जो टाइप-1 डायबिटीज (Type-1 Diabetes) से पीड़ित बच्चों के लिए समर्पित है। राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य है, जिसने इस तरह की डेडिकेटेड क्लिनिक की शुरुआत की थी। इन क्लिनिकों पर टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को पहली बार रजिस्ट्रेशन करने पर इलाज के साथ जरूरी सामग्री (इंसुलिन पेन, ग्लूकोमीटर, ग्लूकोमीटर स्ट्रिप्स) फ्री दी जाती है। पहला मधुहारी क्लिनिक नवंबर 2024 में नागौर में शुरू किया गया था। अभी 149 मधुहारी क्लिनिक संचालित किए जा रहे हैं। अगले 2 महीने में इनकी संख्या बढ़ाकर 221 करने की तैयारी है।

