मोतीबाग कचरा डंपिंग पर एनजीटी ने दिखाई सख्ती:किशनगंज में संयुक्त समिति करेगी स्थल जांच, एक माह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

मोतीबाग कचरा डंपिंग पर एनजीटी ने दिखाई सख्ती:किशनगंज में संयुक्त समिति करेगी स्थल जांच, एक माह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश

किशनगंज शहर के मोतीबाग इलाके में ठोस कचरा डंप करने और जलाने से होने वाले प्रदूषण की शिकायत पर NGT, पूर्वी क्षेत्रीय पीठ कोलकाता ने गंभीरता दिखाई है। एनजीटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि इस मामले में पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं। न्यायाधिकरण ने मामले की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह मामला मोहम्मद अंसार खान की शिकायत पर आधारित है, जिसे मूल आवेदन संख्या 100/2026/EZ के तहत दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि किशनगंज शहर का ठोस कचरा मोतीबाग के घनी आबादी वाले क्षेत्र में खुले में डंप किया जा रहा है। इसके साथ ही, समय-समय पर कचरा, प्लास्टिक, रबर और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट जलाए जाने से जहरीला धुआं निकलता है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संयुक्त समिति गठित करने का दिया निर्देश एनजीटी ने मामले की तथ्यात्मक स्थिति का सत्यापन करने और आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) और किशनगंज के जिला आयुक्त/जिला मजिस्ट्रेट के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बीएसपीसीबी को समिति के समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। कार्रवाई के संबंध में सुझाव प्रस्तुत करने का निर्देश समिति को दो सप्ताह के भीतर बैठक कर स्थल का निरीक्षण करने, आवेदक की शिकायतों की जांच करने, संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने और मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद समिति को आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई के संबंध में सुझाव प्रस्तुत करने होंगे। समिति को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर एनजीटी के समक्ष पेश करनी होगी। इस मामले में बिहार सरकार के मुख्य सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव, किशनगंज के जिला आयुक्त/जिला मजिस्ट्रेट, बीएसपीसीबी और नगर परिषद किशनगंज को प्रतिवादी बनाया गया है। एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है। मामले में 17 अगस्त को संबंधित पक्षों को सुनवाई की सूचना भी जारी कर दी गई है। एनजीटी के आदेश के बाद अब मोतीबाग डंपिंग स्थल के निरीक्षण और जांच पर लोगों की नजर टिकी है। समिति की रिपोर्ट से कचरा निस्तारण की वास्तविक स्थिति और प्रदूषण संबंधी शिकायतों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। किशनगंज शहर के मोतीबाग इलाके में ठोस कचरा डंप करने और जलाने से होने वाले प्रदूषण की शिकायत पर NGT, पूर्वी क्षेत्रीय पीठ कोलकाता ने गंभीरता दिखाई है। एनजीटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि इस मामले में पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं। न्यायाधिकरण ने मामले की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। यह मामला मोहम्मद अंसार खान की शिकायत पर आधारित है, जिसे मूल आवेदन संख्या 100/2026/EZ के तहत दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि किशनगंज शहर का ठोस कचरा मोतीबाग के घनी आबादी वाले क्षेत्र में खुले में डंप किया जा रहा है। इसके साथ ही, समय-समय पर कचरा, प्लास्टिक, रबर और जैव-चिकित्सा अपशिष्ट जलाए जाने से जहरीला धुआं निकलता है, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संयुक्त समिति गठित करने का दिया निर्देश एनजीटी ने मामले की तथ्यात्मक स्थिति का सत्यापन करने और आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई के लिए एक संयुक्त समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बीएसपीसीबी) और किशनगंज के जिला आयुक्त/जिला मजिस्ट्रेट के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बीएसपीसीबी को समिति के समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। कार्रवाई के संबंध में सुझाव प्रस्तुत करने का निर्देश समिति को दो सप्ताह के भीतर बैठक कर स्थल का निरीक्षण करने, आवेदक की शिकायतों की जांच करने, संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने और मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद समिति को आवश्यक उपचारात्मक कार्रवाई के संबंध में सुझाव प्रस्तुत करने होंगे। समिति को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर एनजीटी के समक्ष पेश करनी होगी। इस मामले में बिहार सरकार के मुख्य सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव, किशनगंज के जिला आयुक्त/जिला मजिस्ट्रेट, बीएसपीसीबी और नगर परिषद किशनगंज को प्रतिवादी बनाया गया है। एनजीटी ने सभी प्रतिवादियों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित की है। मामले में 17 अगस्त को संबंधित पक्षों को सुनवाई की सूचना भी जारी कर दी गई है। एनजीटी के आदेश के बाद अब मोतीबाग डंपिंग स्थल के निरीक्षण और जांच पर लोगों की नजर टिकी है। समिति की रिपोर्ट से कचरा निस्तारण की वास्तविक स्थिति और प्रदूषण संबंधी शिकायतों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।  

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