मोतिहारी में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर कैंडल मार्च निकाला गया। मार्च एमएस कॉलेज से शुरू होकर शहीद स्थल पर खत्म हुआ। इसमें सहमति और यौन हिंसा के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया।
हाल के दिनों में तुरकौलिया और आसपास के इलाकों में यौन हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। मार्च के जरिए समाज को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने और युवाओं को सहमति व सम्मान का महत्व समझाने की कोशिश की गई।
मार्च एमएस कॉलेज से चांदमारी, बलुआ और कचहरी चौक होते हुए शहीद स्थल पहुंचा। इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा, यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और सम्मानजनक समाज बनाने का संदेश दिया गया।
अभियान का नेतृत्व धनुर्धर आकाश, शेरे बिहार, ऋतेश प्रजापति, प्रिंस दुबे (गौ रक्षक), शिवम श्रीवास्तव, कीर्तन नंदन, भरत गुप्ता, उज्ज्वल ठाकुर, रोशन पांडे और अभिषेक श्रीवास्तव कर रहे हैं। इसमें अन्य क्रिएटर और सामाजिक लोग भी शामिल हैं।
कैंडल मार्च का मुख्य संदेश ‘No Means No’ यानी ‘ना का मतलब ना’ रहा। युवाओं ने कहा कि किसी भी रिश्ते या परिस्थिति में व्यक्ति की इच्छा और सहमति का सम्मान जरूरी है। असहमति के बावजूद दबाव बनाना या जबरदस्ती करना गलत है।
अभियान में गुड टच-बैड टच, निजी सीमाओं की पहचान, ऑनलाइन उत्पीड़न, निजी तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति साझा करने तथा ब्लैकमेलिंग जैसे मुद्दों पर भी जागरूकता का प्रयास किया गया।
आयोजकों ने कहा कि महिला सुरक्षा पूरे समाज की जिम्मेदारी है। परिवार, शिक्षण संस्थानों और युवाओं को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मार्च के जरिए लोगों से महिलाओं का सम्मान करने, उनकी सहमति का आदर करने और यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की गई। मोतिहारी में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर कैंडल मार्च निकाला गया। मार्च एमएस कॉलेज से शुरू होकर शहीद स्थल पर खत्म हुआ। इसमें सहमति और यौन हिंसा के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया।
हाल के दिनों में तुरकौलिया और आसपास के इलाकों में यौन हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। मार्च के जरिए समाज को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने और युवाओं को सहमति व सम्मान का महत्व समझाने की कोशिश की गई।
मार्च एमएस कॉलेज से चांदमारी, बलुआ और कचहरी चौक होते हुए शहीद स्थल पहुंचा। इस दौरान महिलाओं की सुरक्षा, यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और सम्मानजनक समाज बनाने का संदेश दिया गया।
अभियान का नेतृत्व धनुर्धर आकाश, शेरे बिहार, ऋतेश प्रजापति, प्रिंस दुबे (गौ रक्षक), शिवम श्रीवास्तव, कीर्तन नंदन, भरत गुप्ता, उज्ज्वल ठाकुर, रोशन पांडे और अभिषेक श्रीवास्तव कर रहे हैं। इसमें अन्य क्रिएटर और सामाजिक लोग भी शामिल हैं।
कैंडल मार्च का मुख्य संदेश ‘No Means No’ यानी ‘ना का मतलब ना’ रहा। युवाओं ने कहा कि किसी भी रिश्ते या परिस्थिति में व्यक्ति की इच्छा और सहमति का सम्मान जरूरी है। असहमति के बावजूद दबाव बनाना या जबरदस्ती करना गलत है।
अभियान में गुड टच-बैड टच, निजी सीमाओं की पहचान, ऑनलाइन उत्पीड़न, निजी तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति साझा करने तथा ब्लैकमेलिंग जैसे मुद्दों पर भी जागरूकता का प्रयास किया गया।
आयोजकों ने कहा कि महिला सुरक्षा पूरे समाज की जिम्मेदारी है। परिवार, शिक्षण संस्थानों और युवाओं को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मार्च के जरिए लोगों से महिलाओं का सम्मान करने, उनकी सहमति का आदर करने और यौन हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की गई।

