मोतिहारी के माइलस्टोन स्कूल में 120 बच्चों ने दिखाई प्रतिभा:साइंस सफारी 2.0 में विज्ञान से लेकर मार्केटिंग तक का प्रदर्शन, 350 से ज्यादा पेरेंट्स मौजूद

मोतिहारी के माइलस्टोन स्कूल में 120 बच्चों ने दिखाई प्रतिभा:साइंस सफारी 2.0 में विज्ञान से लेकर मार्केटिंग तक का प्रदर्शन, 350 से ज्यादा पेरेंट्स मौजूद

मोतिहारी में माइलस्टोन इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से ‘साइंस सफारी 2.0’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्कूल के 120 से अधिक विद्यार्थियों ने विज्ञान, कला, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए वैज्ञानिक मॉडल, अलग-अलग प्रयोग, कला प्रदर्शनी और फूड स्टॉल कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बच्चों ने केवल अपने प्रोजेक्ट प्रदर्शित नहीं किए, बल्कि खुद स्टॉल लगाकर अपने सामान की मार्केटिंग भी की। छोटे-छोटे बच्चे ग्राहकों को अपने उत्पाद के बारे में बताते और उन्हें खरीदने के लिए आकर्षित करते नजर आए। बच्चों के इस प्रयास से अभिभावक और अतिथि प्रभावित हुए। कई लोगों ने बच्चों के स्टॉल से सामान की खरीदारी भी की। मॉडल और प्रयोगों के जरिए समझाया विज्ञान साइंस सफारी में विद्यार्थियों ने अलग-अलग विषयों पर वैज्ञानिक मॉडल और प्रयोग तैयार किए थे। बच्चों ने अपने मॉडल को अभिभावकों और अतिथियों के सामने प्रस्तुत किया और उसके काम करने के तरीके की जानकारी दी। इस दौरान विज्ञान के कई कॉन्सेप्ट को प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया। वहीं, कला प्रदर्शनी में भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता देखने को मिली। बच्चों ने अलग-अलग विषयों पर अपनी कल्पनाशीलता को कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। अभिभावकों ने विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और मॉडल देखे और उनके बारे में जानकारी ली। स्टॉल पर बच्चे बने मार्केटर, खुद बेचा सामान आयोजन में फूड और अन्य स्टॉल बच्चों के लिए व्यावहारिक सीख का माध्यम बने। विद्यार्थी खुद स्टॉल संभाल रहे थे। वे ग्राहकों से बातचीत करने, सामान की जानकारी देने और उसकी कीमत बताने के साथ बिक्री करते दिखे। बच्चों के लिए यह अनुभव पढ़ाई से अलग था। उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी उत्पाद को तैयार करने के बाद उसकी मार्केटिंग कैसे की जाती है और ग्राहकों से किस तरह बातचीत की जाती है। अभिभावकों ने भी बच्चों के इस प्रयास को प्रोत्साहित किया और उनके स्टॉल से खरीदारी की। 350 से ज्यादा अभिभावक और अतिथि पहुंचे कार्यक्रम में 350 से अधिक अभिभावकों और अतिथियों ने भाग लिया। उन्होंने विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोग, कला प्रदर्शनी और अन्य गतिविधियों को देखा। बड़ी संख्या में अभिभावकों की मौजूदगी से बच्चों का उत्साह बढ़ा। विद्यार्थियों को अपने प्रोजेक्ट को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने और लोगों के सवालों का जवाब देने का मौका मिला। इससे उनमें अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने और अपने काम को दूसरों के सामने समझाने का आत्मविश्वास भी बढ़ा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नरकटिया विधायक विशाल साह रहे। विशेष अतिथियों के रूप में एहतशामुल हक, ललन साहनी, साजिद रज़ा और अमृतेश सिंह मौजूद रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। सवाल पूछने और खुद खोजने का अवसर जरूरी : प्राचार्या विद्यालय की प्रधानाचार्या महिमा वर्मा ने कहा कि बच्चों में सीखने की प्रक्रिया तब अधिक प्रभावी होती है, जब उन्हें केवल उत्तर याद करने के बजाय सवाल पूछने, प्रयोग करने और स्वयं खोज करने का अवसर दिया जाए। ‘साइंस सफारी 2.0’ का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा विकसित करना था। उन्होंने कहा कि गतिविधियों के माध्यम से बच्चे किसी विषय को सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि उसे करके समझते हैं। ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी प्रतिभा और रुचि के अनुसार काम करने का अवसर देते हैं। प्रतियोगिता नहीं, सीखने का मंच उपलब्ध कराना उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन के मनीष कुमार ने बताया कि ‘साइंस सफारी 2.0’ का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता कराना नहीं था। इसका मकसद बच्चों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे प्रश्न पूछ सकें, प्रयोग कर सकें और अपनी जिज्ञासा को रचनात्मक तरीके से व्यक्त कर सकें। उन्होंने कहा कि मॉडल और प्रोजेक्ट तैयार करने से लेकर उसे लोगों के सामने प्रस्तुत करने तक बच्चों ने कई स्तरों पर काम किया। इस पूरी प्रक्रिया से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवाद कौशल और टीमवर्क की भावना विकसित हुई। विज्ञान के साथ कला, रचनात्मकता और उद्यमिता को जोड़कर बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक जीवन के लिए भी तैयार करने का प्रयास किया गया। मोतिहारी में माइलस्टोन इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से ‘साइंस सफारी 2.0’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्कूल के 120 से अधिक विद्यार्थियों ने विज्ञान, कला, रचनात्मकता और व्यावहारिक कौशल का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए वैज्ञानिक मॉडल, अलग-अलग प्रयोग, कला प्रदर्शनी और फूड स्टॉल कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि बच्चों ने केवल अपने प्रोजेक्ट प्रदर्शित नहीं किए, बल्कि खुद स्टॉल लगाकर अपने सामान की मार्केटिंग भी की। छोटे-छोटे बच्चे ग्राहकों को अपने उत्पाद के बारे में बताते और उन्हें खरीदने के लिए आकर्षित करते नजर आए। बच्चों के इस प्रयास से अभिभावक और अतिथि प्रभावित हुए। कई लोगों ने बच्चों के स्टॉल से सामान की खरीदारी भी की। मॉडल और प्रयोगों के जरिए समझाया विज्ञान साइंस सफारी में विद्यार्थियों ने अलग-अलग विषयों पर वैज्ञानिक मॉडल और प्रयोग तैयार किए थे। बच्चों ने अपने मॉडल को अभिभावकों और अतिथियों के सामने प्रस्तुत किया और उसके काम करने के तरीके की जानकारी दी। इस दौरान विज्ञान के कई कॉन्सेप्ट को प्रयोग और गतिविधियों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया। वहीं, कला प्रदर्शनी में भी विद्यार्थियों की रचनात्मकता देखने को मिली। बच्चों ने अलग-अलग विषयों पर अपनी कल्पनाशीलता को कलाकृतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। अभिभावकों ने विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट और मॉडल देखे और उनके बारे में जानकारी ली। स्टॉल पर बच्चे बने मार्केटर, खुद बेचा सामान आयोजन में फूड और अन्य स्टॉल बच्चों के लिए व्यावहारिक सीख का माध्यम बने। विद्यार्थी खुद स्टॉल संभाल रहे थे। वे ग्राहकों से बातचीत करने, सामान की जानकारी देने और उसकी कीमत बताने के साथ बिक्री करते दिखे। बच्चों के लिए यह अनुभव पढ़ाई से अलग था। उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि किसी उत्पाद को तैयार करने के बाद उसकी मार्केटिंग कैसे की जाती है और ग्राहकों से किस तरह बातचीत की जाती है। अभिभावकों ने भी बच्चों के इस प्रयास को प्रोत्साहित किया और उनके स्टॉल से खरीदारी की। 350 से ज्यादा अभिभावक और अतिथि पहुंचे कार्यक्रम में 350 से अधिक अभिभावकों और अतिथियों ने भाग लिया। उन्होंने विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोग, कला प्रदर्शनी और अन्य गतिविधियों को देखा। बड़ी संख्या में अभिभावकों की मौजूदगी से बच्चों का उत्साह बढ़ा। विद्यार्थियों को अपने प्रोजेक्ट को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने और लोगों के सवालों का जवाब देने का मौका मिला। इससे उनमें अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखने और अपने काम को दूसरों के सामने समझाने का आत्मविश्वास भी बढ़ा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नरकटिया विधायक विशाल साह रहे। विशेष अतिथियों के रूप में एहतशामुल हक, ललन साहनी, साजिद रज़ा और अमृतेश सिंह मौजूद रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया। सवाल पूछने और खुद खोजने का अवसर जरूरी : प्राचार्या विद्यालय की प्रधानाचार्या महिमा वर्मा ने कहा कि बच्चों में सीखने की प्रक्रिया तब अधिक प्रभावी होती है, जब उन्हें केवल उत्तर याद करने के बजाय सवाल पूछने, प्रयोग करने और स्वयं खोज करने का अवसर दिया जाए। ‘साइंस सफारी 2.0’ का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा विकसित करना था। उन्होंने कहा कि गतिविधियों के माध्यम से बच्चे किसी विषय को सिर्फ पढ़ते नहीं, बल्कि उसे करके समझते हैं। ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी प्रतिभा और रुचि के अनुसार काम करने का अवसर देते हैं। प्रतियोगिता नहीं, सीखने का मंच उपलब्ध कराना उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन के मनीष कुमार ने बताया कि ‘साइंस सफारी 2.0’ का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिता कराना नहीं था। इसका मकसद बच्चों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे प्रश्न पूछ सकें, प्रयोग कर सकें और अपनी जिज्ञासा को रचनात्मक तरीके से व्यक्त कर सकें। उन्होंने कहा कि मॉडल और प्रोजेक्ट तैयार करने से लेकर उसे लोगों के सामने प्रस्तुत करने तक बच्चों ने कई स्तरों पर काम किया। इस पूरी प्रक्रिया से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवाद कौशल और टीमवर्क की भावना विकसित हुई। विज्ञान के साथ कला, रचनात्मकता और उद्यमिता को जोड़कर बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक जीवन के लिए भी तैयार करने का प्रयास किया गया।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *