मुजफ्फरपुर रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने भ्रष्टाचार और नैतिक अधमता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर शांति प्रकाश कुजूर को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा, हालांकि इसकी प्रभावी तिथि 9 जून 2026 निर्धारित की गई है। कुजूर पर यौन शोषण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। शांति प्रकाश कुजूर वर्तमान में मुजफ्फरपुर जिला बल में तैनात थे और इससे पहले सीतामढ़ी जिले में कार्यरत थे। डीआईजी चंदन कुशवाहा ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीआईजी ने कहा- गरीमा से समझौता नहीं हो सकता डीआईजी ने कहा, “भ्रष्टाचार और पुलिस परिवार की गरिमा को धूमिल करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कठोरतम कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है और इसकी गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” यह पूरा मामला उस समय का है जब सब-इंस्पेक्टर कुजूर मुजफ्फरपुर जिला बल के महिन्दवारा थाना में पदस्थापित थे। उन पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर लगातार तीन साल तक यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया था। पीड़िता की शिकायत के बाद, पुपरी थाना में 3 दिसंबर 2021 को कांड संख्या-399/21 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहित अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपी पुलिस अधिकारी को महिन्दवारा थाना से गिरफ्तार कर जेल में जेल भेज दिया गया था। जांच के बाद पुलिस ने उनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) भी दाखिल कर दिया था। इस घिनौने कृत्य और भ्रष्ट आचरण को देखते हुए विभाग ने उन्हें 17 फरवरी 2022 को ही निलंबित कर दिया था और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही (Disciplinary Proceedings) शुरू कर दी थी।
विभागीय जांच में सिद्ध हुए आरोप इस पूरे मामले की गहन विभागीय जांच के संचालन के लिए सीतामढ़ी के पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) नजीब अनवर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच अधिकारी नजीब अनवर ने अपनी रिपोर्ट में आरोपी सब-इंस्पेक्टर शांति प्रकाश कुजूर को पीड़िता की ओर से लगाए गए सभी आरोपों में पूरी तरह दोषी पाया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक (SP) सीतामढ़ी ने भी जांच रिपोर्ट और आरोपों की पुष्टि करते हुए, आरोपी को कड़ा दंड देने की अनुशंसा पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG), तिरहुत क्षेत्र, मुजफ्फरपुर से की थी।
पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों की विभाग में कोई जगह नहीं DIG ने स्पष्ट किया है कि शांति प्रकाश कुजूर पर नैतिक अधमता (Moral Turpitude) के अत्यंत गंभीर आरोप साबित हुए हैं। ऐसे अधिकारी का व्यक्तिगत चरित्र और आचरण पुलिस जैसे अनुशासित विभाग के अनुकूल बिल्कुल नहीं है। इस प्रकार के निकृष्ट और भ्रष्ट आचरण में संलिप्त पुलिसकर्मियों के विभाग में बने रहने से न केवल आम जनता के बीच पुलिस की छवि खराब होती है, बल्कि संगठन के अन्य ईमानदार कर्मियों के मनोबल पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे अधिकारियों का पुलिस बल में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। इसी के मद्देनजर, जांच प्राधिकार के मंतव्य से पूरी तरह सहमत होते हुए डीआईजी चंदन कुशवाहा ने आरोपी अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया। मुजफ्फरपुर रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने भ्रष्टाचार और नैतिक अधमता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए सब-इंस्पेक्टर शांति प्रकाश कुजूर को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा, हालांकि इसकी प्रभावी तिथि 9 जून 2026 निर्धारित की गई है। कुजूर पर यौन शोषण और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। शांति प्रकाश कुजूर वर्तमान में मुजफ्फरपुर जिला बल में तैनात थे और इससे पहले सीतामढ़ी जिले में कार्यरत थे। डीआईजी चंदन कुशवाहा ने इस कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और अनैतिक आचरण को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीआईजी ने कहा- गरीमा से समझौता नहीं हो सकता डीआईजी ने कहा, “भ्रष्टाचार और पुलिस परिवार की गरिमा को धूमिल करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कठोरतम कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है और इसकी गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” यह पूरा मामला उस समय का है जब सब-इंस्पेक्टर कुजूर मुजफ्फरपुर जिला बल के महिन्दवारा थाना में पदस्थापित थे। उन पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर लगातार तीन साल तक यौन शोषण करने का गंभीर आरोप लगाया था। पीड़िता की शिकायत के बाद, पुपरी थाना में 3 दिसंबर 2021 को कांड संख्या-399/21 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहित अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरोपी पुलिस अधिकारी को महिन्दवारा थाना से गिरफ्तार कर जेल में जेल भेज दिया गया था। जांच के बाद पुलिस ने उनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) भी दाखिल कर दिया था। इस घिनौने कृत्य और भ्रष्ट आचरण को देखते हुए विभाग ने उन्हें 17 फरवरी 2022 को ही निलंबित कर दिया था और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही (Disciplinary Proceedings) शुरू कर दी थी।
विभागीय जांच में सिद्ध हुए आरोप इस पूरे मामले की गहन विभागीय जांच के संचालन के लिए सीतामढ़ी के पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) नजीब अनवर को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। जांच अधिकारी नजीब अनवर ने अपनी रिपोर्ट में आरोपी सब-इंस्पेक्टर शांति प्रकाश कुजूर को पीड़िता की ओर से लगाए गए सभी आरोपों में पूरी तरह दोषी पाया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक (SP) सीतामढ़ी ने भी जांच रिपोर्ट और आरोपों की पुष्टि करते हुए, आरोपी को कड़ा दंड देने की अनुशंसा पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG), तिरहुत क्षेत्र, मुजफ्फरपुर से की थी।
पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों की विभाग में कोई जगह नहीं DIG ने स्पष्ट किया है कि शांति प्रकाश कुजूर पर नैतिक अधमता (Moral Turpitude) के अत्यंत गंभीर आरोप साबित हुए हैं। ऐसे अधिकारी का व्यक्तिगत चरित्र और आचरण पुलिस जैसे अनुशासित विभाग के अनुकूल बिल्कुल नहीं है। इस प्रकार के निकृष्ट और भ्रष्ट आचरण में संलिप्त पुलिसकर्मियों के विभाग में बने रहने से न केवल आम जनता के बीच पुलिस की छवि खराब होती है, बल्कि संगठन के अन्य ईमानदार कर्मियों के मनोबल पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे अधिकारियों का पुलिस बल में बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। इसी के मद्देनजर, जांच प्राधिकार के मंतव्य से पूरी तरह सहमत होते हुए डीआईजी चंदन कुशवाहा ने आरोपी अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।


