मिर्जापुर में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की 142वीं जयंती मनाई गई:व्योमेश शुक्ल को मिला सम्मान, कवियों ने काव्य पाठ से बांधा समां

मिर्जापुर में आचार्य रामचंद्र शुक्ल की 142वीं जयंती मनाई गई:व्योमेश शुक्ल को मिला सम्मान, कवियों ने काव्य पाठ से बांधा समां

मिर्जापुर में हिंदी साहित्य के विकास और आलोचना की परंपरा को नई दिशा देने वाले आचार्य रामचंद्र शुक्ल की 142वीं जयंती पर आचार्य रामचंद्र शुक्ल स्मारक शिक्षण संस्थान के तत्वावधान में समारोह आयोजित किया गया। इसमें साहित्यकारों, कवियों और वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए हिंदी साहित्य में उनके योगदान को रेखांकित किया। इस वर्ष आचार्य रामचंद्र शुक्ल सम्मान नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी के महामंत्री व्योमेश शुक्ल को प्रदान किया गया। लेखनी ने हिंदी साहित्य को दी नई दृष्टि कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य रामचंद्र शुक्ल और महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। मुख्य अतिथि राज्य मंत्री दयाशंकर मिश्र ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपनी लेखनी से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। उनकी रचनाओं ने साहित्य को नई दृष्टि दी और हिंदी भाषा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशिष्ट अतिथि नगर विधायक पं. रत्नाकर मिश्र ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल जनपद का गौरव हैं। उनकी साहित्यिक साधना और विचार आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। आलोचना की परंपरा को किया मजबूत समारोह की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अनुज प्रताप सिंह ने कहा कि आचार्य शुक्ल ने हिंदी आलोचना साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उनके साहित्यिक मूल्यांकन और विचारों ने हिंदी साहित्य की आलोचना परंपरा को मजबूत आधार दिया। इस दौरान डॉ. एसएन पाठक, प्रतिमा शर्मा, डॉ. अनुराधा ओस, शिव प्रसाद द्विवेदी और डॉ. ध्रुव कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने आचार्य शुक्ल के साहित्यिक अवदान, आलोचनात्मक दृष्टि और हिंदी भाषा के विकास में उनके योगदान पर प्रकाश डाला। कवियों ने काव्य पाठ से प्रस्तुत की साहित्यिक संवेदनाएं काव्य पाठ सत्र में लल्लू तिवारी, डॉ. ऊषा कनक पाठक, डॉ. सुधा सिंह, नंदिनी वर्मा, डॉली अग्रहरि, नंदलाल सिंह चंचल, विवेकानंद चौबे और विजय श्रीवास्तव ने अपनी रचनाएं सुनाईं। कविताओं के माध्यम से साहित्यिक संवेदनाओं और विचारों को प्रस्तुत किया गया। मुख्य अतिथि दयाशंकर मिश्र ने कवियों और वक्ताओं को अंगवस्त्र एवं सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। संस्थान के प्रबंधक राकेश शुक्ल ने मंचासीन अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया। सरस्वती वंदना और स्वागत गीत से हुआ अभिनंदन रमाशंकर द्विवेदी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि विद्यालय के बच्चों ने स्वागत गीत गाकर अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन आनंद अमित ने किया। समारोह में अच्युतानंद शुक्ल, राजेंद्र तिवारी, विमल कुमार तिवारी, रमेश चंद्र दुबे, रामजी तिवारी, अभिनव त्रिपाठी, डॉ. विवेक, डॉ. अभिषेक, जाह्नवी तिवारी, राजेश श्रीवास्तव, कासिम, मानस मोहिले, ईश्वर चंद्र, हौसला प्रसाद, लक्ष्मीकांत पांडेय, अमिताभ पांडेय, आशीष शुक्ल और अमरनाथ सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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