रामपुर में गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे डॉ. भीमराव आंबेडकर पार्क में आशा वर्करों के मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिला अध्यक्ष पंडित रामबाबू शर्मा ने उन्हें हक दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मानदेय की मांग पर निर्णय के लिए 10 दिन का समय लिया है। यदि इस अवधि में कोई फैसला नहीं होता है तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद प्रदेशभर में आशा वर्करों और आशा संगिनियों की आवाज को मजबूती से उठाएगा और उनके हितों की लड़ाई लड़ेगा। रामबाबू शर्मा ने कहा कि आशा वर्कर स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने और आपात स्थिति में सहायता करने जैसी जिम्मेदारियां निभाती हैं। कई बार उन्हें दिन-रात काम करना पड़ता है। ऐसे में मानदेय बढ़ाने की उनकी मांग जायज है।
उन्होंने कहा कि जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जा सकता है तो आशा वर्करों और आशा संगिनियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी होनी चाहिए। आशा वर्कर गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाती हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप मानदेय नहीं मिल रहा है। जिला अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद आशा वर्करों के साथ खड़ी है। उनकी मांग शासन तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को मजबूती देने में परिषद सहयोग करेगी। उन्होंने आशा वर्करों और आशा संगिनियों से संगठन को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने स्वार, टांडा, बिलासपुर, मिलक, सैदनगर, शाहबाद और चमरौआ समेत जिले के सभी ब्लॉकों की आशा वर्करों को संगठन से जोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी आशा वर्कर एकजुट होकर अपनी मांग को मजबूती से उठाएं। यदि मानदेय में वृद्धि नहीं की गई तो वह और उनके संगठन आशा वर्करों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।

