राजस्थान हाईकोर्ट के नव नियुक्त मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल का हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर की ओर से गुरुवार को स्वागत किया गया। समारोह में हाईकोर्ट जयपुर बेंच के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस इंद्रजीत सिंह ने कहा- अगर आप सच्चे दिल से भगवान से कुछ मांगते हैं तो वो देता है। जस्टिस इंद्रजीत सिंह ने कहा- मैं 9 अगस्त को चीफ साहब के साथ इंदौर में एक कॉन्फ्रेंस में था। ये मेरे बगल में बैठे थे। मैंने कहा- सर आप राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश बनकर आ रहे हैं। इस पर ये मुस्कुराए और मुझसे कहा कि आप तो अंतर्यामी हो। मैंने कहा- नहीं, यह मेरी शुभकामनाएं हैं। इंद्रजीत सिंह बोले- छत्तीसगढ़ से जस्टिस एमएम श्रीवास्तव पहले राजस्थान हाईकोर्ट में आए थे। उन्होंने राजस्थान के न्याय जगत को बहुत कुछ दिया। अब भगवान ने सुनी और आपने ( जस्टिस संजय के. अग्रवाल) यहां चीफ जस्टिस बनकर शपथ ली। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने 7 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली थी। वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से आए थे। सीजे बोले- न्याय में देरी बड़ी चुनौती मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल ने कहा- आज न्याय व्यवस्था के सामने कई चुनौतियां हैं। इनमें मुकदमों का बढ़ता बोझ, न्याय में देरी, बदलती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव और समाज की बढ़ती अपेक्षाएं हमारे सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों में हमें अपनी कार्यप्रणाली और सोच को समय के अनुरूप डवलप करना होगा। उन्होंने कहा- समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचित और कमजोर वर्ग तक सुलभ और निष्पक्ष न्याय पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। इसके लिए बार और बेंच को मिलकर काम करना होगा। मुख्य न्यायाधीश अग्रवाल ने कहा- बार और बेंच की भूमिका अलग-अलग हो सकती है, लेकिन उद्देश्य एक ही है। न्याय की प्रतिष्ठा और आमजन का न्याय व्यवस्था में विश्वास। एजी बोले- वकीलों की राय भी ली जाए समारोह में महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा- जब मैं वकालत में आया था, उस समय मैंने देखा कि न्यायिक प्रशासन से जुड़े ऐसे फैसले, जिनका संस्थागत प्रभाव होता था या जिनसे एडवोकेट का सीधा संबंध होता था। उनमें बार से अनौपचारिक स्तर पर राय-मशविरा किया जाता था। भले ही निर्णय लेने में बार की आधिकारिक भागीदारी न हो, लेकिन उसका पक्ष और उनकी राय महत्व रखती थी। मेरी मुख्य न्यायाधीश से अपेक्षा है कि भविष्य में न्यायिक व्यवस्था और विशेष रूप से अधिवक्ताओं को प्रभावित करने वाले निर्णयों में बार की भागीदारी या कम से कम बार से प्राथमिक स्तर पर सलाह-मशविरा करने की व्यवस्था डवलप की जाए। नए वकीलों के पास बैग रखने की भी जगह नहीं समारोह में बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने कहा- राजस्थान हाईकोर्ट के परिसर में अंतिम बार साल 2011-12 में ई-ब्लॉक में वकीलों के लिए चैंबर बने थे। इसके बाद से आज स्थिति काफी बदल गई है। आज नए वकीलों के पास अपना लैपटॉप का बैग रखने की जगह भी नहीं है। उन्होंने कहा- रिकॉर्ड के अनुसार हाईकोर्ट को करीब 30 बीघा जमीन आवंटित है, लेकिन वर्तमान में करीब 23 बीघा भूमि ही हाईकोर्ट के कब्जे में है। शेष 7 बीघा जमीन पर कृषि भवन, सिंचाई विभाग और आयकर भवन के कार्यालय संचालित है, लेकिन आज आवश्यकता इसकी है कि हाईकोर्ट के पास उपलब्ध पूरी जमीन का उपयोग हाईकोर्ट की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप किया जाए।

