सीकर में सालासर रोड पर आज कलश यात्रा के साथ भागवत कथा शुरू हो गई है। प्रख्यात कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने कथा के पहले दिन श्रीमद् भागवत कथा का महत्व बताया। इंद्रेश उपाध्याय ने श्रीमद्भागवत को जीवन जीने का सूत्र बताया। उन्होंने व्यासपीठ से बताया कि भागवत कथा कोई कहानी नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में बालक, राजा, मित्र, योद्धा समेत विभिन्न रूप देखने को मिलते हैं। इससे पहले आज सीकर में खाकीजी मंदिर से कथास्थल तक दयालदास महाराज के सान्निध्य में कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालु शामिल हुए। कलश यात्रा के दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए। कथा के अगले दिन यानी 2 अक्टूबर को कपिल चरित्र और ध्रुव चरित्र के प्रसंग सुनाए जाएंगे। यात्रा में अवधेशाचार्य महाराज, मुक्ति नाथ महाराज, मधुसूदनाचार्य महाराज सहित कई साधु-संत तथा कथा में पहले दिन सीकर विधायक राजेंद्र पारीक और पूर्व सभापति जीवण खां मौजूद रहे। पहले देखिए, 4 PHOTO’S श्राद्ध पक्ष में भागवत कथा से पितरों को मिलती है तर्पण और शांति इंद्रेश उपाध्याय ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में भागवत कथा सुनने से पितरों को भी तर्पण और शांति मिलती है। कथा के दूसरे दिन दूसरे दिन कपिल चरित्र-अजमल चरित्र-ध्रुव चरित्र व जड़भरत कथा, तीसरे दिन प्रहलाद चरित्र व वामन अवतार, चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव (नंदोत्सव), पांचवे दिन गोवर्धन लीला महोत्सव, छठे दिन भगवान कृष्ण-रूक्मिणी विवाह महोत्सव और सातवें दिन सुदामा चरित्र व शुकदेव पूजन की कथा के साथ सजीव झांकियां सजाई जाएंगी। 7 अक्टूबर तक रोजाना दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक कथा होगी। कथा के दौरान रोजाना विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। कथा में महिला-पुरूषों के लिए अलग-अलग बैठक व्यवस्था रहेगी और बुजुर्ग और दिव्यांगजनों के आने-जाने के लिए ई-रिक्शा चलेंगे। भागवत कथा में आने-जाने के लिए सीकर शहर समेत आसपास के गांवों से भी गाड़ियों की व्यवस्था की गई है।

