माताओं और बहनों ने कड़हा शिव मंदिर पर कुश में गांठ बांधकर संतान की लंबी आयु की कामना की। यह व्रत हल षष्ठी व्रत कहलाता है, जिसे हरछठ, ललही छठ, कमर छठ या बलराम जयंती भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म में संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह पर्व प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि को भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार भगवान बलराम जी का जन्म हुआ था। बलराम जी का मुख्य शस्त्र ‘हल’ और ‘मूसल’ है, इसलिए इस दिन हल की पूजा का विशेष विधान है।

