बिहार में चुनावी माहौल के बीच जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बुधवार को राज्य और केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कानून-व्यवस्था और बाढ़ के मुद्दे पर सरकार को घेरा। किशोर ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सवाल उठाए। उन्होंने नीट छात्रा, बेगूसराय, समस्तीपुर और जमुई की घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। उनके मुताबिक, घटनाएं सामने आती हैं, बयान आते हैं, पर सुरक्षा के सवाल बने रहते हैं। प्रशांत किशोर ने बिहार में सुशासन के दावों पर भी उठाए सवाल उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ कार्रवाई बताने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में क्या बदलाव हो रहे हैं। किशोर ने बिहार में ‘सुशासन’ के दावों पर भी सवाल उठाया। कानून-व्यवस्था के बाद प्रशांत किशोर ने बाढ़ का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि बिहार में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। उन्होंने पूछा कि हर साल आने वाली बाढ़ का पक्का समाधान कब होगा, सिर्फ राहत सामग्री बांटने से काम नहीं चलेगा। प्रशांत किशोर ने राहत कार्यों के साथ फोटो और प्रचार की राजनीति पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत मिलना जरूरी है, लेकिन सिर्फ राहत बांटने से समस्या खत्म नहीं होगी। जरूरत इस बात की है कि बिहार को बार-बार बाढ़ की तबाही से बचाने के लिए स्थायी और दीर्घकालिक समाधान तैयार किया जाए। ‘जाति-धर्म के नाम पर नहीं, काम देखकर वोट दें’ प्रशांत किशोर ने अपने बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश सीधे मतदाताओं के नाम दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता को सिर्फ जाति, धर्म या किसी नेता के चेहरे को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से सरकार के कामकाज का हिसाब लेने की अपील करते हुए कहा कि वोट ऐसा हथियार है, जिससे जनता सरकार को जवाबदेह बना सकती है। उनके मुताबिक, मतदाता को चुनाव के दौरान यह देखना चाहिए कि कानून-व्यवस्था कैसी रही, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या हुआ, बाढ़ से निपटने की क्या तैयारी रही और आम लोगों की समस्याओं पर सरकार ने कितना काम किया। चुनाव से पहले मुद्दों की पिच तैयार कर रहे प्रशांत किशोर प्रशांत किशोर के इस बयान को चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने हमले के लिए ऐसे मुद्दे चुने हैं, जिनका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से है—सुरक्षा और बाढ़। एक तरफ महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया, तो दूसरी तरफ बाढ़ के बहाने केंद्र और राज्य दोनों की नीतियों पर सवाल खड़े किए गए। यानी प्रशांत किशोर का हमला सिर्फ सरकार पर आरोप लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे सीधे ‘जनता के वोट और सरकार की जवाबदेही’ से जोड़ दिया। बिहार में चुनावी माहौल के बीच जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बुधवार को राज्य और केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कानून-व्यवस्था और बाढ़ के मुद्दे पर सरकार को घेरा। किशोर ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सवाल उठाए। उन्होंने नीट छात्रा, बेगूसराय, समस्तीपुर और जमुई की घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। उनके मुताबिक, घटनाएं सामने आती हैं, बयान आते हैं, पर सुरक्षा के सवाल बने रहते हैं। प्रशांत किशोर ने बिहार में सुशासन के दावों पर भी उठाए सवाल उन्होंने कहा कि सरकार को सिर्फ कार्रवाई बताने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में क्या बदलाव हो रहे हैं। किशोर ने बिहार में ‘सुशासन’ के दावों पर भी सवाल उठाया। कानून-व्यवस्था के बाद प्रशांत किशोर ने बाढ़ का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि बिहार में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। उन्होंने पूछा कि हर साल आने वाली बाढ़ का पक्का समाधान कब होगा, सिर्फ राहत सामग्री बांटने से काम नहीं चलेगा। प्रशांत किशोर ने राहत कार्यों के साथ फोटो और प्रचार की राजनीति पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत मिलना जरूरी है, लेकिन सिर्फ राहत बांटने से समस्या खत्म नहीं होगी। जरूरत इस बात की है कि बिहार को बार-बार बाढ़ की तबाही से बचाने के लिए स्थायी और दीर्घकालिक समाधान तैयार किया जाए। ‘जाति-धर्म के नाम पर नहीं, काम देखकर वोट दें’ प्रशांत किशोर ने अपने बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश सीधे मतदाताओं के नाम दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय जनता को सिर्फ जाति, धर्म या किसी नेता के चेहरे को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से सरकार के कामकाज का हिसाब लेने की अपील करते हुए कहा कि वोट ऐसा हथियार है, जिससे जनता सरकार को जवाबदेह बना सकती है। उनके मुताबिक, मतदाता को चुनाव के दौरान यह देखना चाहिए कि कानून-व्यवस्था कैसी रही, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या हुआ, बाढ़ से निपटने की क्या तैयारी रही और आम लोगों की समस्याओं पर सरकार ने कितना काम किया। चुनाव से पहले मुद्दों की पिच तैयार कर रहे प्रशांत किशोर प्रशांत किशोर के इस बयान को चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने हमले के लिए ऐसे मुद्दे चुने हैं, जिनका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से है—सुरक्षा और बाढ़। एक तरफ महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया, तो दूसरी तरफ बाढ़ के बहाने केंद्र और राज्य दोनों की नीतियों पर सवाल खड़े किए गए। यानी प्रशांत किशोर का हमला सिर्फ सरकार पर आरोप लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने इसे सीधे ‘जनता के वोट और सरकार की जवाबदेही’ से जोड़ दिया।

