औरंगाबाद जिले के पातालगंगा में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि मठ की जमीन पर निजी मेडिकल कॉलेज नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि जब जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की गई थी, तो उसी घोषणा के अनुरूप यहां निर्माण कराया जाए। कॉलेज के नाम पर जमीन हस्तांतरित कराने के बाद अब पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर अस्पताल बनाने की चर्चा है। जो अनुचित है, इसका जोरदार विरोध करेंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेज की घोषणा पर उठाए सवाल भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना जिले की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है। फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के औरंगाबाद आगमन के दौरान सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण की बात कही गई थी। इस घोषणा से जिले के लोगों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद जगी थी। स्थानीय नेताओं ने भी औरंगाबाद में सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग उठाई थी, ताकि जिले के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे जिलों या बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण की बात कहकर मठ की जमीन हस्तांतरित कराई गई थी। अब उसी स्थान पर पीपीपी मोड पर अस्पताल बनाने की चर्चा सामने आ रही है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। पीपीपी मोड पर अस्पताल बनाने का विरोध प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि पातालगंगा में सरकारी मेडिकल कॉलेज का निर्माण होना चाहिए, न कि निजी भागीदारी वाले अस्पताल की व्यवस्था लागू की जाए। जिले के लोगों ने सरकारी मेडिकल कॉलेज की उम्मीद में इस परियोजना का समर्थन किया था। ऐसे में निर्माण की प्रकृति में बदलाव की चर्चा लोगों की अपेक्षाओं के विपरीत है। भाजपा नेता ने पीपीपी मोड पर बनने वाले अस्पतालों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि ऐसी व्यवस्था में आम लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज मिलने में कठिनाइयां हो सकती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना होना चाहिए। सरकारी मेडिकल कॉलेज होने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद रहती है। इसलिए सरकार को जनहित को प्राथमिकता देते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना करनी चाहिए। जमीन हस्तांतरण का श्रेय लेने वाले नेताओं से मांगा जवाब भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि यदि मठ की जमीन पर निजी मेडिकल कॉलेज या निजी भागीदारी वाले अस्पताल के निर्माण का प्रयास किया गया, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने उन नेताओं से भी सवाल किया, जो सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरित कराने का श्रेय लेते रहे हैं। जब जमीन सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने की बात कहकर हस्तांतरित कराई गई थी, तो अब पीपीपी मोड पर अस्पताल बनाने की चर्चा क्यों हो रही है? संबंधित नेताओं को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। औरंगाबाद जिले के पातालगंगा में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर राजनीतिक विरोध शुरू हो गया है। भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि मठ की जमीन पर निजी मेडिकल कॉलेज नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि जब जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की गई थी, तो उसी घोषणा के अनुरूप यहां निर्माण कराया जाए। कॉलेज के नाम पर जमीन हस्तांतरित कराने के बाद अब पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर अस्पताल बनाने की चर्चा है। जो अनुचित है, इसका जोरदार विरोध करेंगे। सरकारी मेडिकल कॉलेज की घोषणा पर उठाए सवाल भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना जिले की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है। फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के औरंगाबाद आगमन के दौरान सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण की बात कही गई थी। इस घोषणा से जिले के लोगों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद जगी थी। स्थानीय नेताओं ने भी औरंगाबाद में सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग उठाई थी, ताकि जिले के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे जिलों या बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण की बात कहकर मठ की जमीन हस्तांतरित कराई गई थी। अब उसी स्थान पर पीपीपी मोड पर अस्पताल बनाने की चर्चा सामने आ रही है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। पीपीपी मोड पर अस्पताल बनाने का विरोध प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि पातालगंगा में सरकारी मेडिकल कॉलेज का निर्माण होना चाहिए, न कि निजी भागीदारी वाले अस्पताल की व्यवस्था लागू की जाए। जिले के लोगों ने सरकारी मेडिकल कॉलेज की उम्मीद में इस परियोजना का समर्थन किया था। ऐसे में निर्माण की प्रकृति में बदलाव की चर्चा लोगों की अपेक्षाओं के विपरीत है। भाजपा नेता ने पीपीपी मोड पर बनने वाले अस्पतालों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि ऐसी व्यवस्था में आम लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज मिलने में कठिनाइयां हो सकती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य आम नागरिकों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना होना चाहिए। सरकारी मेडिकल कॉलेज होने से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज की बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद रहती है। इसलिए सरकार को जनहित को प्राथमिकता देते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेज की स्थापना करनी चाहिए। जमीन हस्तांतरण का श्रेय लेने वाले नेताओं से मांगा जवाब भाजपा नेता प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि यदि मठ की जमीन पर निजी मेडिकल कॉलेज या निजी भागीदारी वाले अस्पताल के निर्माण का प्रयास किया गया, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने उन नेताओं से भी सवाल किया, जो सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरित कराने का श्रेय लेते रहे हैं। जब जमीन सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाने की बात कहकर हस्तांतरित कराई गई थी, तो अब पीपीपी मोड पर अस्पताल बनाने की चर्चा क्यों हो रही है? संबंधित नेताओं को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

