प्रोफेसर अशोक सेन को वर्ष 2026 के ऑस्कर क्लेन मेडल से सम्मानित किया गया है और यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बन गए हैं। बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज (आईसीटीएस) ने शनिवार को यह जानकारी दी। आईसीटीएस ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में कहा कि आईसीटीएस-इन्फोसिस माधव चेयर के प्रोफेसर सेन को एस-ड्यूलिटी, ब्लैक होल की एंट्रॉपी की सटीक गणना और स्ट्रिंग फील्ड सिद्धांत पर उनके अग्रणी कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
आईसीटीएस ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में कहा कि उनके इन कार्यों ने आधुनिक स्ट्रिंग सिद्धांत को आकार देने में मदद की है। संस्थान ने बताया कि सेन ने 22 अक्टूबर को स्टॉकहोम विश्वविद्यालय के अल्बानोवा केंद्र में वर्ष 2026 का ऑस्कर क्लेन स्मृति व्याख्यान दिया। उनके व्याख्यान का शीर्षक ‘ग्रैविटी फ्रॉम स्ट्रिंग्स एंड स्ट्रिंग्स फ्रॉम ग्रैविटी’ था।
आईसीटीएस के अनुसार, स्ट्रिंग सिद्धांत की एकीकृत संरचना स्थापित करने में उनके योगदान के लिए सेन को 2012 में फंडामेंटल फिजिक्स का ब्रेकथ्रू पुरस्कार और 2014 में डिराक मेडल मिला था। उन्हें 2009 में इन्फोसिस पुरस्कार (गणितीय विज्ञान), 1994 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, 1989 में आईसीटीपी पुरस्कार, 2001 में पद्मश्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। आईसीटीएस के निदेशक राजेश गोपाकुमार ने सेन को बधाई देते हुए कहा, ‘‘हम सभी की ओर से अशोक को हार्दिक बधाई।
अशोक का हमारे साथ होना और यहां आईसीटीएस में उत्कृष्टता के मानक स्थापित करना हमारे लिए बेहद सुखद रहा है।’’
आईसीटीएस के अनुसार, स्वीडन के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लेन के नाम पर दिया जाने वाला यह मेडल भौतिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को मान्यता देता है। आईसीटीएस के अनुसार, यह मेडल स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल भौतिकी समिति द्वारा वर्ष 1988 से हर साल प्रदान किया जाता है।

