बेगूसराय में गंगा नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद वाटर लेवल 2021 के बाद उच्चतम फ्लड लेवल पर पहुंचकर थम गया। करीब 5 साल बाद बाढ़ ने 2021 की तुलना में 50 हजार अधिक लोगों को प्रभावित किया है। जिले की करीब 4 लाख की आबादी ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि 15 दिनों से जलमग्न होने के कारण 87 स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। शाम्हो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा दियारा के पंचायतों में चलने वाले अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा व्यवस्था हो चुकी है। वर्तमान में गंगा एवं बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र से बाढ़ की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों की 2 तस्वीरें देखिए दीघा, गांधी घाट, हाथीदह एवं मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर दीघा, गांधी घाट, हाथीदह एवं मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। जबकि बूढ़ी गंडक का जलस्तर खगड़िया में भी खतरे के निशान से ऊपर है। प्रशासन द्वारा जलस्तर एवं उसकी प्रवृत्ति पर निरंतर नजर रखी जा रही है। वर्तमान में जिले के आठ अंचलों में दो नगर निकाय एवं 37 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों के 189 गांव एवं 325 वार्ड प्रभावित हुए हैं। 3 लाख 80 हजार 980 की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बेगूसराय सदर अंचल के रचियाही एवं नगर निगम के वार्ड नंबर- 4, 5, 6, 17 एवं 18, बछवाड़ा के विशनपुर, दादुपुर एवं चमथा की तीनों पंचायतें, साहेबपुर कमाल के संदलपुर, समस्तीपुर एवं रघुनाथपुर बरारी पंचायत बाढ़ प्रभावित है। 2016 में आठ प्रखंडों की 41 पंचायतें और करीब 3.9 लाख लोग प्रभावित थे इसी प्रकार बलिया प्रखंड के छह पंचायत, तेघड़ा के रातगांव, आधारपुर, बरौनी-2, निपनिया एवं नगर पंचायत, मटिहानी के रामदीरी की चारों पंचायत, खोरमपुर, गोरगामा, सिंहमा, बलहपुर एवं मटिहानी, बरौनी के सिमरिया-2, मल्हीपुर दक्षिण, महना एवं केशावे तथा शाम्हो के सलहा सैदपुर-1, सलहा सैदपुर-2 एवं अकबरपुर बरारी बाढ़ प्रभावित है। पिछले वर्षों की बाढ़ की स्थिति से वर्तमान स्थिति की तुलना करें तो 2016 में आठ प्रखंडों की 41 पंचायतें और करीब 3.9 लाख लोग प्रभावित हुए थे। 2021 में आठ प्रखंडों की 41 पंचायतें तथा करीब 3.5 लाख लोग प्रभावित हुए थे। 2025 में आठ प्रखंडों की 39 पंचायतें और करीब 3.5 लाख लोग प्रभावित हुए थे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन एवं राहत-बचाव कार्यों के लिए 269 नावें डीएम रिची पांडेय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन एवं राहत-बचाव कार्यों के लिए 269 नावें चलाई जा रही हैं, जिनमें 23 सरकारी एवं 246 निजी नावें शामिल हैं। बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी एवं शाम्हो में एसडीआरएफ की प्रतिनियुक्ति की गई है, जबकि बलिया में एनडीआरएफ की टीम तैनात है। बाढ़ प्रभावित एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच पॉलीथीन शीट का वितरण भी लगातार किया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 228 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जिनमें वर्तमान में 182 केंद्र संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 80 बाढ़ राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं। जहां आश्रित परिवारों को भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 62 चिकित्सा दल कार्यरत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 62 चिकित्सा दल कार्यरत हैं, जिनमें 14 चलंत चिकित्सा दल, 19 अस्थायी चिकित्सा दल एवं 29 स्थायी चिकित्सा दल शामिल हैं। इसके साथ ही चार बोट एम्बुलेंस भी कार्यरत हैं। सदर अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश रोधी दवा, ओआरएस, क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर सहित 122 प्रकार की जीवन रक्षक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। बाढ़ प्रभावित पशुओं की देखभाल के लिए 46 पशु शिविर एवं आठ मेडिकल वैन संचालित किए जा रहे हैं। अब तक 39375 पशु प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 7909 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। प्रभावित पशुपालकों के बीच अब तक 1,418 क्विंटल पशुचारा (भूसा एवं दाना) वितरित किया जा चुका है। बेगूसराय, मंझौल, बलिया, तेघड़ा एवं बखरी क्षेत्र में 10 मुख्य तटबंध एवं 10 जमींदारी बांध तटबंधों की सुरक्षा को लेकर जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। बेगूसराय, मंझौल, बलिया, तेघड़ा एवं बखरी क्षेत्र में 10 मुख्य तटबंध एवं 10 जमींदारी बांध हैं, सभी सुरक्षित पाए गए हैं। विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर किए गए कटाव निरोधक कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं। तटबंधों की सुरक्षा को लेकर अधिकारी एवं अभियंता लगातार निगरानी कर रहे हैं। आपदा संपूर्ति पोर्टल पर बाढ़ प्रभावित 100953 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जबकि 1584 नई प्रविष्टियां जोड़ी गई हैं। 2025 में 89741 प्रभावित परिवारों को जीआर की राशि का वितरण किया गया था। जिले में 27034 हेक्टेयर बाढ़ संभावित कृषि क्षेत्र है। इसमें 33 प्रतिशत से अधिक प्रभावित कृषि क्षेत्र 19504 हेक्टेयर आंका गया है। प्रभावित किसानों के लिए वैकल्पिक फसल योजना एवं बीज वितरण की तैयारी भी की गई है। डीएम रिची पांडेय ने कहा कि जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को क्षेत्र में सक्रिय रहकर राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया गया है। प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित लोगों को सभी तरह से राहत दिए जा रहे हैं। जिला प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। बेगूसराय में गंगा नदी के जलस्तर में हुई वृद्धि के बाद वाटर लेवल 2021 के बाद उच्चतम फ्लड लेवल पर पहुंचकर थम गया। करीब 5 साल बाद बाढ़ ने 2021 की तुलना में 50 हजार अधिक लोगों को प्रभावित किया है। जिले की करीब 4 लाख की आबादी ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि 15 दिनों से जलमग्न होने के कारण 87 स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। शाम्हो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा दियारा के पंचायतों में चलने वाले अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा व्यवस्था हो चुकी है। वर्तमान में गंगा एवं बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र से बाढ़ की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। बाढ़ प्रभावित गांवों की 2 तस्वीरें देखिए दीघा, गांधी घाट, हाथीदह एवं मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार गंगा नदी का जलस्तर दीघा, गांधी घाट, हाथीदह एवं मुंगेर में खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। जबकि बूढ़ी गंडक का जलस्तर खगड़िया में भी खतरे के निशान से ऊपर है। प्रशासन द्वारा जलस्तर एवं उसकी प्रवृत्ति पर निरंतर नजर रखी जा रही है। वर्तमान में जिले के आठ अंचलों में दो नगर निकाय एवं 37 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों के 189 गांव एवं 325 वार्ड प्रभावित हुए हैं। 3 लाख 80 हजार 980 की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बेगूसराय सदर अंचल के रचियाही एवं नगर निगम के वार्ड नंबर- 4, 5, 6, 17 एवं 18, बछवाड़ा के विशनपुर, दादुपुर एवं चमथा की तीनों पंचायतें, साहेबपुर कमाल के संदलपुर, समस्तीपुर एवं रघुनाथपुर बरारी पंचायत बाढ़ प्रभावित है। 2016 में आठ प्रखंडों की 41 पंचायतें और करीब 3.9 लाख लोग प्रभावित थे इसी प्रकार बलिया प्रखंड के छह पंचायत, तेघड़ा के रातगांव, आधारपुर, बरौनी-2, निपनिया एवं नगर पंचायत, मटिहानी के रामदीरी की चारों पंचायत, खोरमपुर, गोरगामा, सिंहमा, बलहपुर एवं मटिहानी, बरौनी के सिमरिया-2, मल्हीपुर दक्षिण, महना एवं केशावे तथा शाम्हो के सलहा सैदपुर-1, सलहा सैदपुर-2 एवं अकबरपुर बरारी बाढ़ प्रभावित है। पिछले वर्षों की बाढ़ की स्थिति से वर्तमान स्थिति की तुलना करें तो 2016 में आठ प्रखंडों की 41 पंचायतें और करीब 3.9 लाख लोग प्रभावित हुए थे। 2021 में आठ प्रखंडों की 41 पंचायतें तथा करीब 3.5 लाख लोग प्रभावित हुए थे। 2025 में आठ प्रखंडों की 39 पंचायतें और करीब 3.5 लाख लोग प्रभावित हुए थे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन एवं राहत-बचाव कार्यों के लिए 269 नावें डीएम रिची पांडेय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन एवं राहत-बचाव कार्यों के लिए 269 नावें चलाई जा रही हैं, जिनमें 23 सरकारी एवं 246 निजी नावें शामिल हैं। बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी एवं शाम्हो में एसडीआरएफ की प्रतिनियुक्ति की गई है, जबकि बलिया में एनडीआरएफ की टीम तैनात है। बाढ़ प्रभावित एवं जरूरतमंद परिवारों के बीच पॉलीथीन शीट का वितरण भी लगातार किया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 228 सामुदायिक रसोई केंद्र चिन्हित किए गए हैं, जिनमें वर्तमान में 182 केंद्र संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 80 बाढ़ राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं। जहां आश्रित परिवारों को भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवा सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 62 चिकित्सा दल कार्यरत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 62 चिकित्सा दल कार्यरत हैं, जिनमें 14 चलंत चिकित्सा दल, 19 अस्थायी चिकित्सा दल एवं 29 स्थायी चिकित्सा दल शामिल हैं। इसके साथ ही चार बोट एम्बुलेंस भी कार्यरत हैं। सदर अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश रोधी दवा, ओआरएस, क्लोरीन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर सहित 122 प्रकार की जीवन रक्षक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। बाढ़ प्रभावित पशुओं की देखभाल के लिए 46 पशु शिविर एवं आठ मेडिकल वैन संचालित किए जा रहे हैं। अब तक 39375 पशु प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 7909 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। प्रभावित पशुपालकों के बीच अब तक 1,418 क्विंटल पशुचारा (भूसा एवं दाना) वितरित किया जा चुका है। बेगूसराय, मंझौल, बलिया, तेघड़ा एवं बखरी क्षेत्र में 10 मुख्य तटबंध एवं 10 जमींदारी बांध तटबंधों की सुरक्षा को लेकर जल संसाधन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। बेगूसराय, मंझौल, बलिया, तेघड़ा एवं बखरी क्षेत्र में 10 मुख्य तटबंध एवं 10 जमींदारी बांध हैं, सभी सुरक्षित पाए गए हैं। विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर किए गए कटाव निरोधक कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं। तटबंधों की सुरक्षा को लेकर अधिकारी एवं अभियंता लगातार निगरानी कर रहे हैं। आपदा संपूर्ति पोर्टल पर बाढ़ प्रभावित 100953 परिवार चिन्हित किए गए हैं, जबकि 1584 नई प्रविष्टियां जोड़ी गई हैं। 2025 में 89741 प्रभावित परिवारों को जीआर की राशि का वितरण किया गया था। जिले में 27034 हेक्टेयर बाढ़ संभावित कृषि क्षेत्र है। इसमें 33 प्रतिशत से अधिक प्रभावित कृषि क्षेत्र 19504 हेक्टेयर आंका गया है। प्रभावित किसानों के लिए वैकल्पिक फसल योजना एवं बीज वितरण की तैयारी भी की गई है। डीएम रिची पांडेय ने कहा कि जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को क्षेत्र में सक्रिय रहकर राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया गया है। प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित लोगों को सभी तरह से राहत दिए जा रहे हैं। जिला प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

