बुर्का पहनकर युवतियों के डांस पर नाराज हुए मौलाना:कारी इसहाक गोरा बोले-धार्मिक पहचान को मनोरंजन का हिस्सा बनाना शर्मनाक, पूछा-कौन हैं ये युवतियां और कार्यक्रम का आयोजक कौन?

बुर्का पहनकर युवतियों के डांस पर नाराज हुए मौलाना:कारी इसहाक गोरा बोले-धार्मिक पहचान को मनोरंजन का हिस्सा बनाना शर्मनाक, पूछा-कौन हैं ये युवतियां और कार्यक्रम का आयोजक कौन?

सहारनपुर में सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ युवतियां बुर्का पहनकर स्टेज पर डांस करती हुई नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद इस पर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया सामने आई है। जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक एवं प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने वीडियो को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने प्रशासन से वायरल वीडियो की वास्तविकता की जांच कराने और कार्यक्रम के आयोजकों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि वायरल वीडियो को लेकर सबसे पहले यह पता लगाया जाना जरूरी है कि उसमें दिखाई दे रही युवतियां कौन हैं और यह कार्यक्रम कहां आयोजित किया गया था। इसके साथ ही कार्यक्रम के आयोजक और संचालक की भी पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कार्यक्रम में किसी विशेष धार्मिक पहचान या धार्मिक पहनावे का इस्तेमाल करके इस तरह की प्रस्तुति दी गई है, तो प्रशासन को मामले का संज्ञान लेकर इसकी जांच करनी चाहिए। बुर्का धार्मिक पहचान और सम्मान से जुड़ा पहनावा कारी इसहाक गोरा ने कहा कि बुर्का मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक पहचान और सम्मान से जुड़ा पहनावा है। ऐसे में इसका इस्तेमाल मंच पर मनोरंजन या डांस के लिए किया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रस्तुति से महिलाओं के सम्मान के साथ-साथ किसी धर्म विशेष की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म या समुदाय की धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों, पहनावों या अन्य चीजों का इस्तेमाल मनोरंजन के उद्देश्य से करते समय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए। धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही सामाजिक स्तर पर विवाद का कारण बन सकती है। प्रशासन से वीडियो की वास्तविकता जांचने की मांग मौलाना कारी इसहाक गोरा ने प्रशासन से मांग की कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता और उसके संदर्भ की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि वीडियो कब और कहां बनाया गया, इसमें दिखाई दे रही युवतियां कौन हैं तथा कार्यक्रम का आयोजन किसने कराया था। उन्होंने कहा कि जांच के बाद यदि किसी तरह के नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक पहचान से जुड़े विषय को लेकर सोशल मीडिया पर सामग्री प्रसारित करने से पहले उसकी वास्तविकता की पुष्टि करना जरूरी है। वायरल वीडियो की जांच पर जोर कारी इसहाक गोरा ने प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए वीडियो की जांच कराने की अपील की है। उनका कहना है कि जांच के जरिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि वीडियो किस कार्यक्रम का है और इसे किस उद्देश्य से बनाया गया था। इसके बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई तय की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में सभी धर्मों और समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी धार्मिक प्रतीक या पहनावे का इस्तेमाल करते समय मर्यादा और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।

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