रोहतास के गुप्ताधाम में मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने के दौरान पहाड़ पर चढ़ रहे औरंगाबाद के दो श्रद्धालुओं की गिरने से मौत हो गई। हादसे में औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड के अमरपुरा और शंकरपुर गांव के रहने वाले दो लोगों की जान चली गई। मृतकों की पहचान महथू टोला अमरपुरा निवासी 50 वर्षीय प्रयाग महतो और शंकरपुर गांव निवासी 35 वर्षीय शंभू मेहता के रूप में हुई है। दोनों अपने गांव के ही राम जी मेहता के साथ गुप्ता धाम घूमने के लिए घर से निकले थे। हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया और गांव में मातम पसरा है। पहाड़ चढ़ने के दौरान बिगड़ा संतुलन, दो की मौत बताया जाता है कि मंगलवार को गुप्ता धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी। इसी दौरान वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ के बीच पहाड़ पर चढ़ने के दौरान प्रयाग महतो और शंभू मेहता का संतुलन बिगड़ गया और दोनों नीचे गिर पड़े। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई।दोनों के साथ गुप्ता धाम पहुंचे राम जी मेहता ने हादसे की जानकारी तत्काल मोबाइल फोन से उनके परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिवार के लोग आनन-फानन में गुप्ता धाम के लिए रवाना हो गए। हादसे की सूचना जैसे ही अमरपुरा और शंकरपुर गांव में पहुंची, वहां शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के घरों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। एक सरकारी कर्मचारी तो दूसरा मजदूरी कर चलाता था परिवार हादसे में जान गंवाने वाले शंभू मेहता अनुग्रह नारायण रेलवे स्टेशन पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी और दो पुत्र प्रिंस कुमार व प्रीतम कुमार हैं। शंभू की मौत की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। ग्रामीणों के अनुसार, वह परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ अपनी नौकरी कर रहे थे। उनकी अचानक मौत से परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।वहीं अमरपुरा निवासी प्रयाग महतो बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थे। वह मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके दो पुत्र और दो विवाहित पुत्रियां हैं। पति की मौत की खबर सुनते ही पत्नी शांति देवी सदमे में मूर्छित हो गईं। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन घटनास्थल के लिए हुए रवाना घटना की सूचना मिलते ही परिजन घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार सासाराम स्थित सदर अस्पताल में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा। एक साथ घूमने निकले तीन दोस्तों में से दो की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। ग्रामीणों ने दोनों मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए प्रशासन से हादसे की जानकारी जुटाने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इस दर्दनाक घटना से दोनों परिवारों के लिए मंगलवार का दिन जिंदगी भर का गम बन गया। कैमूर की पहाड़ियों में बसे गुप्ताधाम मंदिर को जानिए गुप्ताधाम कैमूर की पहाड़ी के जंगलों से घिरा हुआ है। यहां पहुंचने के लिए पहाड़ों से होकर गुजरना पड़ता है। इस पहाड़ से दुर्गावती नदी गुजरती है। मंदिर पहुंचने के बाद शिवलिंग तक जाने के लिए अंधेरी गुफा से होकर रास्ता जाता है। यहां बक्सर से गंगाजल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाने की परंपरा है। गुफा में घोर अंधेरा होता है, बिना किसी लाइट के अंदर जाना संभव नहीं है। पहाड़ी पर स्थित इस पवित्र गुफा के द्वार पर जाने के बाद सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ता है। गुफा में लगभग 363 फीट अंदर जाने पर बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसमें सालभर पानी रहता है। इसलिए इसे ‘पातालगंगा’ कहते हैं। ‘भस्मासुर के प्रकोप से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में गुप्त रूप से रहे थे’ इस मंदिर के बारे में ये भी बताया जाता है कि भस्मासुर से भयभीत होकर भगवान शिव को भागना पड़ा था तो वह इसी धाम की गुफा में आकर छुपे थे। भगवान विष्णु ने पार्वती का रूप धारण करके भस्मासुर को अपने सिर पर हाथ रखकर नृत्य करने का प्रस्ताव रखा था। देवी पार्वती से शादी करने के लालच में भस्मासुर ने जब अपने सिर पर हाथ रखकर नृत्य शुरू किया, तो भगवान शिव से प्राप्त किए गए वरदान के कारण वह जलकर भस्म हो गया। रोहतास के गुप्ताधाम में मंगलवार को श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने के दौरान पहाड़ पर चढ़ रहे औरंगाबाद के दो श्रद्धालुओं की गिरने से मौत हो गई। हादसे में औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड के अमरपुरा और शंकरपुर गांव के रहने वाले दो लोगों की जान चली गई। मृतकों की पहचान महथू टोला अमरपुरा निवासी 50 वर्षीय प्रयाग महतो और शंकरपुर गांव निवासी 35 वर्षीय शंभू मेहता के रूप में हुई है। दोनों अपने गांव के ही राम जी मेहता के साथ गुप्ता धाम घूमने के लिए घर से निकले थे। हादसे की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में कोहराम मच गया और गांव में मातम पसरा है। पहाड़ चढ़ने के दौरान बिगड़ा संतुलन, दो की मौत बताया जाता है कि मंगलवार को गुप्ता धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी। इसी दौरान वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ के बीच पहाड़ पर चढ़ने के दौरान प्रयाग महतो और शंभू मेहता का संतुलन बिगड़ गया और दोनों नीचे गिर पड़े। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई।दोनों के साथ गुप्ता धाम पहुंचे राम जी मेहता ने हादसे की जानकारी तत्काल मोबाइल फोन से उनके परिजनों को दी। सूचना मिलते ही परिवार के लोग आनन-फानन में गुप्ता धाम के लिए रवाना हो गए। हादसे की सूचना जैसे ही अमरपुरा और शंकरपुर गांव में पहुंची, वहां शोक की लहर दौड़ गई। मृतकों के घरों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। एक सरकारी कर्मचारी तो दूसरा मजदूरी कर चलाता था परिवार हादसे में जान गंवाने वाले शंभू मेहता अनुग्रह नारायण रेलवे स्टेशन पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी और दो पुत्र प्रिंस कुमार व प्रीतम कुमार हैं। शंभू की मौत की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। ग्रामीणों के अनुसार, वह परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ अपनी नौकरी कर रहे थे। उनकी अचानक मौत से परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।वहीं अमरपुरा निवासी प्रयाग महतो बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थे। वह मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके दो पुत्र और दो विवाहित पुत्रियां हैं। पति की मौत की खबर सुनते ही पत्नी शांति देवी सदमे में मूर्छित हो गईं। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें तत्काल इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन घटनास्थल के लिए हुए रवाना घटना की सूचना मिलते ही परिजन घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार सासाराम स्थित सदर अस्पताल में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इसके बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया जाएगा। एक साथ घूमने निकले तीन दोस्तों में से दो की मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। ग्रामीणों ने दोनों मृतकों के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए प्रशासन से हादसे की जानकारी जुटाने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इस दर्दनाक घटना से दोनों परिवारों के लिए मंगलवार का दिन जिंदगी भर का गम बन गया। कैमूर की पहाड़ियों में बसे गुप्ताधाम मंदिर को जानिए गुप्ताधाम कैमूर की पहाड़ी के जंगलों से घिरा हुआ है। यहां पहुंचने के लिए पहाड़ों से होकर गुजरना पड़ता है। इस पहाड़ से दुर्गावती नदी गुजरती है। मंदिर पहुंचने के बाद शिवलिंग तक जाने के लिए अंधेरी गुफा से होकर रास्ता जाता है। यहां बक्सर से गंगाजल लेकर शिवलिंग पर चढ़ाने की परंपरा है। गुफा में घोर अंधेरा होता है, बिना किसी लाइट के अंदर जाना संभव नहीं है। पहाड़ी पर स्थित इस पवित्र गुफा के द्वार पर जाने के बाद सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ता है। गुफा में लगभग 363 फीट अंदर जाने पर बहुत बड़ा गड्ढा है, जिसमें सालभर पानी रहता है। इसलिए इसे ‘पातालगंगा’ कहते हैं। ‘भस्मासुर के प्रकोप से बचने के लिए भगवान शिव इसी गुफा में गुप्त रूप से रहे थे’ इस मंदिर के बारे में ये भी बताया जाता है कि भस्मासुर से भयभीत होकर भगवान शिव को भागना पड़ा था तो वह इसी धाम की गुफा में आकर छुपे थे। भगवान विष्णु ने पार्वती का रूप धारण करके भस्मासुर को अपने सिर पर हाथ रखकर नृत्य करने का प्रस्ताव रखा था। देवी पार्वती से शादी करने के लालच में भस्मासुर ने जब अपने सिर पर हाथ रखकर नृत्य शुरू किया, तो भगवान शिव से प्राप्त किए गए वरदान के कारण वह जलकर भस्म हो गया।


